कश्मीर के हुनर को मिलेगा बड़ा बाजार, 1,000 से ज्यादा कारीगरों को मिली खास ट्रेनिंग; कारोबार बढ़ाने के गुर सिखाए गए
कश्मीर में पारंपरिक हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए 1,000 से अधिक कारीगरों को ब्रांडिंग, पैकेजिंग और जीआई लेबलिंग का ...और पढ़ें

कश्मीर के 1,000 से ज्यादा कारीगरों को सिखाए ब्रांडिंग और पैकेजिंग के गुर। (फाइल फोटो)
HighLights
1,000 से अधिक कश्मीरी कारीगरों को प्रशिक्षण दिया गया।
ब्रांडिंग, पैकेजिंग और जीआई लेबलिंग पर जोर दिया गया।
पारंपरिक हस्तशिल्प को आधुनिक बाजार से जोड़ा जा रहा है।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। कश्मीर के पारंपरिक हस्तशिल्प को व्यापक बाजार तक पहुंचाने के लिए अब कारीगरों को हुनर के साथ ब्रांडिंग और पैकेजिंग की बारीकियां सिखाई जा रही हैं। इसी कड़ी में हस्तशिल्प एवं हथकरघा निदेशालय, कश्मीर ने 1,000 से अधिक कारीगरों, बुनकरों, सहकारी समितियों और स्वयं सहायता समूहों को प्रशिक्षण दिया।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय की रैंप (आरएएमपी) पहल के तहत श्रीनगर स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (निफ्ट) में 10 क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें कश्मीरी हस्तशिल्प उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और भौगोलिक संकेतक (जीआई) लेबलिंग के महत्व पर जोर दिया गया।
प्रशिक्षण में सोज़नी, क्रूएल और आरी कढ़ाई, अखरोट की लकड़ी पर नक्काशी, पेपर माशी, पश्मीना तथा ट्वीड और पट्टू बुनाई से जुड़े कारीगरों ने भाग लिया।
पारंपरिक उत्पादों को बाजार की मांग के अनुरूप तैयार करने पर जोर
कार्यक्रमों का उद्देश्य पारंपरिक उत्पादों की विशिष्ट पहचान को उभारने और उन्हें बाजार की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने के तरीके बताना था। जीआई शिल्प और ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ओडीओपी) के तहत आने वाले उत्पादों को बढ़ावा देना भी इसका हिस्सा रहा।
ब्रांडिंग और पैकेजिंग से उत्पादों को मिलेगी बाजार में अलग पहचान
निफ्ट के विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को ब्रांड निर्माण, उत्पाद की आकर्षक प्रस्तुति और जरूरत के मुताबिक पैकेजिंग तैयार करने की जानकारी दी। उन्हें बताया गया कि बेहतर पैकेजिंग उत्पादों को सुरक्षित रखने के साथ उनकी गुणवत्ता और खासियत को ग्राहकों तक पहुंचाने में मदद करती है, जबकि प्रभावी ब्रांडिंग बाजार में अलग पहचान बनाने में अहम भूमिका निभाती है।
विभाग के अनुसार, इन कार्यक्रमों के जरिए कश्मीर की पारंपरिक शिल्पकला को आधुनिक विपणन तकनीकों से जोड़ने का प्रयास किया गया है, ताकि स्थानीय उत्पादों की बाजार में पहुंच और बिक्री की संभावनाएं बढ़ सकें
