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कश्मीर में नई धान की किस्मों से बढ़ी पैदावार, कुलगाम के मंसूर से पुलवामा के नजीर तक... सुनिए किसानों की जुबानी

Published: Sat, 03 Oct 2026 12:43 PM (IST)

कश्मीर में धान की नई किस्मों SR3, SR4 और SR5 ने किसानों की किस्मत बदल दी है, जिससे पैदावार दोगुनी ...और पढ़ें

कश्मीर में धान की नई किस्मों से किसानों की आय में वृद्धि की उम्मीद। (फाइल फोटो)

कश्मीर में धान की नई किस्मों से किसानों की आय में वृद्धि की उम्मीद। (फाइल फोटो)  

HighLights

  1. नई धान किस्मों SR3, SR4, SR5 ने पैदावार बढ़ाई।

  2. राइस ब्लास्ट रोग का असर काफी हद तक घटा।

  3. किसानों की आय और उम्मीदें दोगुनी हुई हैं।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। कश्मीर में इस बार धान के खेत सिर्फ सुनहरी फसल से नहीं, बल्कि नई उम्मीद से भी लहलहा रहे हैं। वर्षों से कम पैदावार और फसल रोगों की मार झेल रहे किसानों को कृषि विभाग की ओर से उपलब्ध कराई धान की नई किस्मों एसआर3, एसआर4 और एसआर5 ने राहत की नई वजह दी है।

अलग-अलग इलाकों से सामने आए नतीजे बताते हैं कि इन किस्मों ने न केवल उत्पादन बढ़ाया, बल्कि धान की फसल को प्रभावित करने वाले ब्लास्ट रोग से बचाया है।

'यह बदलाव किसी बड़ी राहत से कम नहीं'

दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के किसान मंसूर अहमद के लिए यह बदलाव किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। वर्षों से पारंपरिक धान की किस्मों की खेती करने वाले मंसूर के खेत हर साल राइस ब्लास्ट की चपेट में आ जाते थे और इसका सीधा असर पैदावार पर पड़ता था।

इस बार उन्होंने कृषि विभाग की ओर से उपलब्ध कराई गई एसआर 3 किस्म लगाई। मंसूर के मुताबिक, इस सीजन में उनकी पैदावार लगभग दोगुनी हुई और फसल बीमारी से भी काफी हद तक सुरक्षित रही।

चार क्विंटल प्रति कनाल पहुंच गया

वहीं पुलवामा के किसान नजीर अहमद ने भी नई किस्म के असर को अपनी आंखों से देखा। चार कनाल जमीन पर खेती करने वाले नजीर की पारंपरिक किस्मों से आमतौर पर करीब 2.5 क्विंटल प्रति कनाल पैदावार होती थी। इस बार नई किस्म की खेती के बाद यह आंकड़ा बढ़कर करीब चार क्विंटल प्रति कनाल पहुंच गया। उनके लिए यह सिर्फ अतिरिक्त अनाज नहीं, बल्कि खेती से बेहतर आमदनी की उम्मीद भी है।

परीक्षणों के आए सफल परिणाम

किसानों के मुताबिक नई किस्मों में पैदावार के साथ-साथ दाने की गुणवत्ता और बाजार में बेहतर मूल्य मिलने की संभावना भी दिखाई दे रही है। ऐसे में अगर इन किस्मों का दायरा बढ़ता है तो इससे एक ओर फसल का नुकसान कम हो सकता है, वहीं दूसरी ओर धान पर निर्भर किसानों की आय को सहारा मिल सकता है।

कृषि विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, कश्मीर के विभिन्न इलाकों में एसआर3, एसआर4 और एसआर5 के परीक्षण के दौरान उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। कई क्षेत्रों में इन किस्मों से चार से पांच क्विंटल प्रति कनाल तक पैदावार दर्ज की है। विभाग का कहना है कि पारंपरिक किस्में कई रोगों के प्रति अधिक संवेदनशील हैं, इसलिए परीक्षणों के सफल परिणामों के बाद किसानों के बीच बेहतर किस्मों का वितरण किया जा रहा है।

दरअसल, कश्मीर में राइस ब्लास्ट लंबे समय से धान की खेती के लिए चुनौती बना हुआ है। ऐसे में नई किस्मों से मिल रहे शुरुआती नतीजे किसानों के लिए महत्वपूर्ण संकेत हैं। अब निगाह इस बात पर है कि आने वाले सीजन में इन किस्मों की उपलब्धता और खेती का दायरा कितना बढ़ता है।

क्या कहते हैं किसान?

किसान मोहम्मद अफजल वानी का कहना है कि कश्मीर में लगने वाले रिवायती धान में समय और खर्च अधिक होता था। पैदावार भी इतनी अधिक नहीं रहती थी परंतु इस बार मैंने एसआर5 लगाई है। इसकी पैदावार बहुत अच्छी हुई है। लागत भी कम आई है। बाजार में अच्छा-खासा मुनाफा होने की उम्मीद है।

रियाज अहमद शालहारी गांदरबल ने बताया कि उनके पास तीस कनाल से अधिक भूमि है। इस बार उन्होंने एसआर4 और एसआर5 ग्रेड की धान लगाई थी। परिणाम उम्मीद से भी अधिक बेहतर हैं। रिवायती फसल जहां एक कनाल में दो से ढाई क्विंटल तक होती थी, यह तीन से चार क्विंटल तक है।