राज्य ब्यूरो, श्रीनगर: गुपकार घोषणापत्र पर कश्मीर केंद्रित दल एक साथ क्या आए, जम्मू कश्मीर अपनी पार्टी (जेकेएपी) के कुछ नेता भी पीपुल्स एलायंस में शामिल होने के लिए ललचाने लगे हैं। जेकेएपी के इन नेताओं में पीपुल्स एलायंस के समर्थन में सुर उभरने लगे हैं। वह पांच अगस्त 2019 से पूर्व की जम्मू कश्मीर की संवैधानिक स्थिति की बहाली के लिए नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी द्वारा बनाए गए इस गठजोड़ का हिस्सा बनने का मौका तलाशने लगे हैं। इस कड़ी में पहला नाम जेकेएपी के उपाध्यक्ष चौधरी जुल्फिकार अली का है। वह विशेष दर्जे के बहाने कश्मीर के लोगों के सम्मान की बात करने लगे हैं। हालांकि, जेकेएपी के चेयरमैन अल्ताफ बुखारी कई बार ऑन रिकार्ड कह चुके हैं कि अनुच्छेद 370 की बहाली कराने का दावा करने वाले नेता सिर्फ लोगों को मूर्ख बना रहे हैं।

जेकेएपी का गठन पीडीपी से निष्कासित पूर्व वित्त मंत्री सईद अल्ताफ बुखारी ने किया है। इसमें पीडीपी के कई पुराने मंत्री और विधायक शामिल हैं। जेकेएपी को कश्मीर में नई दिल्ली द्वारा तैयार की गई भाजपा की बी-टीम भी कहते हैं। यह पार्टी सार्वजनिक तौर पर जम्मू कश्मीर में विकास परियोजनाओं की बहाली और पांच अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए वादों को पूरा करने की मांग करते हुए कहती है कि जो लोग अनुच्छेद 370 की बहाली का दावा करते हैं, वह लोगों को सिर्फ मूर्ख बना रहे हैं। सिर्फ सर्वाेच्च न्यायालय ही इसमें मदद कर सकता है।

दो दिन पूर्व नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला के निवास पर पीडीपी, पीपुल्स कांफ्रेंस, अवामी नेशनल कांफ्रेंस, जेकेपीएस और माकपा नेताओं की एक बैठक हुई थी। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और पीपुल्स कांफ्रेंस के चेयरमैन सज्जाद गनी लोन भी शामिल हुए। इन सभी नेताओं ने जम्मू कश्मीर की पांच अगस्त 2019 से पूर्व की संवैधानिक स्थिति की बहाली के लिए गुपकार घोषणा को लागू कराने के लिए पीपुल्स एलांयस बनाया है। इसके बाद से कश्मीर विशेषकर मुस्लिम भावनाओं के सहारे सियासत में सत्ता की सीढि़यां चढ़ने वाले अन्य नेताओं व संगठनों में हलचल तेज हो गई है। जेकेएपी में भी इसका असर नजर आने लगा है। ट्वीट पर रि-ट्वीट..साथ आने का यूं दिया संकेत

पीडीपी-भाजपा गठबंधन में मंत्री रहे एवं वर्तमान में जेकेएपी के उपाध्यक्ष चौधरी जुल्फिकार अली ने कहा कि कश्मीर मसले के शांतिपूर्ण समाधान और जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे को बहाल कराने के लिए सभी राजनीतिक पार्टियों का एक होना जरूरी है। अपने ट्वीटर हैंडल पर भी उन्होंने लिखा, प्रदेश के लोगों के मान-सम्मान, अधिकारों और विशेष दर्ज के लिए सभी राजनीतिक दल, चाहे वह किसी भी राजनीतिक विचारधारा के समर्थक हों, एकजुट होना होगा। जम्मू कश्मीर के राज्य दर्जे को फिर से बहाल कराने के लिए यह बहुत जरूरी है। उनके इस ट्वीट पर पीडीपी के वरिष्ठ नेता निजामदीन बट ने रि-ट्वीट करते हुए लिखा कि पृथक विचारधारा वालों के साथ कैसे एकता हो सकती है, उनके साथ मिलकर कैसे आगे बढ़ा जा सकता है? एकता और सहमति आपस में समन्वय और समान विचारधारा रखने वालों के बीच ही हो सकती है। जुल्फिकार ने इस पर उन्हें कहा कि सर, हम सभी का एक ही मकसद है अपने लोगों के मान सम्मान का संरक्षण सुनिश्चित बनाना। हालांकि, जेकेएपी के चेयरमैन अल्ताफ बुखारी से जुल्फिकार के बयान को लेकर जब संपर्क करने का प्रयास किया गया तो वह उपलब्ध नहीं हो पाए।

----------- अवसरवादी रहे हैं जुल्फिकार

पत्रकार एजाज अहमद ने कहा कि मैं सिर्फ इतना कहूंगा कि जुल्फिकार अली अवसरवादी नजर आते हैं। उन्होंने एक समुदाय विशेष की सियासत की है। उन्हें जब लगा कि पीडीपी सत्ता में नहीं आ सकती तो वह जेकेएपी में शामिल हो गए। अगर उन्हें जम्मू कश्मीर के लोगों के सम्मान की फिक्र थी तो वह जेकेएपी में क्यों शामिल हुए। उन्हें लगा था कि जेकेएपी सरकार बनाने वाली है। यहां चुनाव नहीं हो रहे हैं और उन्हें लगता है कि नेकां और पीडीपी के साथ जरूर केंद्र कोई खिचड़ी पका रहा है और उसे खाने के लिए ही वह अब अनुच्छेद 370 के लिए मिलकर लड़ने की बात कर रहे हैं। जुल्फिकार की मजहब आधारित रही है सियासत

जम्मू कश्मीर यूनिटी फाउंडेशन के चेयरमैन अजात जम्वाल ने कहा कि यहां कोई भी जुल्फिकार अली के बयान से हैरान नहीं होगा। उनकी सियासत हमेशा मजहब के आधार पर रही है। दो साल पहले तत्कालीन पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार ने एक आदेश जारी किया था कि जम्मू संभाग में किसी भी खेत, जमीन या जंगल में या किसी सरकारी जमीन पर अगर गुज्जर-बक्करवाल समुदाय के लोग अपना डेरा लगाते हैं तो उन्हें वहां से नहीं हटाया जाए। अगर हटाना है तो जिला उपायुक्त और एसएसपी को पहले जनजातीय मामले विभाग से इसकी अनुमति प्राप्त करनी होगी। उस समय जनजातीय मामलों के जुल्फिकार अली ही मंत्री थे।

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