जम्मू-कश्मीर विधानसभा के शरद सत्र में आएंगे 3 अहम बिल! GST से नगर निकाय और कारोबार तक, जानें क्या-क्या बदलेगा
जम्मू-कश्मीर सरकार आगामी शरद सत्र में तीन महत्वपूर्ण सुधार विधेयक पेश करेगी, जिनमें जीएसटी संशोधन, नगर पालिका बदलाव और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से संबंधित कानून शामिल हैं।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा का सत्र 21 से 30 सितंबर तक चलेगा।
HighLights
जीएसटी कानून में संशोधन कर ढांचे को केंद्रीय नियमों के अनुरूप बनाएगा।
नगर पालिका विधेयक शहरी निकायों की संरचना और चुनावी व्यवस्था सुधारेगा।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से व्यापार प्रक्रियाएं सरल होंगी, निवेश बढ़ेगा।
राज्य ब्यूरो, जम्मू। जम्मू-कश्मीर सरकार आगामी विधानसभा के शरद सत्र में तीन महत्वपूर्ण सुधारोन्मुख विधेयक पेश करने की तैयारी में है। इनमें जम्मू-कश्मीर वस्तु एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2026, जम्मू-कश्मीर नगर पालिका (संशोधन) विधेयक, 2026 और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से संबंधित प्रस्तावित कानून शामिल हैं।
विधानसभा का सत्र 21 से 30 सितंबर तक चलेगा, जिसमें सात बैठकें निर्धारित हैं।
जीएसटी कानून में होगा बदलाव
प्रस्तावित जीएसटी संशोधन का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर के कर ढांचे को केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) कानून में किए गए बदलावों के अनुरूप बनाना है। वित्त अधिनियम, 2026 के तहत किए गए संशोधनों के बाद जेएंडके जीएसटी अधिनियम, 2017 की विभिन्न धाराओं में बदलाव प्रस्तावित हैं।
सरकार का मानना है कि इससे कर अनुपालन व्यवस्था अधिक समान होगी, विवादों में कमी आएगी और कारोबारियों के लिए नियमों का पालन आसान होगा। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, जिनके पास वित्त विभाग भी है, ने विधेयक को पेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
नगर निकायों की व्यवस्था होगी मजबूत
नगरपालिका संशोधन विधेयक के जरिए नगर निकायों की संरचना, चुनावी व्यवस्था और जिम्मेदारियों से जुड़े मुद्दों को स्पष्ट करने का प्रयास किया जाएगा। राज्य निर्वाचन आयोग की सिफारिशों के आधार पर वार्ड परिसीमन, चुनाव प्रबंधन और प्रशासनिक समन्वय से जुड़े प्रावधानों में बदलाव की संभावना है।
इसका उद्देश्य नगर निकाय चुनावों के लिए अधिक पारदर्शी और स्पष्ट कानूनी ढांचा तैयार करना है।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर फोकस
तीसरा प्रमुख प्रस्ताव कारोबारियों और निवेशकों के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने से जुड़ा है। इसमें मंजूरियों में देरी कम करने, अनावश्यक एनओसी और प्रमाणपत्रों को तर्कसंगत बनाने तथा स्व-प्रमाणन को बढ़ावा देने के उपाय शामिल हैं। पात्र व्यवसायों के लिए कुछ औपचारिकताओं पर तीन वर्ष की मोहलत देने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है।
होटल, होमस्टे, शिक्षा और स्वास्थ्य सहित विभिन्न क्षेत्रों को इसका लाभ मिल सकता है। निरीक्षण प्रक्रिया को भी समयबद्ध बनाने की योजना है, जिसके तहत संबंधित विभागों को, जहां लागू हो, 24 घंटे के भीतर निरीक्षण रिपोर्ट देने की व्यवस्था प्रस्तावित है।
तीनों विधेयक सरकार के कर सुधार, बेहतर शहरी प्रशासन, निवेश प्रोत्साहन, रोजगार सृजन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने के व्यापक एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे
