विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

J&K: भालू के हमले में मां की मौत, अब दूसरों को बचाने बेटे ने बनाया ऐसा प्लेटफॉर्म, जंगली जानवर दिखते ही करेगा अलर्ट

Published: Wed, 14 Oct 2026 04:21 PM (IST)

कश्मीर के मुदासिर अली ने जंगली जानवरों के हमलों से लोगों को बचाने के लिए एक मुफ्त डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च ...और पढ़ें

मुदासिर अली ने एक मुफ्त डिजिटल प्लेटफॉर्म वाइल्डपिंग डॉट ऑर्ग शुरू किया है।

मुदासिर अली ने एक मुफ्त डिजिटल प्लेटफॉर्म वाइल्डपिंग डॉट ऑर्ग शुरू किया है।

HighLights

  1. मुदासिर अली ने 'वाइल्डपिंग डॉट ऑर्ग' प्लेटफॉर्म बनाया।

  2. जंगली जानवरों की मौजूदगी पर लोगों को अलर्ट करेगा।

  3. मां की मौत के बाद सुरक्षा हेतु यह पहल।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। कश्मीर में भालुओं और अन्य जंगली जानवरों के आबादी वाले इलाकों में पहुंचने और लोगों पर बढ़ते हमलों के बीच सॉफ्टवेयर डेवलपर मुदासिर अली ने एक मुफ्त डिजिटल प्लेटफॉर्म वाइल्डपिंग डॉट ऑर्ग शुरू किया है। इसके जरिए जंगली जानवरों की मौजूदगी की सूचना साझा कर आसपास रहने वाले लोगों को समय रहते अलर्ट किया जा सकता है।

मुदासिर के लिए यह पहल निजी त्रासदी से निकला एक संकल्प है। करीब छह साल पहले उसने घर से कुछ ही कदम की दूरी पर वन्यजीव के हमले में अपनी मां को खो दिया था। हाल के सप्ताहों में वन्यजीवों के हमलों में कई लोगों के गंभीर रूप से घायल होने या मरने की खबरों ने उसे यह व्यवस्था बनाने के लिए प्रेरित किया, ताकि लोग एक-दूसरे को समय पर चेतावनी दे सकें।

मुदासिर का कहना है कि वह अपनी मां को वापस नहीं ला सकते, लेकिन ऐसी व्यवस्था जरूर बना सकते हैं, जिससे किसी दूसरे परिवार के सदस्य की जान बचाने में मदद मिले।

घर, खेत और स्कूल के आसपास मिलेंगे अलर्ट

वाइल्डपिंग डॉट ऑर्ग के जरिए कोई भी व्यक्ति भालू, तेंदुए या अन्य जंगली जानवर को देखने पर मोबाइल स्क्रीन पर कुछ टैप करके उसकी सूचना दर्ज कर सकता है। इसके बाद उस स्थान के आसपास निर्धारित वॉच जोन में रहने वाले लोगों को अलर्ट मिलता है।

मुदासिर के अनुसार, सूचनाएं अधिकतम 2.5 किलोमीटर के दायरे तक सीमित रखी जाती हैं, ताकि प्रभावित होने की आशंका वाले लोगों तक चेतावनी पहुंचे। इससे लोग संबंधित रास्ते या इलाके से बचने और जरूरी सावधानी बरतने का फैसला ले सकते हैं।
प्लेटफॉर्म पर लोग अपने घर, खेत, कार्यस्थल और बच्चों के स्कूल के आसपास वॉच जोन बना सकते हैं। इसका लाइव मैप हाल में दर्ज वन्यजीवों की गतिविधियों की जानकारी देता है।

यह एक प्रोग्रेसिव वेब ऐप है, जिसे एंड्रॉयड और आईफोन पर वेब ब्राउजर के जरिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए ऐप स्टोर से डाउनलोड करना जरूरी नहीं है। प्लेटफॉर्म अंग्रेजी, हिंदी और उर्दू में उपलब्ध है। अलर्ट पाने के लिए नोटिफिकेशन चालू करना और लोकेशन की अनुमति देना आवश्यक है।

फर्जी सूचनाओं पर रोक के इंतजाम

गलत सूचनाओं से अनावश्यक डर फैलने की आशंका को देखते हुए प्लेटफॉर्म पर कई सुरक्षा उपाय किए गए हैं। रजिस्ट्रेशन के दौरान सत्यापन, अस्थायी ईमेल पतों पर रोक और कम समय में बार-बार रिपोर्ट करने पर पाबंदी जैसे उपाय शामिल हैं। समुदाय के सदस्य संदिग्ध रिपोर्ट को चिह्नित भी कर सकते हैं। पर्याप्त लोगों द्वारा किसी रिपोर्ट को भ्रामक बताए जाने पर उसे मैप से हटा दिया जाता है।

मुदासिर स्पष्ट करते हैं कि यह प्लेटफॉर्म वन्यजीव संरक्षण विभाग या आपातकालीन सेवाओं का विकल्प नहीं है और कोई भी तकनीक हर खतरे का पता लगाने की गारंटी नहीं दे सकती। हालांकि, समय रहते मिली चेतावनी लोगों को सुरक्षित निर्णय लेने में मदद कर सकती है।

रेबीज के खतरे वाले कुत्तों की जानकारी भी मिलेगी

भालू और तेंदुए के अलावा, इस प्लेटफॉर्म के जरिए रेबीज से प्रभावित होने की आशंका वाले कुत्तों की मौजूदगी जैसी सार्वजनिक सुरक्षा संबंधी सूचनाएं भी साझा की जा सकती हैं। वन्यजीव बचाव दल भी इसका इस्तेमाल स्थानीय लोगों तक जानकारी पहुंचाने के लिए कर सकते हैं।

'वाइल्डपिंग डॉट ऑर्ग पूरी तरह मुफ्त है। इसमें विज्ञापन या सब्सक्रिप्शन शुल्क नहीं है और इसके संचालन का खर्च स्वैच्छिक योगदान से पूरा करने की व्यवस्था है। मुदासिर के मुताबिक, इसकी सफलता लोगों की भागीदारी पर निर्भर करेगी। जितने अधिक लोग इससे जुड़ेंगे, उतने ही अधिक इलाकों में समय पर चेतावनी पहुंचने की संभावना बढ़ेगी।