कश्मीर में स्तन कैंसर ने बढ़ाई चिंता, 10 में से 7 मरीज तीसरी स्टेज में सामने आ रहे; इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
Breast Cancer: कश्मीर में स्तन कैंसर एक बड़ी चुनौती बन गया है, जहाँ 70-73% मामले तीसरी स्टेज में सामने आ ...और पढ़ें

कश्मीर में बढ़ रहे स्तन कैंसर पर डॉक्टरों की बड़ी चेतावनी। (फाइल फोटो)
HighLights
कश्मीर में 70-73% स्तन कैंसर मरीज तीसरी स्टेज में।
शुरुआती पहचान से इलाज की सफलता की संभावना बेहतर होती है।
गांठ, आकार बदलाव, निप्पल स्राव स्तन कैंसर के संकेत।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। कश्मीर में स्तन कैंसर महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। चिंता की बात यह है कि यहां करीब 70 से 73 प्रतिशत मरीजों में बीमारी का पता तीसरी स्टेज में चल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती चरण में कैंसर की पहचान होने पर इलाज की सफलता की संभावना बेहतर होती है। ऐसे में लक्षणों को पहचानना, समय पर जांच कराना और इलाज शुरू करना बेहद जरूरी है।
न्यू सिटी अस्पताल, टेंगपोरा बाईपास की सर्जिकल ऑन्कोलॉजी निदेशक डॉ. शबनम बशीर के अनुसार, जागरूकता और समय पर चिकित्सकीय सलाह से बीमारी के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
स्तन कैंसर तब विकसित होता है, जब स्तन की कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं। यह आमतौर पर दूध की नलिकाओं या ग्रंथियों से शुरू होता है। महिलाओं में यह अधिक आम है, लेकिन पुरुष भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।
गांठ को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
स्तन या बगल में नई गांठ, स्तन के आकार में बदलाव, त्वचा पर गड्ढे पड़ना या लालिमा, निप्पल का अंदर की ओर मुड़ना और उससे असामान्य, खासकर खून मिला स्राव स्तन कैंसर के प्रमुख संकेत हो सकते हैं।
ऐसा घाव जो ठीक न हो या बगल और कॉलरबोन के आसपास सूजन भी जांच की वजह हो सकती है। हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन किसी नए या लगातार बने बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। गांठ में दर्द न होना भी इस बात की गारंटी नहीं है कि वह खतरनाक नहीं है।
उम्र, पारिवारिक इतिहास और जीवनशैली भी जोखिम
भारत में स्तन कैंसर महिलाओं में सबसे आम कैंसर है। जानकारी की कमी, जांच का डर, सामाजिक झिझक और लक्षण छिपाने की प्रवृत्ति के कारण कई महिलाएं देर से अस्पताल पहुंचती हैं। कश्मीर के दूरदराज इलाकों में यात्रा का खर्च, भौगोलिक कठिनाइयां और विशेषज्ञ सेवाओं तक सीमित पहुंच भी इलाज में देरी की वजह बन सकती हैं।
उम्र बढ़ने के साथ बढ़ता खतरा
परिवार में स्तन या अंडाशय के कैंसर का इतिहास, बीआरसीए-1 और बीआरसीए-2 जैसे आनुवंशिक बदलाव, घने स्तन ऊतक और छाती पर पहले रेडिएशन होना भी जोखिम बढ़ाते हैं। कम उम्र में माहवारी शुरू होना, देर से पहला बच्चा होना, कम बच्चे होना और देर से रजोनिवृत्ति आना भी कुछ मामलों में जोखिम को प्रभावित करते हैं।
रजोनिवृत्ति के बाद मोटापा, शारीरिक गतिविधि की कमी, शराब और कुछ प्रकार की हार्मोन थेरेपी भी जोखिम से जुड़े हैं। हालांकि, बिना किसी स्पष्ट जोखिम कारक के भी कैंसर हो सकता है।
समय पर जांच और इलाज जरूरी
डॉ. शबनम ने स्वस्थ वजन बनाए रखने, संतुलित आहार लेने और हर सप्ताह कम से कम 150 मिनट मध्यम स्तर की शारीरिक गतिविधि करने की सलाह दी। फल, सब्जियां, साबुत अनाज और दालें आहार में शामिल करना तथा तंबाकू से बचना भी महत्वपूर्ण है।
महिलाओं को अपने स्तनों के सामान्य आकार और बनावट से परिचित रहना चाहिए, ताकि असामान्य बदलाव जल्द पहचाने जा सकें। चिकित्सकीय परीक्षण और मैमोग्राफी की जरूरत उम्र, व्यक्तिगत जोखिम और चिकित्सा दिशा-निर्देशों के अनुसार तय होती है। परिवार में कैंसर का मजबूत इतिहास होने पर डॉक्टर से व्यक्तिगत जांच योजना और आनुवंशिक परामर्श लेना चाहिए।
संदिग्ध बदलाव मिलने पर चिकित्सकीय परीक्षण के बाद जरूरत के अनुसार अल्ट्रासाउंड, मैमोग्राफी और बायोप्सी की जाती है। मरीज की स्थिति के आधार पर सर्जरी, रेडिएशन, कीमोथेरेपी, हार्मोन थेरेपी या लक्षित दवाओं से इलाज किया जा सकता है। पोषण संबंधी मदद, फिजियोथेरेपी, पुनर्वास और मनोवैज्ञानिक परामर्श भी उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
उपलब्ध सुविधाओं का लाभ उठाएं
डॉ. बशीर के अनुसार, कश्मीर में जांच और उपचार की सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिनकी मदद से मरीज क्षेत्र में ही व्यापक इलाज प्राप्त कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता अभियान के साथ जांच केंद्रों तक आसान पहुंच और मरीजों को समय पर विशेषज्ञों तक पहुंचाने की व्यवस्था भी जरूरी है। डर या सामाजिक झिझक के कारण जांच टालने के बजाय डॉक्टर से समय पर सलाह लेना ही स्तन कैंसर से लड़ने की दिशा में सबसे अहम कदम है।
