कश्मीर की किन सड़कों पर सबसे ज्यादा हादसों का खतरा? ट्रैफिक पुलिस ने चिन्हित किए ब्लैक स्पॉट, विभागों को भेजी लिस्ट
कश्मीर ट्रैफिक पुलिस ने सड़क हादसों को कम करने के लिए पूरी घाटी में ब्लैकस्पाट की पहचान की है और संबंधित विभागों को कार्रवाई के लिए लिस्ट भेजी है।

कश्मीर में सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए ट्रैफिक पुलिस की बड़ी पहल। (फाइल फोटो)
HighLights
ट्रैफिक पुलिस ने घाटी में सड़क हादसों के ब्लैकस्पाट चिन्हित किए।
संबंधित विभागों को कार्रवाई हेतु ब्लैकस्पाट की सूची भेजी गई।
सड़क इंजीनियरिंग सुधार और पैदल यात्री सुरक्षा पर जोर दिया।
जागरण संवाददाता, श्रीनगर। सड़क हादसों को कम करने के लिए, कश्मीर ट्रैफिक पुलिस ने पूरी घाटी में ब्लैक स्पॉट (हादसों वाली जगहें) की पहचान की है और ज़रूरी कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को इसकी लिस्ट भेज दी है। कश्मीर के ट्रैफिक डीआईजी हसीब-उर-रहमान के अनुसार, शहरों की तुलना में बाहरी इलाकों में ऐसी खतरनाक जगहों की संख्या ज़्यादा है। उन्होंने कहा, 'हमने ऐसी जगहों की लिस्ट तैयार कर ली है और ज़रूरी कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को भेज दी है।'
ब्लैक स्पॉट के बारे में डीआईजी ने कहा कि कुछ सड़कों पर घुमावदार डिज़ाइन, सड़क इंजीनियरिंग की कमियों और अन्य वजहों से दिक्कतें हैं। डीआईजी ने कहा, 'बाहरी इलाकों में पहाड़ी रास्तों पर तीखे मोड़ों को ठीक करने या उन जगहों पर क्रैश बैरियर लगाने की ज़रूरत है।'
उन्होंने कहा कि संबंधित विभागों को सुझाव दिए गए हैं और इस दिशा में कदम उठाए जाने की उम्मीद है।
ट्रैफिक सुधार के लिए सभी विभागों को साथ आना होगा
डीआईजी ने कहा कि ट्रैफिक सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए कई विभागों की मिली-जुली रणनीति और अलग-अलग एजेंसियों के आपसी सहयोग की ज़रूरत है। उन्होंने कहा, 'ट्रैफिक और ट्रांसपोर्ट विभागों, एसएमसी और बाहरी इलाकों में सड़क बनाने वाली एजेंसियों समेत सभी विभागों को इसमें शामिल होना होगा।' इनके शामिल होने के बाद ही जमीनी स्तर पर ट्रैफिक सिस्टम को बेहतर बनाया जा सकता है।
डीआईजी हसीब ने श्रीनगर में पैदल चलने वालों द्वारा तय जगहों के अलावा कहीं से भी सड़क पार करने की समस्या का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा, 'श्रीनगर में लोग कहीं से भी सड़क पार कर लेते हैं। वे कभी भी तय जगहों या ज़ेबरा क्रासिंग से सड़क पार करने के नियमों का पालन नहीं करते।' ऐसी हरकतों से गाड़ियों की आवाजाही पर असर पड़ता है और ट्रैफिक धीमा हो जाता है।'
मक्का मार्केट की तर्ज पर वेंडरों को मिले अलग जगह
इसके अलावा, डीआईजी ने कहा कि भीड़-भाड़ वाली जगहों पर सड़कों से भीड़ कम करने, पार्किंग की जगहें बढ़ाने और फुटपाथ पर हुए कब्ज़ों को हटाने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा, 'जब मैं एसएसपी ट्रैफिक था, तब वेंडरों (फेरीवालों) के लिए कोई दूसरी जगह तय करने का फ़ैसला लिया गया था। तब मक्का मार्केट बनाया गया था और सड़क किनारे बैठने वाले वेंडरों को वहां शिफ्ट किया गया था। लेकिन अब स्ट्रीट वेंडरों की संख्या कई गुना बढ़ गई है, इसलिए इन चीज़ों के लिए एक पालिसी होनी चाहिए, जिससे ट्रैफिक मैनेजमेंट को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।'
बता देते हैं कि घाटी में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या हर गुजरते दिन के साथ बढ़ रही है और आए दिन इन सड़क दुर्घटनाओं में लोग अपनी कीमती जानें गंवा रहे हैं।
