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नगर निकायों में अब 7 सदस्य, CM उमर ने विधानसभा में पेश किया संशोधन विधेयक; वार्ड निर्धारण का पेंच भी होगा साफ

By Naveen NawazEdited By: Dallu Slathia
Published: Thu, 24 Sep 2026 06:06 PM (IST)

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर नगरपालिका (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया, जिसमें 5,000 आबादी वाले निकायों में निर्वाचित सदस्यों की न्यूनतम संख्या पांच से बढ़ाकर सात करने का प्रस्ताव है।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नगरपालिका (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश। (फाइल पोटो)

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नगरपालिका (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश (फाइल पोटो)

HighLights

  1. छोटे नगर निकायों में अब न्यूनतम सात निर्वाचित सदस्य होंगे।

  2. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने नगरपालिका संशोधन विधेयक 2026 विधानसभा में पेश किया।

  3. यह विधेयक मौजूदा कानून की विसंगतियों को दूर कर प्रतिनिधित्व बढ़ाएगा।

नवीन नवाज, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के छोटे नगर निकायों में अब प्रतिनिधित्व का दायरा बढ़ सकता है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने नगर निकायों के गठन से जुड़े कानूनी प्रावधानों की तस्वीर साफ करने के लिए गुरूवार को विधानसभा में जम्मू-कश्मीर नगरपालिका (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया। प्रस्तावित संशोधन में 5,000 की आबादी वाले नगरपालिका निकायों में निर्वाचित सदस्यों की न्यूनतम संख्या पांच से बढ़ाकर सात करने का प्रावधान किया गया है।

इसके साथ ही वार्ड निर्धारण को लेकर कानून में मौजूद दोहरे संदर्भ को खत्म करने की पहल की गई है। धारा 10(2) से 'राज्य निर्वाचन आयोग' का उल्लेख हटाने का प्रस्ताव है। सरकार का कहना है कि इन बदलावों से कानून में मौजूद विसंगतियां दूर होंगी और नगर निकायों के गठन तथा वार्ड निर्धारण की प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट बनाया जा सकेगा।

एक ही कानून में पांच और सात का पेंच

नगर निकायों में सदस्यों की संख्या को लेकर मौजूदा कानून में विरोधाभासी प्रावधान सामने आ रहा था। जम्मू-कश्मीर नगरपालिका अधिनियम, 2000 की धारा 10 की उपधारा (1) में निर्वाचित सदस्यों की संख्या सात से कम नहीं होने की बात कही गई है।

इसी धारा के तहत दी गई तालिका में 5,000 की आबादी वाले नगरपालिका समितियों/परिषदों के लिए पांच निर्वाचित सदस्यों का प्रावधान है।यानी एक तरफ न्यूनतम संख्या सात और दूसरी तरफ पांच—कानून की इसी विसंगति को दूर करने के लिए सरकार संशोधन लेकर आई है।

प्रस्तावित विधेयक में 'पांच सदस्य' के स्थान पर सात सदस्य' करने का प्रस्ताव है। इसके लागू होने पर इस वर्ग के नगर निकायों में न्यूनतम निर्वाचित सदस्यों की संख्या को लेकर स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

वार्डों के निर्धारण पर भी साफ होगी तस्वीर

संशोधन विधेयक का दूसरा अहम पहलू नगरपालिका क्षेत्रों के वार्ड निर्धारण से जुड़ा है। मौजूदा कानून की धारा 282 के तहत मतदाता सूचियों की तैयारी, वार्डों का निर्धारण, सीटों का आरक्षण एवं आवंटन तथा नगरपालिका चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण से संबंधित जिम्मेदारियां राज्य निर्वाचन आयोग से जुड़ी हैं।

वहीं, धारा 10(2) में भी राज्य निर्वाचन आयोग को नगरपालिका क्षेत्रों के वार्ड निर्धारित करने के लिए सरकार द्वारा अधिकृत किए जाने वाले प्राधिकारी के रूप में संदर्भित किया गया है।सरकार के मुताबिक, कानून की अलग-अलग धाराओं में इस तरह के संदर्भों से अधिकारों और जिम्मेदारियों को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए धारा 10(2) से राज्य निर्वाचन आयोग का संदर्भ हटाने का प्रस्ताव किया गया है।

छोटे निकायों में बढ़ सकता स्थानीय प्रतिनिधित्व

विधेयक के कानून बनने की स्थिति में 5,000 आबादी वाले छोटे नगर निकायों में निर्वाचित सदस्यों की संख्या पांच से बढ़कर सात हो जाएगी। इससे स्थानीय स्तर पर प्रतिनिधित्व का दायरा बढ़ सकता है।अधिक निर्वाचित सदस्य होने से विभिन्न वार्डों और स्थानीय इलाकों से जुड़े मुद्दों को निकाय के भीतर उठाने के लिए अतिरिक्त प्रतिनिधित्व उपलब्ध होगा। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव कानून के लागू होने के बाद वार्ड निर्धारण और संबंधित नियमों के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।

सरकार का फोकस- विसंगति खत्म करना

सरकार ने विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में इसे किसी नई नगरपालिका व्यवस्था की शुरुआत के बजाय मौजूदा कानून की विसंगतियों को दूर करने वाला संशोधन बताया है।

सरकार का जोर मुख्य रूप से दो बिंदुओं पर है पहला, निर्वाचित सदस्यों की न्यूनतम संख्या को लेकर मौजूद विरोधाभास खत्म करना और दूसरा, वार्ड निर्धारण से जुड़े प्राधिकार की स्थिति को स्पष्ट करना।

राजपत्र में प्रकाशन के साथ लागू होगा कानून

प्रस्तावित विधेयक में कहा गया है कि अधिनियम बनने के बाद यह राजपत्र में प्रकाशित होने की तारीख से प्रभावी होगा।

अब विधानसभा में विधेयक पर आगे की विधायी प्रक्रिया होगी। इसके पारित होने और अधिनियम का रूप लेने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संशोधित प्रावधान जमीन पर किस तरह लागू किए जाते हैं।

नजर अब विधानसभा की अगली कार्रवाई पर

नगर निकायों की संरचना और वार्ड निर्धारण से जुड़े इन प्रस्तावित बदलावों ने स्थानीय निकाय व्यवस्था के कानूनी ढांचे में स्पष्टता लाने की दिशा में सरकार की पहल को सामने रखा है।

खासतौर पर 5,000 आबादी वाले निकायों में पांच और सात सदस्यों के विरोधाभास को खत्म करना इस संशोधन का प्रमुख बिंदु है।