पीर की गली से साधना तक... J&K की 3 बड़ी सुरंगों का क्या हुआ? विधानसभा में सरकार का जवाब, जानें कब शुरू होगा काम
सरकार ने जम्मू-कश्मीर की तीन महत्वपूर्ण सुरंगों पीर की गली, साधना और सिंघपोरा-वैलू की स्थिति विधानसभा में स्पष्ट की है। ...और पढ़ें

पीर की गली का काम प्रोजेक्ट बीकॉन को दिया गया। (फाइल फोटो)
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए सालों से इंतजार का सबब बनी तीन महत्वपूर्ण सुरंगों, पीर की गली (मुगल रोड), साधना (कुपवाड़ा-कनाह) और सिंघपोरा-वैलू को लेकर सरकार ने आखिरकार विधानसभा में स्थिति स्पष्ट कर दी है।
वागूरा के विधायक इरफान हफिज लोन द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने माना कि दो सबसे अहम प्रोजेक्ट अभी भी केवल फाइलों में ही अटके हैं, जबकि एक टेंडर स्टेज पर पहुंच गया है।
अलाइनमेंट पर उलझा पेंच
सरकार के जवाब के मुताबिक, मुगल रोड पर बनने वाली पीर की गली टनल (8.51 किमी) और कुपवाड़ा-कनाह को जोड़ने वाली साधना टनल (7.82 किमी) दोनों का काम प्रोजेक्ट बीकॉन को दिया गया है।
लेकिन दोनों की कहानी एक जैसी है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएंडएच) के एडीजी (टनल) ने 17 से 19 जून 2026 के बीच साइट विजिट कर अलाइनमेंट पर कुछ आपत्तियां जताई थीं। बीकॉन ने इसका जवाब 09 सितंबर 2026 को ही मंत्रालय को भेजा है और अब अप्रूवल का इंतजार है। डीपीआर यानी डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट तो अलाइनमेंट मंजूर होने के बाद ही बनेगी। यानी टाइमलाइन तय होना अभी बहुत दूर की बात है।
इसके उलट सिंघपोरा-वैलू टनल (लगभग 10 किमी), जो कश्मीर को किश्तवाड़ से जोड़ेगी, इस दौड़ में सबसे आगे है। यह प्रोजेक्ट टेंडर स्टेज पर है और तय समय के अनुसार अपॉइंटेड डेट से 60 महीनों में इसे पूरा करना होगा।
गुलमर्ग, चेरी वैली रोड का क्या?
इसी सवाल के दूसरे हिस्से में बाबा रेशी-गुलमर्ग समेत चार सड़कों पर भी जवाब आया है। बाबा रेशी-गुलमर्ग रोड के लिए 40.34 करोड़ रुपये की डीपीआर तैयार है, जो मुख्यमंत्री के 14 अक्टूबर 2025 को बारामूला समीक्षा बैठक में दिए निर्देश पर बनी है, लेकिन घने जंगल से गुजरने के कारण वन मंजूरी और फंड का पेंच फंसा है। हाजीबल-ग्रतबल-डाजी-बाबा रेशी रोड को इस वित्त वर्ष में शहर और कस्बे कार्यक्रम के तहत मैकडमाइज्ड कर दिया गया है।
चेरी वैली रोड की डीपीआर फंड और वन मंजूरी मिलने के बाद ही बनेगी। जबकि डंडमुह-सत्रीसरन (कलांत्रा-डंडमोह-सत्रीसरन-नागबल) 10 किमी सड़क, जिसकी लागत 15 करोड़ रुपये है, को सीआरआइएफ 2026-27 में प्राथमिकता देकर केंद्र को भेजा गया है, मंजूरी अभी बाकी है।
20 साल पुरानी जेकेइआरए का हिसाब
सरकार ने जम्मू-कश्मीर इकोनॉमिक रिकंस्ट्रक्शन एजेंसी (जेकेइआरए) पर भी बड़ा खुलासा किया। 16 अगस्त 2004 को बनी इस एजेंसी ने अब तक एडीबी और वर्ल्ड बैंक के सहयोग से 5,479 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट पूरे किए हैं। इसमें जेकेएमपीआइआर 1611 करोड़ रुपये और जेकेयूएसडीआइपी 1793 करोड़ रुपये पूरे हो चुके हैं।
विश्व बैंक पोषित जेहलम तवी फल्ड रिकवरी प्रोजेक्ट (जेटीएफआरपी) - यूएसडी 250 मिलियन फिजिकली 31 अगस्त 2026 को पूरा हो चुका है, अब 31 दिसंबर 2026 तक इसका फाइनेंशियल क्लोजर चल रहा है। इसके तहत 229 कामों में से 223 पूरे हो चुके हैं जबकि 6 अभी चल रहे हैं। एजेंसी के पास आज कुल 130 कर्मचारी हैं, जिसमें 30 डेपुटेशन पर, 93 इरा के और 7 डेली वेजर शामिल हैं।
कुल मिलाकर, जवाब से साफ है कि जम्मू-कश्मीर के टनल प्रोजेक्ट अभी कागज से जमीन पर उतरने में वक्त लेंगे, जबकि जेकेइआरए अपने दो दशक के सफर को समेटने की तैयारी में है।
