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भेड़-बकरी पालन से कैसे शुरू करें अपना फार्म? कश्मीर में उन्नत नस्लों के साथ ट्रेनिंग भी मिल रही, ऐसे उठाएं लाभ

Published: Fri, 23 Oct 2026 03:22 PM (IST)

शेर-ए-कश्मीर कृषि विश्वविद्यालय का माउंटेन रिसर्च सेंटर कश्मीर के युवाओं और किसानों के लिए भेड़-बकरी पालन को रोजगार का सुनहरा ...और पढ़ें

कश्मीर में वैज्ञानिक ट्रेनिंग के साथ मिलेंगे उन्नत नस्ल के जानवर।

कश्मीर में वैज्ञानिक ट्रेनिंग के साथ मिलेंगे उन्नत नस्ल के जानवर।

HighLights

  1. स्कास्ट-के सेंटर भेड़-बकरी पालन से रोजगार दे रहा।

  2. हर साल उन्नत नस्लों की खुली नीलामी आयोजित होती है।

  3. किसानों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण और विशेषज्ञ सलाह मिलती है।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। कश्मीर के युवाओं के लिए भेड़-बकरी पालन रोजगार का सुनहरा मौका बन सकता है। शुहामा, गांदरबल स्थित शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (स्कास्ट-के) का माउंटेन रिसर्च सेंटर फॉर शीप एंड गोट किसानों की किस्मत बदलने में जुटा है। यह सेंटर हर साल अपने फार्म पर पाली गईं भेड़-बकरियों की खुली नीलामी करता है, ताकि अच्छी नस्ल के जानवर सीधे किसानों और पंजीकृत ब्रीडरों तक पहुंच सकें।

सेंटर के प्रमुख और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. परवेज अहमद रेशी ने बताया कि इस साल नीलामी के लिए 200 से 300 जानवर उपलब्ध कराए गए हैं। इस सेंटर में भेड़ और बकरियों की कुल 16 उन्नत नस्लें पाली जाती हैं। यह नीलामी हर साल सितंबर-अक्टूबर के महीने में आयोजित की जाती है।

किसान अपनी जरूरत के हिसाब से यहां आकर मेंढ़ा, भेड़, बकरा और अन्य जानवर खरीद सकते हैं। डॉ. रेशी के मुताबिक, नीलामी की जानकारी टीवी, रेडियो, अखबार और सोशल मीडिया के जरिए पहले ही किसानों तक पहुंचा दी जाती है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका फायदा उठा सकें। सेंटर में कोरिडेल, मेरिनो और पश्मीना से जुड़ी बकरी की नस्लों सहित कई अन्य बेहतरीन नस्लें किसानों के लिए उपलब्ध हैं।

युवाओं के लिए बन रहा रोजगार का जरिया

इस पहल का सबसे बड़ा मकसद भेड़ पालन को एक टिकाऊ और मुनाफे वाला रोजगार बनाना है। डॉ. रेशी ने कहा कि खासतौर पर बेरोजगार और कम रोजगार वाले नौजवान कम संख्या में जानवर खरीद कर अपना छोटा फार्म शुरू कर सकते हैं और धीरे-धीरे उसे बड़ा कर सकते हैं। यह कम लागत में अच्छी कमाई का एक स्थायी मॉडल है।

यहां सिर्फ जानवर ही नहीं बेचे जाते, बल्कि किसानों को वैज्ञानिक तरीके से फार्म चलाने की पूरी ट्रेनिंग भी दी जाती है। सेंटर में पशु प्रबंधन, स्वास्थ्य देखभाल, प्रजनन, चारा प्रबंधन और बेहतर देखभाल को लेकर तकनीकी मार्गदर्शन दिया जाता है।

20 हजार किसान जुड़े, हर कदम पर मिल रही मदद

इस सेंटर के साथ करीब 20 हजार किसान जुड़े हुए हैं। यह सेंटर सिर्फ जानवर बेचने का केंद्र नहीं, बल्कि किसानों के लिए एक रिसोर्स सेंटर बन गया है, जहां उन्हें विशेषज्ञ सलाह और क्षमता निर्माण में मदद मिलती है।

डॉ. रेशी ने कहा कि सेंटर का प्रयास मौजूदा फार्मों को मजबूत करना, वैज्ञानिक पशुपालन को बढ़ावा देना और युवाओं को इस क्षेत्र से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। अगर आप भी इस क्षेत्र में किस्मत आजमाना चाहते हैं तो स्कास्ट-के के इस सेंटर की नीलामी आपके लिए एक बेहतर शुरुआत साबित हो सकती है।