जम्मू-कश्मीर में बिजली की मांग ने बढ़ाई टेंशन, 3063 मेगावाट तक पहुंची डिमांड; जानें सरकार का प्लान
जम्मू-कश्मीर में बिजली की मांग 3063 मेगावाट तक पहुंच गई है, जबकि आपूर्ति 2899 मेगावाट है। घाटे वाले फीडरों पर ...और पढ़ें

कश्मीर में 1845 और जम्मू में 1623 मेगावाट की रिकॉर्ड मांग। (फाइल फोटो)
HighLights
जम्मू-कश्मीर में बिजली की मांग 3063 मेगावाट तक पहुंची।
मांग और आपूर्ति के बीच 164 मेगावाट का अंतर।
बिजली नेटवर्क मजबूत करने के लिए 2028 तक सुधार कार्य।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में बिजली की बढ़ती मांग ने पावर सिस्टम पर दबाव बढ़ा दिया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में जुलाई तक केंद्र शासित प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग 3063 मेगावाट तक पहुंच गई, जबकि उस समय उपलब्ध बिजली आपूर्ति 2899 मेगावाट रही। यानी मांग और उपलब्ध आपूर्ति के बीच 164 मेगावाट का अंतर रहा, जिसे शॉर्ट टर्म व्यवस्थाओं के जरिए पूरा किया गया। सरकार ने यह जानकारी विधानसभा में विधायक सुनील कुमार शर्मा द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में दी।
पावर डेवलपमेंट डिपार्टमेंट के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में सबसे अधिक पीक डिमांड 27 मई 2026 को सुबह 7 बजे दर्ज की गई। क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो कश्मीर संभाग में इसी समय 1845 मेगावाट की अधिकतम मांग रही, जबकि जम्मू संभाग में सबसे ज्यादा 1623 मेगावाट की मांग 16 जुलाई को शाम 6 बजे दर्ज की गई।
बिजली व्यवस्था को संतुलित रखने के लिए विभाग फिलहाल फीडर लॉस के आधार पर लोड कर्टेलमेंट कार्यक्रम लागू कर रहा है। जिन फीडरों में लाइन लॉस 15 प्रतिशत से कम है, वहां निर्धारित कटौती नहीं की जाती। 15 से 40 प्रतिशत तक नुकसान वाले फीडरों पर तीन घंटे की कटौती, जबकि 40 प्रतिशत से अधिक नुकसान वाले फीडरों पर छह घंटे तक कटौती का प्रावधान है।
कहां कम है बिजली सप्लाई?
कम वोल्टेज, बार-बार बिजली बाधित होने या अपर्याप्त आपूर्ति वाले इलाकों पर भी विभागीय अधिकारी नजर रख रहे हैं। इसके लिए फीडर की कार्यक्षमता, लोड, उपभोक्ताओं की शिकायतों और मैदानी रिपोर्ट को आधार बनाया जा रहा है। गर्मियों और सर्दियों में बढ़ने वाली मांग के साथ दूरदराज और पहाड़ी इलाकों की स्थिति की भी विशेष समीक्षा की जाती है।
हजारों करोड़ के नेटवर्क सुधार के काम जारी
सरकार के अनुसार, 2026-27 में ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े 1831 कार्य जारी या स्वीकृत हैं, जिनमें 432 काम पूरे हो चुके हैं। इससे पहले 2025-26 में 1795, 2024-25 में 1979 और 2023-24 में 1630 कार्य दर्ज किए गए थे।
बिजली नेटवर्क को मजबूत करने के लिए आरडीएसएस और केंद्र शासित केपेक्स के तहत पुराने कंडक्टरों को एरियल बंडल्ड केबल से बदलने, कमजोर लाइनों को मजबूत करने, छोटे आकार के कंडक्टरों को अपग्रेड करने तथा पुराने और ओवरलोडेड ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने या उन्हें बदलने का काम किया जा रहा है।
इसके अलावा नए रिसीविंग स्टेशन, अतिरिक्त ट्रांसफार्मर, हाई टेंशन और लो टेंशन नेटवर्क को मजबूत करने तथा नए ग्रिड सबस्टेशन बनाने की योजना भी चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाई जाएगी। विभाग ने आरडीएसएस से जुड़े कार्यों को मार्च 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
