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आतंकी हमले में पत्रकार शुजात बुखारी व दो अंगरक्षकों की मौत

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर : कश्मीर के वरिष्ठ पत्रकार शुजात बुखारी वीरवार को दो अंगरक्षकों समेत अपने कार्

By JagranEdited By: Published: Fri, 15 Jun 2018 01:29 AM (IST)Updated: Fri, 15 Jun 2018 01:29 AM (IST)
आतंकी हमले में पत्रकार शुजात बुखारी व दो अंगरक्षकों की मौत
आतंकी हमले में पत्रकार शुजात बुखारी व दो अंगरक्षकों की मौत

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर : कश्मीर के वरिष्ठ पत्रकार शुजात बुखारी वीरवार को दो अंगरक्षकों समेत अपने कार्यालय के बाहर आतंकी हमले में मारे गए। किसी भी आतंकी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ ¨सह, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुजात की मौत पर दुख जताया। इस बीच, पुलिस ने श्रीनगर और साथ सटे इलाकों में आतंकियों के संभावित ठिकानों पर दबिश शुरू कर दी है।

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शुजात बुखारी भारत-पाक के बीच संबंध सामान्य बनाने के लिए जारी ट्रैक -2 की प्रक्रिया में भी शामिल थे। उन्हें 10 जून 2006 को भी आतंकियों ने श्रीनगर के रेजीडेंसी रोड से अगवा किया था।

शुजात बुखारी कश्मीर के अंग्रेजी दैनिक राइ¨जग कश्मीर के अलावा कश्मीरी भाषा के अखबार संगरमाल व उर्दू दैनिक बुलंद कश्मीर के संपादक और प्रकाशक थे। वह द ¨हदू के कश्मीर ब्यूरो प्रभारी भी रहे हैं। इसके अलावा वह कश्मीर टाइम्स में भी सेवाएं दे चुके हैं। उनके बड़े भाई सईद बशारत बुखारी पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार में बागवानी मंत्री हैं। शुजात बुखारी के परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, शाम करीब साढ़े सात बजे शुजात बुखारी प्रेस एन्कलेव में स्थित अपने कार्यालय से इफतार करने के लिए निकले। उनके साथ उनका अंगरक्षक और चालक (अंगरक्षक) भी थे। वह जैसे ही वाहन में सवार होने लगे तो उनके कार्यालय के बाहरी छोर पर गली के मुहाने पर तीन आतंकियों ने अंधाधुंध गोलियां चलाई। इसमें शुजात बुखारी और उनके दोनों अंगरक्षक गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े। जिस समय हमला हुआ, उस समय प्रेस एन्कलेव में काफी भीड़ होती है, लेकिन गोलियों की गूंज से वहां अफरा-तफरी फैल गई। वहां मौजूद एक पत्रकार के अनुसार, सभी इतने डर गए थे कि करीब दस मिनट तक कोई गाड़ी के पास नहीं गया। मेहराज नामक एक स्थानीय पत्रकार ने कहा कि मैं अपने कार्यालय में था, गोलियों की आवाज से बाहर निकला। शुजात की गाड़ी देखी उस पर गोलियां लगी थी और तीनों खून से लथपथ गाड़ी में पड़े थे। पुलिस भी आ गई। हम उन्हें अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने शुजात बुखारी और उनके एक अंगरक्षक अब्दुल हमीद को मृत घोषित कर दिया। उनका दूसरा अंगरक्षक मुमताज अहमद जो चालक भी है, ने बाद में अस्पताल में दम तोड़ा। पुलिस महानिदेशक डॉ. एसपी वैद ने कहा कि यह अत्यंत दुखद घटना है। शुजात बुखारी के हत्यारों को पकड़ने के लिए कार्रवाई कर रहे हैं। इस बीच, मुख्यमंत्री महबूबा ने प्रेस एन्कलेव का भी दौरा किया और पीड़ित के घर जाकर उनके परिजनों से संवेदना जताई। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह कुछ ही दिन पहले मुझसे मिलने आए थे।

'शुजात बुखारी की हत्या एक कायराना कृत्य है। यह कश्मीर की प्रगतिशील और सकारात्मक आवाज को बंद करने का कुत्सित और घिनौना प्रयास है। वह निडर पत्रकार थे। उनकी मौत पर मुझे बहुत दुख है। मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिवार के साथ हैं।'

-केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ ¨सह का ट्वीट

'इस घिनौने कृत्य की जितनी ¨नदा की जाए कम है। शुजात बुखारी की हत्या से साबित हो गया है कि ¨हसा में तर्क और विचारों का कोई स्थान नहीं है। पूरा राज्य इस अमानवीय और पाश्विक कृत्य की एकजुट होकर निंदा कर रहा है। राज्य में पत्रकारिता के क्षेत्र में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।'

-महबूबा मुफ्ती, मुख्यमंत्री

'शुजात बुखारी अपने फर्ज की राह में शहीद हुए हैं। वह पत्रकारिता को अपना सबकुछ मानते थे और उन्होंने हमेशा निष्पक्षता से पत्रकारिता की। अपने अंतिम ट्वीट में भी उन्होंने पत्रकारिता, अपने सहयोगी पत्रकारों और अपना बचाव किया था। हम जल्द ही मिलने वाले थे, लेकिन अब यह मुलाकात कभी नहीं होगी।'

-पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का ट्वीट शुजात बुखारी एक निडर पत्रकार थे। वह हमेशा न्याय और जम्मू कश्मीर में शांति के लिए प्रयासरत रहे। शोक संतप्त परिवार के साथ मेरी गहरी संवेदना है।

-कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का ट्वीट


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