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कश्मीर के 6 जिलों में 2019 से बाहरी निवेश दर्ज नहीं, दो जिलों में सिमटे 423 करोड़ रुपये; संतुलित विकास की चुनौती

Published: Wed, 14 Oct 2026 02:45 PM (IST)

कश्मीर में बाहरी औद्योगिक निवेश केवल बारामुला और पुलवामा जिलों तक ही सीमित रहा है, जहाँ कुल 423 करोड़ रुपये ...और पढ़ें

कश्मीर के 636 औद्योगिक यूनिट में बाहरी निवेश का रिकॉर्ड नहीं। (फाइल फोटो)

कश्मीर के 636 औद्योगिक यूनिट में बाहरी निवेश का रिकॉर्ड नहीं। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. कश्मीर में 423 करोड़ का बाहरी निवेश दो जिलों तक सीमित।

  2. छह जिलों में 2019 से कोई बाहरी निवेश दर्ज नहीं हुआ।

  3. स्थानीय उद्यमी घाटी के औद्योगिक विकास की रीढ़ हैं।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक निवेश बढ़ाने और बाहरी निवेशकों को आकर्षित करने के प्रयासों के बावजूद कश्मीर घाटी में बाहरी पूंजी का विस्तार सीमित रहा है। विभागीय अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2019 से दिसंबर 2025 तक घाटी के आठ जिला उद्योग केंद्रों में से छह जिलों की औद्योगिक इकाइयों में जम्मू-कश्मीर के बाहर से कोई निवेश दर्ज नहीं हुआ। बाहरी निवेश की पूरी दर्ज राशि बारामुला और पुलवामा में ही सामने आई।

श्रीनगर, अनंतनाग, बडगाम, गांदरबल, कुलगाम और शोपियां में कुल 636 औद्योगिक इकाइयां हैं, लेकिन इनमें बाहरी निवेश का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। श्रीनगर में 335, अनंतनाग में 105, बडगाम में 93, गांदरबल में 41, कुलगाम में 36 और शोपियां में 26 इकाइयां दर्ज हैं। विभागीय जवाब के अनुसार, गांदरबल की सभी 41 औद्योगिक इकाइयां स्थानीय निवेशकों ने स्थापित की हैं।

इसके विपरीत, बारामुला की 41 औद्योगिक इकाइयों में 235 करोड़ रुपये और पुलवामा की 307 इकाइयों में 188 करोड़ रुपये का बाहरी निवेश दर्ज है। दोनों जिलों में यह राशि कुल 423 करोड़ रुपये है। हालांकि, बारामुला की किसी एक औद्योगिक इकाई में 100 करोड़ रुपये से अधिक का बाहरी निवेश दर्ज नहीं किया गया।

औद्योगिक विकास के बावजूद सभी जिलों तक नहीं पहुंचा निवेश

आठ जिला उद्योग केंद्रों की कुल 984 औद्योगिक इकाइयों में से 636 उन छह जिलों में हैं, जहां बाहरी निवेश दर्ज नहीं हुआ। बारामुला और पुलवामा में 348 इकाइयां हैं। आंकड़े घाटी में बाहरी पूंजी के असमान विस्तार और औद्योगिक विकास के क्षेत्रीय संतुलन को लेकर सवाल उठाते हैं।

अगस्त 2019 के बाद औद्योगिक विकास और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के प्रयासों के बावजूद बाहरी निवेश का लाभ सभी जिलों तक समान रूप से नहीं पहुंचा है।

उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के अनुसार, छह जिलों में बाहरी निवेश का रिकॉर्ड न होना यह नहीं दर्शाता कि वहां औद्योगिक गतिविधियां ठप हैं या निवेश नहीं हुआ। स्थानीय उद्यमियों ने अपनी पूंजी, बैंक ऋण और सरकारी योजनाओं के जरिये इकाइयां स्थापित की हो सकती हैं।

2019-20 से 2025-26 तक 2,279 इकाइयां स्थापित

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2019-20 से 2025-26 के दौरान जम्मू-कश्मीर में स्थापित 2,279 औद्योगिक इकाइयों में से 2,056 स्थानीय उद्यमियों ने और 223 गैर-स्थानीय निवेशकों ने स्थापित कीं। इस अवधि में करीब 90 प्रतिशत इकाइयां स्थानीय उद्यमियों की ओर से स्थापित की गईं। इन इकाइयों में कुल 16,598.97 करोड़ रुपये का निवेश और 75,848 रोजगार सृजित होने का दावा है।

स्थानीय कारोबारियों को साथ लेकर बाहरी निवेश बढ़ाने पर जोर

श्रीनगर के पास खुनमोह में फैब्रिकेशन्स इकाई के संचालक वाहिद जिलानी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर का औद्योगिक आधार काफी हद तक स्थानीय उद्यमियों पर निर्भर है। स्थानीय कारोबारी क्षेत्र की जरूरतों, बाजार और परिस्थितियों को समझकर निवेश कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बाहरी पूंजी आकर्षित करने की नीति का उद्देश्य स्थानीय उद्यमियों की भूमिका घटाना नहीं, बल्कि उनके साथ मिलकर औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार करना होना चाहिए।

निवेश कितना, उद्योग कितने चले और रोजगार कितनों को?

कश्मीर चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के पूर्व प्रधान शेख रशीद अहमद ने कहा कि निवेश के वास्तविक प्रभाव का आकलन घोषित परियोजनाओं या प्रस्तावों से नहीं, बल्कि इस आधार पर होना चाहिए कि कितनी पूंजी उद्योगों तक पहुंची, कितनी परियोजनाएं जमीन पर उतरीं, कितनी इकाइयां नियमित रूप से काम कर रही हैं और उनसे स्थानीय युवाओं को कितने रोजगार मिले?

उनके अनुसार, स्थानीय उद्यमी बाजार की जरूरतें समझते हैं और अपनी पूंजी लगा रहे हैं, जबकि बाहरी निवेश से नई पूंजी, तकनीक और कारोबारी अवसर बढ़ सकते हैं। औद्योगिक नीति में दोनों को आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए।