कश्मीर घाटी में इन्फ्लूएंजा के बढ़ते मामले, खांसी-जुकाम के साथ निमोनिया का खतरा; डॉक्टरों ने दी चेतावनी
घाटी में समय से पहले हुई बर्फबारी और ठंड बढ़ने से इन्फ्लूएंजा के मामले तेजी से बढ़े हैं, जिससे मौसमी ...और पढ़ें

कश्मीर में फ्लू के बढ़ते मामलों ने बढ़ाई चिंता। (फाइल फोटो)
HighLights
घाटी में समय से पहले इन्फ्लूएंजा के मामले बढ़े।
डॉक्टरों ने बचाव और टीकाकरण की सलाह दी।
अनावश्यक एंटीबायोटिक्स के उपयोग से बचें लोग।
जागरण संवाददाता, श्रीनगर। घाटी में इस वर्ष समय से पहले ही जहां उच्च पर्वतीय इलाकों में हुई बर्फबारी के चलते तापमान में आई गिरावट से बढ़ी ठंड से इंफलूएंज, खांसी, जुकाम आदि जैसी मौसमी बीमारियां फैल गई हैं और यह मामले सभी उम्र के लोगों और इलाकों में बढ़ रहे हैं। हालांकि इन्फ्लूएंजा एक मौसमी बीमारी है और समय पर उपचार मिलने पर ठीक हो जाती है लेकिन ज़्यादा जोखिम वाले लोगों में यह गंभीर समस्या पैदा कर सकता है, जिसके कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की ज़रूरत पड़ सकती है।
ऐसे में डाक्टरों ने लोगों से इन्फ्लूएंजा और दूसरी वायरल बीमारियों से बचाव के उपाय करने को कहा है विशेषकर ऐसे समय में जब यहां ठंड का मौसम शुरू होने वाला है।
एसएमएचएस अस्पताल श्रीनगर के इंफ्लूएंजा प्रोफेसर डा गुलाम हसन ने कहा कि इस साल पूरे देश में इन्फ्लूएंजा जल्दी शुरू हो गया. इसलिए हमारे यहां भी इन्फ्लूएंजा के मामले जल्दी बढ़ने लगे।
उन्होंने कहा, 'हालांकि इंफ्लूएंजा के मामलों में आम तौर पर नवंबर के आसपास शुरू हो जते हैं, लेकिन इस साल यह सितंबर में ही शुरू हो गए और इनमें तेजी से बढ़ोतरी हो गई।'
एक हफ्ते में फ्लू के लक्षण न सुधरें तो डॉक्टर से लें सलाह
डॉक्टर हसन ने कहा कि उनके अनुभव के अनुसार, कई मरीज़ों को सेकेंडरी इन्फेक्शन और निमोनिया हो रहा है। उन्होंने कहा, अगर एक हफ़्ते में इन्फ्लूएंज़ा के लक्षणों में सुधार न हो, या सांस लेने में तकलीफ़ और तेज़ बुख़ार हो, तो एेसी सूरत में डाक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
उन्होंने सलाह दी कि जिन लोगों को डायबिटीज़ या फेफड़ों की बीमारी है, या जिनकी इम्यूनिटी कमज़ोर है, उन्हें इन्फ्लूएंज़ा का टीका ज़रूर लगवाना चाहिए।
एंटीबायोटिक्स का बेवजह इस्तेमाल न करें
शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट आफ़ मेडिकल साइंसेज़ (सिकिम्ज) ने इस हफ़्ते की शुरुआत में एक पब्लिक हेल्थ एडवाइज़री जारी की थी, जिसमें लोगों से इन्फ्लूएंज़ा और निमोनिया का टीका लगवाने की अपील की गई थी। एडवाइज़री में लोगों को हाथों की साफ़-सफ़ाई का ध्यान रखने और एंटीबायोटिक्स का अनावश्यक इस्तेमाल न करने के लिए कहा गया है।
ज़्यादातर लोग लगभग एक हफ़्ते में ठीक हो जाते हैं। कमज़ोर इम्युनिटी वाले लोगों या जोखिम वाले समूहों में यह बीमारी गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकती है। छोटे बच्चे, 65 साल से ज़्यादा उम्र के लोग, गर्भवती महिलाएं और पुरानी बीमारियों या कमज़ोर इम्युनिटी वाले लोगों को ज़्यादा जोखिम वाला माना जाता है और उन्हें गंभीर बीमारी हो सकती है।
फ्लू के लक्षण दिखें तो घर पर रहें
सनद रहे कि विश्व स्वास्थ्य संगठन इस समूह के लिए हर साल इन्फ्लूएंज़ा का टीका लगवाने की सलाह देता है। टीकाकरण से गंभीर बीमारी का जोखिम कम होता है। हालांकि, यह संक्रमण को रोकता नहीं है। डाक्टर हसन ने कहा कि फ़्लू जैसे लक्षण वाले लोगों को जहांं तक हो सके घर पर ही रहना चाहिए।
उन्होंने कहा, 'यह स्कूली छात्रों के लिए ज़्यादा ज़रूरी है। सिकिम्ज ने विशेष रूप से खुद से दवा लेने (सेल्फ़-मेडिकेशन) के ख़िलाफ़ चेतावनी दी है।' एंटीबायोटिक्स का अंधाधुंध इस्तेमाल, जो फ़्लू में बहुत आम है, अनावश्यक है और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस को बढ़ावा देता है।
