6000 से ज्यादा युवा, एक संकल्प… नए जम्मू-कश्मीर के लिए दौड़े, डल झील किनारे गूंजा एकता का संदेश; LG ने कही बड़ी बात
श्रीनगर में डल झील किनारे 'रन फॉर यूनिटी' मैराथन में 6 हजार से अधिक लोगों ने भाग लिया, जहाँ उपराज्यपाल ...और पढ़ें
HighLights
उपराज्यपाल ने 'रन फॉर यूनिटी' को विकसित जम्मू-कश्मीर का संकल्प बताया।
युवाओं से एकता, भाईचारे को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाने का आह्वान।
जम्मू-कश्मीर को आत्मनिर्भर बनाने में युवाओं की सक्रिय भूमिका पर जोर दिया।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। डल झील के किनारे वीरवार को छह हजार से ज्यादा कदम सिर्फ दौड़ की रफ्तार नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के भविष्य के लिए एक साझा संकल्प की तस्वीर बन गए। ‘रन फॉर यूनिटी’ में बड़ी संख्या में युवाओं और प्रतिभागियों ने हिस्सा लेकर शांति, एकता, भाईचारे और विकास का संदेश दिया। जम्मू-कश्मीर पुलिस की ओर से आयोजित इस मैराथन के फ्लैग-इन समारोह में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने प्रतिभागियों के उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने केवल मैराथन नहीं दौड़ी, बल्कि ‘भारत की आत्मा’ और एकजुट व लगातार आगे बढ़ रहे जम्मू-कश्मीर के लिए दौड़ लगाई।
पुलिस गोल्फ कोर्स में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए सिन्हा ने युवाओं की ऊर्जा को जम्मू-कश्मीर की सबसे बड़ी ताकतों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि ‘रन फॉर यूनिटी’ केवल पैरों की गति का नाम नहीं है, बल्कि यह लोगों के सामूहिक संकल्प की रफ्तार को दर्शाती है। जब लोग एक दिशा में साथ चलते हैं तो कोई भी मंजिल असंभव नहीं रहती।
एकता ही सबसे बड़ी ताकत
उपराज्यपाल ने कहा कि भारत की विविधता उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी पहचान और ताकत है। अलग-अलग भाषाओं, परंपराओं, खान-पान और पहनावे के बावजूद देश को एक साझा राष्ट्रीय भावना जोड़ती है। उन्होंने युवाओं से इसी एकता और भाईचारे को मजबूत करने का आह्वान किया।
सिन्हा ने कहा कि लाखों कदम जब एक दिशा में बढ़ते हैं तो बड़ी से बड़ी बाधा भी छोटी हो जाती है और जब लाखों दिल एक उद्देश्य के लिए जुड़ते हैं तो कोई चुनौती इतनी बड़ी नहीं रहती कि उसे पार न किया जा सके।
सिन्हा ने युवाओं से जम्मू-कश्मीर को आत्मनिर्भर और विकसित बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं की भागीदारी केवल आज के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के भविष्य में निवेश है। रास्ते में मुश्किलें आएंगी, लेकिन एकता, विश्वास, मेहनत और दृढ़ संकल्प के साथ उन्हें पार किया जा सकता है।
उन्होंने जम्मू-कश्मीर पुलिस के सिविक एक्शन कार्यक्रम का भी उल्लेख किया और कहा कि पुलिस रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से हजारों युवाओं को सशक्त बनाने का काम कर रही है। कानून-व्यवस्था, आतंकवाद विरोधी अभियानों से लेकर सामाजिक सहायता और प्राकृतिक आपदाओं तक पुलिस की भूमिका का भी उन्होंने उल्लेख किया।
जीत सिर्फ फिनिश लाइन तक पहुंचना नहीं
सिन्हा ने युवाओं से फिटनेस को जीवन का हिस्सा बनाने और ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ में भागीदारी बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि मैराथन की असली जीत अकेले फिनिश लाइन तक पहुंचने में नहीं, बल्कि दूसरों को साथ लेकर आगे बढ़ने में है।
उन्होंने कहा कि लोग अलग-अलग रास्तों से आ सकते हैं और उनकी पहचानें अलग हो सकती हैं, लेकिन मंजिल साझा हो सकती है। जम्मू-कश्मीर और भारत को एक और अटूट बताते हुए उन्होंने लोगों से शांति, सद्भाव, भाईचारे और विकास के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया।
हर साल बढ़ती भागीदारी का उल्लेख करते हुए सिन्हा ने जम्मू-कश्मीर पुलिस और आयोजन से जुड़े अधिकारियों का आभार जताया। श्रीनगर में हुई यह दौड़ इस संदेश के साथ समाप्त हुई कि जम्मू-कश्मीर का भविष्य सिर्फ चुनौतियों से लड़ने में नहीं, बल्कि युवाओं की ऊर्जा को एकजुट कर विकास की दिशा में आगे बढ़ाने में है।
