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कश्मीर में सर्दियों का टूरिज्म होगा और भी खास, बर्फबारी कम हुई तो उसका भी इंतजाम; पर्यटकों के लिए खास तैयारी

Published: Tue, 20 Oct 2026 05:50 PM (IST)

कश्मीर पर्यटन विभाग आगामी सर्दियों के मौसम को बंपर बनाने की तैयारी में है, जिसमें कृत्रिम बर्फ, पारंपरिक भोजन और ...और पढ़ें

कश्मीर में कृत्रिम बर्फ, स्कीइंग और कार्निवल से पर्यटकों को लुभाएगा विभाग। (फाइल फोटो)

कश्मीर में कृत्रिम बर्फ, स्कीइंग और कार्निवल से पर्यटकों को लुभाएगा विभाग। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. कृत्रिम बर्फ बनाकर स्कीइंग सीजन को बनाए रखने की योजना।

  2. पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए कई स्थानों पर कार्निवल।

  3. स्थानीय रसोइयों को प्रशिक्षित कर विविध व्यंजन परोसने पर जोर।

रजिया नूर, श्रीनगर। सर्दियों की आमद हो चुकी है। ऐसे में बर्फ की सफेद चादर ओढ़े घाटी के पहाड़ों और वादियों की खूबसूरती निहारने के लिए आने वाले पर्यटकों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। पर्यटकों के स्वागत के लिए जहां पर्यटन से जुड़े लोग जुट गए हैं, वहीं पर्यटन विभाग ने भी इस विंटर टूरिस्ट सीजन को शानदार बनाने और अधिक से अधिक पर्यटकों को घाटी की ओर आकर्षित करने के लिए कमर कस ली है।

पर्यटकों को घाटी की ओर खींचने के लिए इंतजामों में कोई कमी न रहे, इसके लिए विभाग ने विस्तृत योजनाएं तैयार करनी शुरू कर दी हैं। इनमें कृत्रिम बर्फ बनाने, पर्यटकों की थाली में कश्मीर के पारंपरिक व्यंजन परोसने और उन्हें पहलगाम, गुलमर्ग व सोनमर्ग के साथ-साथ अन्य अनछुए पर्यटन स्थलों की सैर कराने जैसे इंतजाम शामिल हैं।

पर्यटन विभाग के निदेशक सैयद कमर सज्जाद ने कहा कि कश्मीर का पर्यटन क्षेत्र अब स्थिर हो रहा है और आने वाले सर्दियों के मौसम में इसमें अच्छी बढ़ोतरी की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि कुल मिलाकर रुझान सकारात्मक है। अगर अच्छी बर्फबारी होती है और रास्ते खुले रहते हैं, तो आगामी सर्दियों के मौसम में बड़ी संख्या में पर्यटकों के आने की उम्मीद है।

सज्जाद ने कहा कि विभाग सर्दियों के पर्यटन को पारंपरिक पर्यटन स्थलों से आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत कई जगहों पर कार्निवल आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक पर्यटकों को कश्मीर की ओर आकर्षित किया जा सके।

बर्फबारी कम हुई तो कृत्रिम बर्फ से सजेगा गुलमर्ग और सोनमर्ग

निदेशक ने कहा कि सर्दियों में बर्फ पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र होती है। अधिकांश पर्यटक बर्फ की एक झलक देखने और उसे छूने के लिए घाटी का रुख करते हैं। उन्होंने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण पिछले कुछ वर्षों से यहां पर्याप्त बर्फबारी नहीं हो रही है। इस कमी को पूरा करने के लिए कृत्रिम बर्फ बनाने (आर्टिफिशियल स्नोमेकिंग) के विकल्पों पर भी विचार किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि गुलमर्ग और सोनमर्ग में कृत्रिम बर्फ तैयार करने की योजना है, ताकि पर्यटक बर्फ का लुत्फ उठा सकें। निदेशक ने कहा कि विभाग कृत्रिम बर्फ बनाने और स्केटिंग रिंक जैसी अन्य सुविधाएं विकसित करने पर काम कर रहा है।

उन्होंने बताया कि गुलमर्ग के कोंगडोरी में कृत्रिम बर्फ बनाने की सुविधा स्थापित करने के लिए सलाहकार एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर रहे हैं। इसका उद्देश्य ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव के बावजूद स्कीइंग के मौसम को बनाए रखना है।

कश्मीर में सर्दियों का पर्यटन मौसम पर निर्भर

उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर पर्यटन का ग्राफ ऊपर की ओर जा रहा है। हालांकि, अभी तक पर्यटकों की संख्या 2023 के स्तर तक नहीं पहुंची है, लेकिन पर्यटन क्षेत्र अब स्थिरता के संकेत दे रहा है।

उन्होंने बताया कि घाटी में पर्यटकों की आमद काफी हद तक मौसम पर निर्भर करती है। नवंबर, दिसंबर और जनवरी के महीनों में पर्यटकों को आकर्षित करने में बर्फबारी अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि अगर मौसम अनुकूल रहता है और सड़कें खुली रहती हैं, तो आने वाले सर्दियों के मौसम में घाटी में बड़ी संख्या में पर्यटक आ सकते हैं।

ऐसे में विभाग की कोशिश होगी कि पर्यटकों को यहां आकर निराश न होना पड़े और वे बर्फ में खेलने का अपना शौक पूरा कर सकें।

आयोजित किए जाएंगे कार्निवल

निदेशक ने बताया कि विभाग हर साल नए साल के आसपास गुलमर्ग में सात दिन का कार्निवल आयोजित करता है, लेकिन इस बार अन्य जगहों पर भी कार्निवल आयोजित करने की योजना है। इन आयोजनों को अलग-अलग जगहों पर दो से तीन दिनों तक बढ़ाया जा सकता है।

विभाग पिछले साल शुरू किए गए अपने एकीकृत स्कीइंग प्रशिक्षण कार्यक्रम को भी जारी रखने की योजना बना रहा है, ताकि बच्चों को इस खेल के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। यह कार्यक्रम गुलमर्ग, सोनमर्ग और पहलगाम के साथ-साथ दूधपथरी में भी आयोजित करने की योजना है, बशर्ते वहां तक पहुंचना संभव हो।

कश्मीर में पर्यटकों को मिलेगा अपने क्षेत्र के व्यंजनों का स्वाद

घाटी की सैर के साथ पर्यटकों को अपने क्षेत्र के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद भी चखने को मिले, यह सुनिश्चित करने के लिए कश्मीर के शेफ को प्रशिक्षित किया जाएगा।

सज्जाद ने इस बात पर भी जोर दिया कि देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले पर्यटकों की खान-पान संबंधी प्राथमिकताओं का ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि पर्यटन कारोबारी अपने स्थानीय कर्मचारियों को प्रशिक्षित करें या ऐसे शेफ को काम पर रखें, जिन्हें विभिन्न क्षेत्रों के व्यंजनों की अच्छी जानकारी हो।

उन्होंने कहा कि पर्यटन विभाग भी इस दिशा में विशेष ध्यान देगा और रसोइयों को प्रशिक्षित करने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने होटल और रेस्तरां संचालकों से आग्रह किया कि वे अपने यहां काम करने वाले रसोइयों को विभिन्न तरह के व्यंजन (मल्टी-क्यूजीन) बनाने का प्रशिक्षण दिलाएं।

सज्जाद ने कहा कि विभाग कश्मीर की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक आजीविका को बढ़ावा देने के लिए अन्य एजेंसियों के साथ भी काम कर रहा है। स्थानीय खान-पान की संस्कृति को उजागर करने के लिए जबरवान पार्क में पांच दिवसीय उत्सव आयोजित किया गया था।

उन्होंने कहा कि इस तरह की पहलों का मकसद न केवल कश्मीर की सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा देना है, बल्कि रोजगार और आजीविका के अवसर बढ़ाना तथा स्थानीय समुदायों की आय में वृद्धि करना भी है।

कश्मीर में स्कीइंग और विंटर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने की तैयारी

सज्जाद ने सर्दियों की तैयारियों के बारे में बताते हुए कहा कि गुलमर्ग में एक नई स्की शॉप खोली गई है और इसे इस सीजन में चालू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके साथ ही मौजूदा स्की शॉप को भी अपग्रेड किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि विभाग की योजना पहलगाम और दूधपथरी में भी स्कीइंग को बढ़ावा देने की है, बशर्ते वहां इसके लिए अनुकूल परिस्थितियां हों। विभाग इस सीजन में कम से कम एक या दो स्कीइंग टूर्नामेंट आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा, राष्ट्रीय स्तर के एक-दो विंटर स्पोर्ट्स इवेंट आयोजित करने पर भी विचार किया जा रहा है।

सर्दियों के खेलों के अलावा, विभाग गोल्फ टूर्नामेंटों को फिर से अपने कैलेंडर में शामिल करके गोल्फ पर्यटन को बढ़ावा देना चाहता है। सज्जाद ने कहा कि कश्मीर में लगभग पांच से छह गोल्फ कोर्स हैं, जो बाहर से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित कर सकते हैं। इससे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने बताया कि आने वाले वर्षों में बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाना, मानव संसाधनों को प्रशिक्षित करना और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देना विभाग की प्रमुख प्राथमिकताएं होंगी।

पर्यटन और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने पर जोर

निदेशक ने कहा कि पर्यटन विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना विभाग की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पर्यटन गतिविधियों से उन प्राकृतिक आवासों और पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए, जो पर्यटकों को कश्मीर की ओर आकर्षित करते हैं।

उन्होंने बताया कि मौजूदा पर्यटन बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाना और जहां उचित हो, उसके संचालन को आउटसोर्स करना विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करना और सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना है।

पर्यटकों को बेहतर और त्वरित सेवाएं देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए सज्जाद ने कहा कि आजकल पर्यटक मोबाइल फोन के जरिए पर्यटन स्थलों के बारे में जानकारी जुटाते हैं। वे अपने अनुभव का आकलन इस आधार पर करते हैं कि उन्हें कैसी सेवाएं मिलीं और उनकी शिकायतों का समाधान कितनी तत्परता से किया गया।

पर्यटन से जुड़े लोगों से अपील

उन्होंने पर्यटन से जुड़े लोगों जैसे परिवहन संचालकों, होटल और रेस्तरां मालिकों तथा ट्रैवल सर्विस प्रोवाइडरों से अपील की कि वे शिकायतों के समाधान के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाएं और पर्यटकों की जरूरतों के प्रति अधिक संवेदनशील व तत्पर रहें।

सज्जाद ने माना कि पर्यटकों की संख्या दर्ज करने के लिए कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं होने के कारण सटीक आंकड़े देना मुश्किल है। ऐसे में विभाग पर्यटन क्षेत्र के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए मुख्य रूप से इससे जुड़े लोगों से मिलने वाले फीडबैक पर निर्भर रहता है।

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में कृषि और बागवानी के बाद पर्यटन रोजगार उपलब्ध कराने वाले प्रमुख क्षेत्रों में से एक है। इससे न केवल होटल मालिकों, परिवहन संचालकों और टट्टू संचालकों को, बल्कि पेपर-मैशे जैसे हस्तशिल्प से जुड़े कारीगरों को भी आजीविका मिलती है।

उन्होंने कहा कि पर्यटन जमीनी स्तर पर बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार और आजीविका के अवसर प्रदान करता है। सज्जाद ने भरोसा जताया कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र युवाओं के लिए रोजगार के प्रमुख स्रोतों में से एक बनकर उभरेगा।