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कश्मीर के रेशम उद्योग पर संकट, 200 साल पुरानी ऐतिहासिक शहतूत नर्सरी उजाड़ने की तैयारी; जानिए क्या है मामला

By Naveen Sharma Edited By: Rahul Sharma
Published: Fri, 23 Jan 2026 01:12 PM (IST)

Kashmir News: श्रीनगर में 200 साल पुरानी शहतूत नर्सरी को आवासीय कॉलोनी के लिए हटाने की सरकारी योजना से जम्मू-कश्मीर ...और पढ़ें

सेरीकल्चर विभाग ने भूमि हस्तांतरण से इनकार कर दिया है। फाइल फोटो।

सेरीकल्चर विभाग ने भूमि हस्तांतरण से इनकार कर दिया है। फाइल फोटो।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू कश्मीर प्रदेश सरकार ने श्रीनगर में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और माननीयों के लिए एक नयी आवासीय कालोनी विकसित करने के लिए अलूचीबाग स्थित लगभग दो सौ साल पुरानी शहतूत की नर्सरी की जगह को चिह्नत किया है।

सरकार के इस फैसले पर सेरीकल्चर विभाग और रेशम कीट पालन से जुड़े किसानों ने अापत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि यह न सिर्फ जम्मू कश्मीर में रेशम उद्योग के लिए एक बड़ा आघात है बल्कि एक ऐतिहासिक विरासत भी नष्ट हो जाएगी।

कश्मीर में रेशम उत्पादन का इतिहास काफी पुराना है। लेकिन कश्मीर में रेशम उत्पादन को एक उद्योग की तर्ज पर डोगरा शासकों ने प्रोत्साहित किया और 1890 के आस पास अलूचीबाग श्रीनगर में नर्सरी स्थापित की गई थी। यह कुटीर उद्योग अभी भी लगभग लगभग 50,000 रेशम कीट पालक किसानों को समर्थन प्रदान करते हुए उनकी आजीविका में सहयोग करती है यह 50 हजार किसान वह हैं जिन्हें सेरीकल्चर विभाग ने प्रशिक्षिण, तकनकी सहायता और अन्य सुविधाओं के लिए पंजीकृत किया है।

माननीयों के लिए 200 फ्लैट बनाए जाने हैं

संबधित अधिकारियों ने बताया कि अलूची बाग में 12 कनाल में फैली सेरीकल्चर विभाग की जिस नर्सरी को समाप्त कर, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और माननीयों के लिए 200 फ्लैट बनाए जाने हैं, वहां पर हर साल घाटी में रेशम के कीड़े पालने वालों को बांटने के लिए लगभग 15,000 शहतूत के पौधे उगाए जाते हैं। सेरीकल्चर विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि पोषक तत्वों से भरपूर शहतूत के पत्ते रेशम के कीड़ों के लिए चारे का एकमात्र ज़रिया हैं।

इस नर्सरी में सिर्फ शहतूत के पौधे ही नहीं हैं बल्कि भूमिहीन रेशम कीट पालकों की मदद के लिए विभाग ने पत्तियों के भंडार भी बनाएं हैं। रेशम कीट पालक गुलाम मोहम्मद ने कहा कि शहतूत के पेड़ हमारे लिए बहुत अहम हैं। मेरी आजीविका,मेरे परिवार की रोजी रोटी रेशम पालन से ही चलती है। अगर शहतूत का एक पेड़ कटता है तो हमारी आजीविका का नुक्सान होता है। समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर यह सरकार चाहती क्या है,यहां क्यों शहतूत की नर्सरी नष्ट की जा रही है।

2000 एकड़ जमीन पर लगे हैं 55 लाख शहतूत के पेड़

जम्मू और कश्मीर में लगभग 55 लाख शहतूत के पेड़ हैं जो 2,000 एकड़ ज़मीन पर उगाए जाते हैं। इन पेड़ों की 320 से ज़्यादा इकाईयों देखभाल की जाती है। इनमें सरकारी फ़ार्म, नर्सरी और प्लांटेशन शामिल हैं। सरकार ने अपने खास समग्री कृषि विकास कार्यक्रम एचएडीपी के तहत प्रदेश में शहतूत के 10 लाख और पौधे लगाने का एक अभियान भी चला रखा है।

सेरीकल्चर विभाग के अनुसार, बीते ती वर्षों में कोकून का उत्पादन लगातार बढ़ा है। 2024-25 में, कोकून का उत्पादन 8.5 लाख किलोग्राम तक पहुंच गया, जो 2023-24 में 8.22 लाख किलोग्राम और 2022-23 में 6.99 लाख किलोग्राम था। कच्चे रेशम का उत्पादन भी भी बढ़ा है, जो 2022-23 में 1 लाख किलोग्राम से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 1.21 लाख किलोग्राम हो गया है।

पर्यावरणविद्ध रासिख रसूल ने कहा कि कोई भी व्यक्ति बना अनुमति शहतूत का पेड़ नहीं काट सकता,इसके पत्तों को गिराना और इसकी प्रूनिंग करने केलिए भी सख्त नियम हैं। जम्मू कश्मीर प्रिजर्वेशन ऑफ़ स्पेसिफाइड ट्रीज़ एक्ट, 1969 भी शहतूत के पेड़ों की सुरक्षा की गारंटी देता है। लेकिन यहां तो शहतूत कीपूरी नर्सरी नष्ट की जा रही है। अगर सरकार को आवासीय कालोनी ही विकसित करनी है तो वह कोईऔर जगह चुन सकती है।

सेरीकल्चर विभाग ने जमीन स्थानांतरित करने से मना कर दिया

सेरीकल्चर विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि अलूची बाग में जहां नर्सरी है, वह विगत एक वर्ष के दौरान रेशम उद्योग से संबधित कई नयी सुविधाओं केा जुटाया गया है। इन पेड़ों की अहम भूमिका और अलूची बाग में किए गए निवेश, मौजूदा बुनियादी सुविधाओं व अन्य गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए यह जगह नहीं छोड़ी जा सकती है।

उन्होंने बताया कि विधायकों, मंत्रियों और अधिकारियों के रहने के लिए अलूचीबाग स्थित नर्सरी को समाप्त करने की योजना सबसे पहले अप्रैल 2018 में पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार के समय बनी थी। अब नेशनल कान्फ्रेंस की सरकार ने इस प्रस्ताव को जल्द पूरा करने का काम शुरु कर दिया है, लेकिन सेरीकल्चर विभाग ने जमीन स्थानांतरित करने से मना कर दिया है।

उन्होंने बताया कि श्रीनगर के राजस्व सहायुक्त ने छह जनवरी को एक टीम गठित कर उसे अलूचीबाग नर्सरी के सीमांकन व जमीन को निर्माण गतिविधियों के लिए उपलब्ध कराने संबंधी प्रक्रिया शुरु की है। लेकिन नौ जनवरी को सेरीकल्चर निदेशक ने इसका विरोध्श करते हुए कहा कि यह जमीन बहुत जरुरी है।

कश्मीर सिल्क इंडस्ट्री के लिए महत्वपूर्ण है यह शेहतूत नर्सरी 

इसमें सेरीकल्चर लिए आवश्यक ढांचागत व आपरेशनल सुविधाओं के अलावा प्रशासकीय इमारत भी है। इसमें सेरीकल्चर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, सेंट्रल डिवीज़न श्रीनगर, मॉडर्न ग्रेनेज बिल्डिंग, कोकून वेयरहाउस, कोकून ऑक्शन मार्केट, मॉडर्न हॉट एयर ड्रायर, शहतूत फार्म और नर्सरी, और एक 2 मीट्रिक टन कन्वेयर टाइप हाट एयर ड्रायर शामिल हैं।

सेरीकल्चर निदेशक एजाज अहमद बट ने 20 अप्रैल 2018 के आदेश का उल्लेख करत हुए बताया कि हमने उस समय सेरीकल्चर से संबधित बुनियादी व तकनीकी सुविधाओ, इसके पर्यावरण महत्व और आर्थिक मुद्दों के आधार पर जमीन देने से इंकार किया था।

हमने प्रशासन को सूचित किया है कि हम इस जमीन को रेशम पालन के अलावा किसी अन्य गतिविधि के लिए नहीं छोड़ सकते हैं। इस ज़मीन पर सैकड़ों अच्छी तरह से उगे हुए शहतूत के पेड़ हैं, जो रेशम के कीड़ों को पालने के लिए चारे का मुख्य और एकमात्र स्रौत हैं। सिल्क इंडस्ट्री के लिए यह सबसे अच्छा होगा कि उस रेशम उत्पादन वाली ज़मीन की मौजूदा स्थिति में कोई बदलाव न किया जाए। प्रस्तावित निर्माण के लिए कुछ दूसरी ज़मीन की पहचान की जा सकती है।