श्रीनगर, राज्य ब्यूरो। कश्मीर में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्य सरकार द्वारा जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत बंदी बनाए गए लोगों की रिहाई के लिए कश्मीर बार एसोसिएशन उनकी निशुल्क में पैरवी करेगी। पीएसए के इन मामलों की पैरवी के लिए बार एसोसिएशन ने आठ सदस्यीय दल भी बनाया है।

कश्मीर बार एसोसिएशान से संबंधित एडवोकेट वसीम ने बताया कि राज्य हाईकोर्ट में बीते डेढ़ माह के दौरान साढ़े पांच सौ से ज्यादा हैबस कार्पस याचिकाएं दायर हुई हैं। इन याचिकाओं में राज्य सरकार द्वारा हिरासत में लिए गए लोगों का पता बताने से लेकर उनकी रिहाई का आग्रह है। यह सभी मामले पीएसए से संबंधित हैं। उन्होंने बताया कि बार एसोसिएशन ने मौजूदा हालात में इन सभी मामलों की पैरवी का फैसला किया है। इसके लिए बार एसोसिएशन ने आठ सदस्यीय दल बनाया है। इसमें एडवोकेट बशीर अहमद टाक, मीर माजिद बशीर, वाजिद हसीब,शाह आशिक हुसैन, जिया-उर-रहमान, सईद मुसैब, नसीम कादरी और जावेद रशीद को शामिल किया गया है। यह दल पीएसए के तहत बंदी बनाए गए लोगों की रिहाई के लिए अदालत में हैबस कार्पस याचिका दायर करते हुए संबंधित मामलों की पैरवी करेगा। कोई भी नागरिक इस दल के साथ संपर्क कर कानूनी मदद प्राप्त कर सकता है।

गौरतलब है कि पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर को दो केंद्र शासित राज्यों में विभाजित करने के बाद प्रशासन ने वादी में कानून व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए एहतियात के तौर पर करीब चार हजार लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें से लगभग तीन हजार को रिहा किया जा चुका है। वहीं, एक हजार अन्य एहतियातन हिरासत में हैं या फिर नजरबंद हैं।

पीएसए के तहत बंद लोग किसी न किसी तरह से जुड़े हैं अलगाववादी खेमे से

सूत्रों की मानें तो बीते डेढ़ माह के दौरान पीएसए के तहत बंदी बनाए गए लोगों में से अधिकांश प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से अलगाववादी खेमे के साथ जुड़े हैं या फिर उनके द्वारा आयोजित राष्ट्रविरोधी धरना प्रदर्शनों और सेमिनारों में भाग लेते रहे हैं। इनमें से 343 को राज्य के बाहर उत्तर प्रदेश और हरियाणा की जेलों में स्थानांतरित किया गया है। उत्तर प्रदेश में आगरा, वाराणसी, बरेली और अंबेडकर नगर में बनी जेलों में 239 लोगों को स्थानांतरित किया गया है जबकि शेष 104 को हरियाणा की दो जेलों में भेजा गया है।

सरकारी आंकड़ों में 253 लोगों पर लगा पीएसए

राज्य प्रशासन के मुताबिक 253 लोगों को पीएसए के तहत बंदी बनाया गया है, जबकि संबंधित सूत्रों की मानें तो करीब 350 लोगों को इस कानून के तहत जेल में बंद किया गया है।

कश्मीर के बड़े कारोबारी भी बंद हैं पीएसए के तहत

कश्मीर बार एसोसिएशन के मौजूदा चेयरमैन मियां कयूम और पूर्व चेयरमैन नजीर अहमद रोंगा भी इस समय पीएसए के तहत बंदी हैं। कश्मीर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के पूर्व चेयरमैन मुबीन शाह के अलावा कश्मीर के प्रमुख व्यावसायी शकील कलंदर भी पीएसए के तहत जेल में हैं। नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला भी 16 सितंबर से पीएसए के तहत कैद हैं। हालांकि इस कानून के तहत किसी भी व्यक्ति को अधिकतम दो साल तक जेल में रखा जा सकता है, लेकिन डॉ. फारूक को शुरुआत में सिर्फ 12 दिनों के लिए पीएसए के तहत बंदी बनाए जाने की सूचना है।

Posted By: Rahul Sharma

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