'मैं मुसीबत में हूं, तुरंत पैसे भेजो...', अपनों की आवाज में आए कॉल से सावधान, AI ठगी पर J&K पुलिस का अलर्ट
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने लोगों को नए स्कैम से सावधान किया है, जिसमें अपराधी परिचितों की आवाज की नकल कर ठगी ...और पढ़ें

AI से ठगी का नया पैंतरा, जम्मू-कश्मीर पुलिस का अलर्ट। (फाइल फोटो)
HighLights
एआई से आवाज की नकल कर साइबर ठगी।
परिचितों के नाम पर पैसे या जानकारी मांगना।
पुलिस ने पहचान पुष्टि और सतर्कता की सलाह दी।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। सोचिए, अचानक आपके फोन पर किसी अपने का कॉल आता है। आवाज बिल्कुल जानी-पहचानी है। सामने वाला घबराई हुई आवाज में कहता है, बहुत जरूरी काम है, अभी पैसे भेज दो। आप शायद आवाज पहचानकर बिना ज्यादा सवाल किए मदद के लिए तैयार हो जाएं। लेकिन अब यही भरोसा साइबर ठगों का सबसे बड़ा हथियार बनता जा रहा है।जम्मू-कश्मीर पुलिस ने लोगों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित आवाज क्लोनिंग स्कैम को लेकर सावधान किया है।
पुलिस के मुताबिक साइबर अपराधी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से किसी व्यक्ति की आवाज की नकल तैयार कर उसी आवाज के जरिए रिश्तेदारों, दोस्तों, कर्मचारियों या अधिकारियों के नाम पर फर्जी कॉल अथवा ऑडियो संदेश भेज ठगी कर रहे हैं।
पुलिस के अनुसार, पहले फोन पर किसी परिचित की आवाज सुनना ही पहचान का बड़ा आधार माना जाता था। लेकिन एआइ आधारित आवाज क्लोनिंग ने इस भरोसे को चुनौती दी है। अपराधी ऐसी आवाज तैयार करने की कोशिश कर सकते हैं जो सुनने में वास्तविक व्यक्ति जैसी लगे। जम्मू साइबर पुलिस पहले भी इस तकनीक को साइबर अपराध के उभरते खतरे के रूप में लेकर लोगों को सावधान कर चुकी है।
अपना बनकर फोन करेंगे जालसाज
ठगी का तरीका भी बेहद सामान्य दिखाई दे सकता है। कॉल करने वाला खुद को कोई करीबी रिश्तेदार, दोस्त, अधिकारी या बॉस बताकर अचानक मदद, पैसे, बैंक संबंधी जानकारी या किसी अन्य संवेदनशील सूचना की मांग कर सकता है। जल्दबाजी पैदा करना इस तरह की ठगी का अहम हिस्सा है।
आवाज नहीं, पहचान की करें पुष्टि
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सलाह दी कि केवल आवाज परिचित लगने के आधार पर किसी अप्रत्याशित कॉल पर भरोसा न करें। अगर कोई व्यक्ति अचानक पैसे या संवेदनशील जानकारी मांगता है तो उसी व्यक्ति के किसी पहले से सुरक्षित और भरोसेमंद नंबर पर दोबारा संपर्क करके पुष्टि करें। जरूरत पड़ने पर किसी दूसरे माध्यम से भी पहचान सत्यापित कर सकते हैं।
अनजान या अप्रत्याशित फोन कॉल पर व्यक्तिगत, वित्तीय या अन्य संवेदनशील जानकारी साझा न करें। परिवारों से बच्चों और बुजुर्गों को भी ऐसे आवाज क्लोनिंग स्कैम के बारे में जागरूक करें ताकि अनजाने में बड़ा नुकसान न झेलना पड़ जाए।
एक कॉल, कई खतरे
साइबर पुलिस स्टेशन श्रीनगर ने बताया कि अपराध का तरीका लगातार बदल रहा है। जम्मू-कश्मीर पुलिस पहले भी फर्जी कॉल, ओटीपी फ्रॉड, सिम बदलना और अन्य डिजिटल ठगी को लेकर लोगों को आगाह करती रही है। जनता को बार-बार यही जागरूक किया जा रहा है कि वे घबराएं नहीं, तुरंत भरोसा न करें और पहले सत्यापन करें।
अगर किसी व्यक्ति के साथ साइबर फ्रॉड हो जाता है तो पुलिस ने तत्काल राष्ट्रीय साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन 1930 पर नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन या फिर cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
