कश्मीर में समय से पहले क्यों गिर रहे सेब? 61 बागानों में असर, 10.72 लाख किलो उत्पादन का नुकसान; जांच तेज
कश्मीर के सेब बागानों में समय से पहले फल गिरने की घटना ने उत्पादकों की चिंता बढ़ा दी है। सरकार ...और पढ़ें

कश्मीर के सेब बागानों में फल गिरने का रहस्य गहराया। (फाइल फोटो)
HighLights
कश्मीर के सेब बागानों में समय से पहले फल गिरे।
'सुपर एम-45' फफूंदनाशी के संदिग्ध बैच की जांच जारी।
शोपियां में 4.42 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान अनुमानित।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। कश्मीर के सेब उत्पादकों के लिए इस साल बागानों से आई एक असामान्य खबर ने चिंता बढ़ा दी। शोपियां के जैनापोरा समेत जिले के कई इलाकों और अनंतनाग के कुछ हिस्सों में सेब समय से पहले बड़े पैमाने पर गिरने के मामले में सरकार ने अब जांच तेज कर दी है। कृषि मंत्री जावेद अहमद डार ने विधानसभा में यह जानकारी विधायक शौकत हुसैन गनई द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जवाब में दी।
उन्होंने बताया कि मामले में वैज्ञानिक जांच से लेकर नियामकीय कार्रवाई और पुलिस जांच तक कई स्तरों पर कार्रवाई की जा रही है। मामला केवल फसल के नुकसान तक सीमित नहीं है। जांच के दौरान बाजार में बिकने वाले ‘सुपर एम-45’ नामक फफूंदनाशी के एक विशेष बैच एसपी-1902 को लेकर गंभीर सवाल सामने आए।
कृषि विभाग की लॉ एनफोर्समेंट विंग ने शोपियां में इस बैच से जुड़े 12 लाइसेंसधारी डीलरों की पहचान की और 238 किलोग्राम स्टॉक जब्त किया।
61 बागानों में दिखा फल गिरने का असर
मंत्री के अनुसार, स्कास्ट-कश्मीर की बहुविषयक टीमों ने 18 जून, 29 जून और 3 जुलाई को प्रभावित इलाकों का दौरा किया। इस दौरान 37 गांवों के 61 किसानों और बागानों का सर्वेक्षण किया गया और सभी 61 बागानों में समय से पहले फल गिरना पाया गया।
जांच में सामने आया कि 20 किसानों ने ‘सुपर एम-45’ का अकेले इस्तेमाल किया था, जबकि 41 किसानों ने इसे दूसरे कृषि रसायनों के साथ इस्तेमाल किया था। फल गिरने का प्रतिशत भी समय के साथ बढ़ता गया। शुरुआती निरीक्षण में जहां यह करीब 30 प्रतिशत था, वहीं दूसरे दौरे में लगभग 70 प्रतिशत और कुछ मामलों में तीसरे निरीक्षण तक करीब 90 प्रतिशत तक पहुंच गया।
पैकेट पर दर्ज जानकारी ने बढ़ाई शंका
सरकार द्वारा गठित संयुक्त जांच समिति में निदेशक बागवानी कश्मीर और निदेशक लॉ एनफोर्समेंट, जम्मू-कश्मीर शामिल हैं। समिति की स्थिति रिपोर्ट 21 सितंबर को सरकार को सौंपी गई, जबकि पूरी रिपोर्ट अभी लंबित है।
जांच में एसपी-1902 बैच के क्यूआर कोड, पंजीकरण संख्या, मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस, स्वीकृत लेबल, निर्माण तिथि और विश्लेषण का प्रमाण पत्र समेत कई नियामकीय विवरणों में विसंगतियां सामने आईं। मंत्री के अनुसार, पैकेज पर दर्ज क्यूआर कोड कथित तौर पर किसी दूसरी पंजीकृत इकाई से संबंधित पाया गया।
10.72 लाख किलो उत्पादन का नुकसान
शोपियां में अब तक की गई आकलन रिपोर्ट के मुताबिक 6593 पेड़ और 335.75 कनाल क्षेत्र प्रभावित हुआ है। अनुमानित उत्पादन नुकसान करीब 1072258 किलोग्राम और वित्तीय नुकसान लगभग 4.42 करोड़ रुपये आंका गया है। अनंतनाग में नुकसान का आकलन अभी समेकित किया जा रहा है।
मामले में एफआइआर पुलिस स्टेशन शोपियां में दर्ज की गई है। पुलिस जांच अब यह पता लगाएगी कि संदिग्ध बैच का वास्तविक निर्माण और पैकेजिंग कहां हुई, इसकी सप्लाई चेन क्या थी और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
सरकार ने प्रभावित बागवानों के लिए राहत का रास्ता भी खुला रखा है। नुकसान के सत्यापन और वैज्ञानिक जांच पूरी होने के बाद लागू नियमों और योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता पर फैसला किया जाएगा। फिलहाल सरकार ने प्रयोगशाला रिपोर्ट, जब्त सामग्री की जांच और बागानवार नुकसान का आकलन जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
