जम्मू-कश्मीर में जनगणना का पहला चरण पूरा, बर्फीले इलाकों में 100% गिनती; अब फरवरी में मैदानी इलाकों की बारी
जम्मू-कश्मीर व लद्दाख में जनगणना-2027 का पहला चरण बर्फीले और दुर्गम क्षेत्रों में पूरा हो गया है, जिसमें 5,292 गणना ...और पढ़ें

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में जनगणना 2027 का पहला चरण संपन्न।
HighLights
बर्फीले क्षेत्रों में जनगणना का पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा हुआ।
जम्मू-कश्मीर व लद्दाख में 5,292 गणना ब्लॉक शामिल किए गए।
मुख्य आबादी गणना फरवरी में शेष मैदानी इलाकों में होगी।
राज्य ब्यूरो, जम्मू। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में जनगणना-2027 का पहला चरण सुचारू रूप से आगे बढ़ रहा है। बर्फीले और दुर्गम क्षेत्रों में जनसंख्या गणना को 100 प्रतिशत करने का दावा किया गया है। श्रीनगर, जम्मू समेत प्रदेश के अन्य शेष क्षेत्रों में मुख्य आबादी गणना फरवरी में होगी।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के जनगणना संचालन निदेशक एवं मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी अमित शर्मा ने मंगलवार को पत्रकार वार्ता में बताया कि पहली से 30 सितंबर तक बर्फीले क्षेत्रों में 5,292 गणना ब्लाकों में जनसंख्या गणना की गई।
इनमें जम्मू-कश्मीर के 4,597 और लद्दाख के 695 ब्लाक शामिल हैं। पांच दिवसीय पुनरीक्षण अभियान भी पांच अक्टूबर को पूरा हुआ, जिसमें गणना के दौरान सामने आए सुधार, छूट और अन्य बदलावों को शामिल किया गया।
लद्दाख और किश्तवाड़ पूरी तरह बर्फीले क्षेत्र घोषित
डोडा में 798, किश्तवाड़ में 602, रामबन में 418, अनंतनाग में 377, बारामुला में 369, रियासी में 345, ऊधमपुर में 313 और कुपवाड़ा में 230 गणना ब्लाक रहे। लद्दाख और किश्तवाड़ को पूरी तरह बर्फीला क्षेत्र घोषित किया गया था, जबकि अन्य जिलों के कुछ हिस्से भी इस श्रेणी में शामिल रहे। शेष मैदानी इलाकों में फरवरी में गणना होगी।
मकान सूचीकरण का कार्य जून में पूरा हो चुका है और जिला जनगणना पुस्तिका का काम पहली से 30 अक्टूबर तक जारी रहेगा।
स्व-गणना में जम्मू-कश्मीर सबसे आगे
शर्मा ने कहा कि जनगणना-2027 देश की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना है। गणनाकर्मी डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे हैं और नागरिकों को स्व-गणना की सुविधा दी गई है। जम्मू-कश्मीर स्व-गणना में सभी केंद्र शासित प्रदेशों में पहले और देशभर में आठवें स्थान पर रहा।
उन्होंने बताया कि केंद्र ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में जनगणना संबंधी कार्यों के लिए करीब 49.2 करोड़ रुपये जारी किए हैं। व्यापक जागरूकता अभियान के तहत समाचार पत्रों, एलईडी स्क्रीन, प्रचार वाहनों, रेडियो, होर्डिंग और विश्वविद्यालय कार्यक्रमों का इस्तेमाल किया गया। जम्मू-कश्मीर बैंक के साथ शाखाओं में जनगणना प्रचार सामग्री प्रदर्शित करने के लिए एमओयू भी किया गया है।
सशस्त्र बल भी जनगणना में शामिल
सेना, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और अन्य केंद्रीय बलों को भी जनगणना में शामिल किया गया है। जम्मू-कश्मीर में 125 और लद्दाख में 47 विशेष प्रतिष्ठानों की जनसंख्या गणना कागजी प्रपत्रों के जरिए पूरी की गई। सुरक्षा कारणों से इनकी जानकारी इंटरनेट के माध्यम से एकत्र नहीं की गई।
रक्षा मंत्रालय के साथ नियमित समन्वय से प्रक्रिया आसान हुई। सेना ने अपने केंद्रीय डेटाबेस के आधार पर आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई। अब संबंधित प्रतिष्ठान कागजी रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण कर सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड माध्यम से डेटा जनगणना अधिकारियों को भेजेंगे, जिसे मुख्य डेटाबेस में शामिल किया जाएगा।
जनगणना और SIR अलग-अलग प्रक्रिया
शर्मा ने स्पष्ट किया कि जनगणना और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। SIR भारत निर्वाचन आयोग कराता है, जबकि जनगणना केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन भारत के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त के कार्यालय द्वारा कराई जाती है। इसका मतदाता सूची के पुनरीक्षण से कोई संबंध नहीं है।
उन्होंने कहा कि जनगणना के आंकड़े भविष्य में बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक कल्याण और अन्य विकास योजनाओं के लिए आधार बनेंगे तथा 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देंगे
