विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

मोबाइल से बिक रहा कश्मीर का सेब! युवाओं ने बिचौलियों को किया बाय-बाय, ऐसे कमा रहे डबल मुनाफा

Published: Sat, 12 Sep 2026 02:25 PM (GMT+05:30)

कश्मीर के युवा किसान अब सेब बेचने के लिए मंडियों के बजाय स्मार्टफोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। वे बिचौलियों ...और पढ़ें

दिल्ली-मुंबई के ग्राहकों को सस्ता और ताजा कश्मीरी सेब मिल रहा। (फाइल फोटो)

दिल्ली-मुंबई के ग्राहकों को सस्ता और ताजा कश्मीरी सेब मिल रहा। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. युवा किसान स्मार्टफोन से सीधे ग्राहकों को सेब बेच रहे हैं।

  2. बिचौलियों को हटाकर किसानों का मुनाफा दोगुना हुआ।

  3. ग्राहकों को ताजा और 15-20% सस्ता सेब मिल रहा है।

राहुल शर्मा, श्रीनगर। कभी सेब बेचने के लिए कश्मीर का किसान सुबह 4 बजे सोपोर मंडी की लाइन में लगता था, आढ़तिये का इंतजार करता था और फिर कमीशन कटने के बाद जो बचता उसी में खुश रहता था। अब सीन बदल गया है। शोपियां और बडगाम के कई युवा किसानों ने मंडी की इस पुरानी लाइन को काट दिया है। उनके हाथ में अब रसीद बुक नहीं, स्मार्टफोन है। इंस्टाग्राम पर रील, व्हाट्सअप पर ब्रॉडकास्ट और देशभर में सीधी डिलीवरी।

शोपियां को यूं ही एपल टाउन आफ कश्मीर' नहीं कहते। यहां करीब 26 हजार हेक्टेयर में सेब के बाग हैं और जिले की 75 प्रतिशत आबादी इसी पर टिकी है। सोपोर की मंडी एशिया की सबसे बड़ी फल मंडियों में गिनी जाती है। लेकिन इसी सिस्टम की सबसे बड़ी कमजोरी है बिचौलिया।

किसान से लेकर दिल्ली की आजादपुर मंडी तक सेब 4 से 5 हाथों से गुजरता है और हर हाथ 8-10 प्रतिशत कमीशन। अब जब किसान सीधा बेच रहा है, तो दिल्ली या नागपुर में बैठे ग्राहक को मंडी रेट से 15-20 प्रतिशत सस्ता और बाग से तोड़ा हुआ ताजा सेब मिल रहा है।

लॉकडाउन वाला आइडिया, जो हिट हो गया

इसी शोपियां के इरशाद डार ने कोरोना के दूसरे सीजन में जब ट्रक बंद थे और मंडी सूनी थी, तो इंस्टाग्राम पर ''कश्मीरी एपल'' नाम से एक पेज बना दिया। इरशाद बताते हैं कि शुरू में 10-20 लोग पूछते थे, फिर फोटो देखते थे। आज हालात सामान्य हैं फिर भी सीजन में 20 से 25 हजार पेटियां सीधे ऑनलाइन बेच देता हूं।

शर्त सिर्फ एक है- ऑर्डर 150 पेटियों से कम नहीं। ट्रक सीधा बाग से निकलता है और दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई तक पहुंच जाता है। इरशाद अकेले नहीं हैं। बडगाम के फिरदौज अहमद खान सहित आधा दर्जन किसान इंटरनेट मीडिया का पूरा फायदा उठा रहे हैं।

फिरदौज ने तो सेब के साथ बादाम और अखरोट भी ऑनलाइन ''रॉयल कश्मीरी ड्राई फ्रूट'' पर बेचना शुरू कर दिया। वह कहते हैं कि मांग इतनी है कि अब कश्मीर के शहद और केसर को भी पेज पर लाने वाला हूं।

'फार्म-टू-फोन' क्रांति

कृषि विशेषज्ञ इसे ''फार्म-टू-फोन'' क्रांति कह रहे हैं। पहले किसान फसल उगाता था, अब वो खुद अपनी कंपनी का सीइओ, मार्केटिंग हेड और डिलीवरी मैनेजर भी है। शोपियां और सोपोर के इन युवाओं ने बता दिया कि कश्मीर का सेब सिर्फ फल नहीं, एक ब्रांड है और ब्रांड को अब मंडी की जरूरत नहीं, सीधे लोगों के दिल तक पहुंचने के लिए एक मोबाइल ही काफी है।