'घाटी में वापसी, अलग होमलैंड के लिए हो रोडमैप...', बलिदान दिवस पर बोले कश्मीरी हिंदू, जीनोसाइड बिल की भी मांग की
जम्मू में कश्मीरी हिंदू बलिदान दिवस पर विस्थापित हिंदुओं ने आतंकी हमलों के पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी।

बलिदान दिवस पर बोले कश्मीरी हिंदू (फाइल फोटो)
HighLights
कश्मीरी हिंदू बलिदान दिवस पर पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी गई।
केंद्र के सीधे नियंत्रण वाले अलग होमलैंड की मांग की।
1990 के विस्थापन को नरसंहार मान्यता देने पर जोर।
जागरण संवाददाता, जम्मू। कश्मीर में प्रधानमंत्री पैकेज के तहत नौकरी कर रहे विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं को पिछले डेढ़ माह से मिल रही आतंकी धमकियों के बीच सोमवार को कश्मीरी हिंदू बलिदान दिवस पर विस्थापन का दर्द एक बार फिर हरा हो गया।
कश्मीरी हिंदुओं ने अब तक आतंकी हमलों में मारे गए कश्मीरी हिंदुओं को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए घाटी में सुरक्षित वापसी, केंद्र के सीधे नियंत्रण वाले अलग होमलैंड और पुनर्वास के लिए समयबद्ध रोडमैप तैयार करने की मांग उठाई।
आतंकियों ने 14 सितंबर 1989 को घाटी में कश्मीरी हिंदू नेता, भाजपा के वरिष्ठ नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता पंडित टीका लाल टपलू की हत्या कर दी थी। ये वही हत्याकांड है, जिसे कश्मीर में बढ़ते आतंकवाद और कश्मीरी हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के शुरुआती बड़े घटनाक्रमों में गिना जाता है।
काली पट्टी बांधकर दी श्रद्धांजलि
विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं की प्रमुख संस्था पनुन कश्मीर ने जम्मू के पलोड़ा क्षेत्र में एक कार्यक्रम का आयोजन कर टीका लाल टपलू, आतंकवाद का शिकार हुए निर्दोष लोगों और सुरक्षा बल के जवानों की पावन स्मृति में बलिदान दिवस मनाया। कश्मीरी हिंदुओं ने बाजुओं पर काली पट्टी बांधकर दो मिनट का मौन रखकर बलिदानियों को श्रद्धांजलि दी।
समारोह की शुरुआत माता भद्रकाली मंदिर से लाई गई पवित्र वीर ज्योति प्रज्ज्वलित कर की गई। सभा को संबोधित करते हुए पनुन कश्मीर के चेयरमैन टीटू गंजू और संयोजक डॉ. अग्निशेखर ने विस्थापित कश्मीरी हिंदू समाज के लिए केंद्र के सीधे नियंत्रण वाले एक अलग होमलैंड की मांग को प्रमुखता से दोहराया।
जीनोसाइड बिल लागू करने की मांग की
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित क्षेत्र में विधायी और प्रशासनिक अधिकार पूरी तरह भारत-समर्थक शक्तियों के पास होने चाहिए। इसके साथ ही 1990 के विस्थापन और हिंसा को कानूनी तौर पर नरसंहार की मान्यता देने के लिए प्रस्तावित जीनोसाइड बिल को लागू करने पर जोर दिया गया, ताकि दोषियों की जवाबदेही तय हो सके।
नेताओं ने वर्तमान महंगाई को देखते हुए मासिक राहत राशि को 13 हजार से बढ़ाकर तत्काल 25 हजार रुपये करने और विस्थापित युवाओं को केंद्रीय कार्यालयों में नियमित नौकरियां देने की बात कही।
गंजू ने प्रधानमंत्री रोजगार पैकेज के तहत घाटी में सेवारत कर्मचारियों की सुरक्षा पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि बुनियादी सुरक्षा गारंटी के बिना पुनर्वास संभव नहीं है।
सरकार को कर्मियों को मिल रही धमकियों को गंभीरता से लेना चाहिए। वहीं, कर्नल (सेवानिवृत्त) अजय रैना ने कश्मीरी हिंदुओं के होमलैंड की मांग को जम्मू के लिए अलग राज्य के दर्जे से जोड़ा।
अंत में उपस्थित जनसमूह ने आतंकवाद के खिलाफ एकजुट रहकर अपनी पहचान, गरिमा और मूल जड़ों की बहाली तक लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया। इस मौके पर विहारी लाल कौल, संजय रैणा ने भी संबोधित किया।
