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काम चीफ इंजीनियर का, वेतन जेई वाला... जम्मू-कश्मीर पावर विभाग में ऐसा क्यों? 2019 के आदेश के बाद भी मामला अटका

Published: Mon, 05 Oct 2026 03:28 PM (IST)

जम्मू-कश्मीर पावर विभाग में इंजीनियरों को उच्च पदों पर काम करने के बावजूद जूनियर इंजीनियर का वेतन मिल रहा है, ...और पढ़ें

पावर विभाग में वर्षों से प्रमोशन का पेच, अब आंदोलन की चेतावनी। (फाइल फोटो)

पावर विभाग में वर्षों से प्रमोशन का पेच, अब आंदोलन की चेतावनी। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. जम्मू-कश्मीर पावर विभाग में इंजीनियरों को पद के अनुरूप वेतन नहीं।

  2. उच्च पदों पर कार्यरत इंजीनियरों को मिल रहा जूनियर इंजीनियर का वेतन।

  3. पदोन्नति और नियमितीकरण में देरी से इंजीनियरों में असंतोष बढ़ा।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के पावर विभाग में इंजीनियरों के प्रमोशन का ऐसा विरोधाभास सामने आया है, जो सरकारी सेवा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। विभाग में कुछ अधिकारी जिम्मेदारी तो चीफ इंजीनियर की निभा रहे हैं, लेकिन वेतन अब भी उस जूनियर इंजीनियर (जेइ) पद के हिसाब से ले रहे हैं, जिस पर उनकी सरकारी सेवा की शुरुआत हुई थी। 

वरिष्ठ इंजीनियरों के मुताबिक, फिलहाल दो चीफ इंजीनियर ऐसे हैं जो जूनियर इंजीनियर पद से जुड़ा वेतन प्राप्त कर रहे हैं। इतना ही नहीं, प्रबंधन निदेशक (एमडी) स्तर की जिम्मेदारी संभाल रहे एक अधिकारी का वेतन भी उनसे काफी निचले पद से जुड़ा बताया जा रहा है। यह स्थिति वर्षों से चल रही इन-चार्ज पदोन्नतियों और उनके नियमितीकरण में हो रही देरी का नतीजा है।

मामला केवल वेतन तक सीमित नहीं है। इसका सीधा असर वरिष्ठता, पदोन्नति, भविष्य की करियर प्रगति और अन्य सेवा लाभों पर पड़ रहा है। जेई से लेकर असिस्टेंट इंजीनियर (एई), असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (एइइ), एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर और चीफ इंजीनियर तक कई पदों पर पदोन्नतियां इन-चार्ज आधार पर की गई हैं। अधिकारी ऊंचे पदों की जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन उन्हें उन पदों का नियमित दर्जा और वित्तीय लाभ नहीं मिल पा रहा।

पदोन्नति के बाद भी नहीं मिल रहा पद का वेतन

जम्मू-कश्मीर इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स एसोसिएशन (जेकेइइजीए) ने इस व्यवस्था पर गंभीर चिंता जताई है।एसोसिएशन के महासचिव और ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के उपाध्यक्ष इंजीनियर पिरजादा हिदायतुल्लाह का कहना है कि इंजीनियर निर्धारित प्रक्रिया के तहत पदोन्नत हुए हैं और वर्षों से उच्च पदों की जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, फिर भी उन्हें संबंधित पद का वेतन और नियमित सेवा लाभ नहीं मिल रहा।

चीफ इंजीनियर का नियमित दर्जा और वेतन क्यों नहीं?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब अधिकारी से चीफ इंजीनियर का काम लिया जा रहा है तो उसे चीफ इंजीनियर का नियमित दर्जा और वेतन क्यों नहीं? यही सवाल अब पावर इंजीनियरिंग कैडर में असंतोष की वजह बन रहा है। दिलचस्प बात यह है कि इस समस्या के समाधान के लिए सरकार पहले ही कदम उठा चुकी थी।

22 अक्टूबर 2019 के राज्य प्रशासनिक परिषद के फैसले में पावर इंजीनियरों की नियमित पदोन्नति से जुड़े मामलों को फास्ट-ट्रैक आधार पर निपटाने और दो महीने के भीतर प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद 23 और 30 अक्टूबर 2019 को संबंधित सरकारी आदेश भी जारी हुए।

अब तक केवल 5 नियमितीकरण आदेश जारी

लेकिन वर्षों बाद भी मामला पूरी तरह सुलझ नहीं पाया। एसोसिएशन के अनुसार, अब तक केवल पांच नियमितीकरण आदेश जारी किए गए हैं। 23 जुलाई 2026 को स्थापना एवं चयन समिति के सामने भी अलग-अलग स्तरों पर पावर इंजीनियरों के नियमितीकरण का प्रस्ताव रखा गया। समिति ने मामले को मंत्रिपरिषद के सामने रखने की सलाह दी, ताकि 2019 के फैसले के लिए जरूरी विस्तार लिया जा सके।

एसोसिएशन की चिंता यह है कि प्रस्ताव अभी तक मंत्रिपरिषद के समक्ष नहीं पहुंचा है। ऐसे में इंजीनियरों की वर्षों पुरानी प्रतीक्षा और लंबी होती जा रही है।

बिजली की बढ़ती मांग के बीच इंजीनियरों पर बढ़ी जिम्मेदारी

पावर इंजीनियरों का कहना है कि बढ़ती बिजली मांग और कठिन परिस्थितियों के बीच वे लगातार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। ऐसे में काम ऊंचे पद का और लाभ निचले पद का वाली व्यवस्था लंबे समय तक कैसे चलेगी, यह सवाल अब विभाग के भीतर भी जोर पकड़ रहा है।

समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी

जेकेेइइजीए ने प्रशासन से मामले को जल्द मंत्रिपरिषद के समक्ष रखने, जरूरी मंजूरी लेने और सभी स्तरों पर नियमितीकरण एवं वरिष्ठता संबंधी मामलों को समयबद्ध तरीके से निपटाने की मांग की है। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वह लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होगी।