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जम्मू-कश्मीर वालों के लिए बड़ी खुशखबरी! लालफीताशाही पर चलेगी कैंची, सत्यापन से लाइसेंस तक काम होगा आसान

By Naveen NawazEdited By: Dallu Slathia
Published: Wed, 16 Sep 2026 01:53 PM (IST)

जम्मू-कश्मीर प्रशासन लालफीताशाही कम करने और सरकारी प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए नियमों की व्यापक समीक्षा कर रहा है। ...और पढ़ें

जम्मू-कश्मीर में सरकारी कामकाज होगा आसान। (AI Generated Image)

जम्मू-कश्मीर में सरकारी कामकाज होगा आसान। (AI Generated Image)

HighLights

  1. लालफीताशाही कम करने के लिए नियमों की समीक्षा।

  2. सत्यापन, पंजीकरण और लाइसेंसिंग प्रक्रिया होगी सरल।

  3. कुछ क्षेत्रों में सेल्फ रजिस्ट्रेशन का प्रस्ताव विचाराधीन।

नवीन नवाज, श्रीनगर जम्मू-कश्मीर में सरकारी कामकाज को आसान और तेज बनाने के लिए प्रशासन ने लालफीताशाही कम करने की दिशा में बड़ी कवायद शुरू कर दी है। नागरिकों, संस्थानों और कारोबारियों को सरकारी सेवाएं हासिल करने में आने वाली अनावश्यक प्रक्रियात्मक अड़चनों को दूर करने के लिए मौजूदा कानूनों और नियमों की व्यापक समीक्षा की जा रही है।

सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) की ओर से गठित समिति ने ऐसे प्रावधानों की पहचान शुरू कर दी है, जो पुराने, दोहराव वाले या जरूरत से ज्यादा जटिल हो चुके हैं।

यह समिति 27 मार्च 2026 को जारी सरकारी आदेश संख्या 490-जेके (जीएडी) के तहत गठित की गई थी। समिति का मुख्य उद्देश्य सरकारी सेवाओं में अनुपालन संबंधी बोझ कम करना और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना है।

बार-बार सत्यापन से मिलेगी राहत

समीक्षा में दस्तावेजों के सत्यापन की मौजूदा व्यवस्था को भी शामिल किया गया है। समिति ने जहां संभव हो, वहां बार-बार होने वाले सत्यापन और जांच के चरण कम करने का सुझाव दिया है। इससे सरकारी सेवाओं के लिए आवेदन करने वाले लोगों को कई स्तरों पर दस्तावेज जमा कराने और सत्यापन कराने की जरूरत कम हो सकती है।हालांकि, आवश्यक सुरक्षा उपायों और अनिवार्य सत्यापन मानकों से समझौता नहीं किया जाएगा। मकसद केवल उन प्रक्रियाओं को हटाना है, जिनसे काम में देरी होती है और जिनका दोहराव जरूरी नहीं है।

जन्म-मृत्यु पंजीकरण भी होगा सरल

जन्म और मृत्यु के पंजीकरण से जुड़े नियमों की भी समीक्षा की गई है। समिति ने ऐसे प्रक्रियात्मक प्रावधानों को हटाने की सिफारिश की है, जिन्हें अनावश्यक माना जा रहा है। इससे आम लोगों के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया कम जटिल और अधिक सुविधाजनक हो सकती है।

स्कूल संबद्धता के नियमों में बदलाव पर विचार

निजी और अन्य शिक्षण संस्थानों से जुड़ी स्कूल संबद्धता प्रक्रिया भी समीक्षा के दायरे में है। समिति ने संस्थानों के सामने आने वाली प्रक्रियात्मक कठिनाइयों को कम करने का सुझाव दिया है। इसके साथ ही शिक्षा की गुणवत्ता, मानकों और जवाबदेही से जुड़े जरूरी नियामकीय प्रावधानों को बनाए रखने पर जोर दिया गया है।

सरकारी शुल्क और लाइसेंस व्यवस्था भी जांच के घेरे में

सरकारी सेवाओं के लिए लिए जाने वाले शुल्क की भी समीक्षा की जा रही है। कुछ शुल्कों को तर्कसंगत बनाने और भुगतान प्रक्रिया को सरल करने की सिफारिश की गई है।

इसके अलावा, कुछ क्षेत्रों में कई स्तर की मंजूरी और लाइसेंस लेने की मौजूदा व्यवस्था के स्थान पर सेल्फ रजिस्ट्रेशन लागू करने का प्रस्ताव है। जहां यह व्यवस्था व्यावहारिक होगी, वहां इसे अपनाने पर विचार किया जा रहा है।

समिति ने लाइसेंस की वैधता को आवधिक शुल्क भुगतान से अलग करने और उपयुक्त मामलों में स्वतंत्र योग्य एजेंसियों से निरीक्षण कराने के प्रस्तावों पर भी विचार किया है।

पुराने कानून और नियम हो सकते हैं खत्म

समीक्षा के दौरान ऐसे कानूनों, नियमों और सरकारी प्रावधानों को भी चिन्हित किया गया है, जो तकनीकी बदलाव, नए कानूनों या प्रशासनिक व्यवस्था में परिवर्तन के कारण अप्रासंगिक हो चुके हैं। ऐसे प्रावधानों को निरस्त, संशोधित या शिथिल करने पर विचार किया जा सकता है।

डिजिटल व्यवस्था और समयबद्ध सेवाओं पर जोर

यह कवायद सरकार की कम्पलायंस रिडक्शन एण्ड डिरूग्युलेशन 2.0 पहल का हिस्सा है। मार्च में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा में डिजिटल गवर्नेंस, समयबद्ध सरकारी सेवाओं, एकीकृत लाइसेंस व्यवस्था और निजी शिक्षण संस्थानों के लिए सरल प्रक्रियाओं पर चर्चा हुई थी।

पब्लिक सर्विसेज गारंटी एक्ट के तहत ऑटो-अपील व्यवस्था और कानूनों, नियमों व सरकारी आदेशों के लिए केंद्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी बनाने के प्रस्ताव पर भी विचार किया गया।

सिफारिशों पर अंतिम फैसला बाद में

समिति की सिफारिशें अभी स्वतः लागू नहीं होंगी। किसी नियम या प्रावधान को हटाने, बदलने या शिथिल करने से पहले उसके कानूनी, प्रशासनिक और वित्तीय प्रभावों की जांच की जाएगी। गृह सचिव और मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली वरिष्ठ समितियां इन प्रस्तावों की समीक्षा करेंगी।

सरकार का लक्ष्य ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें नागरिकों को कम प्रक्रियाओं से गुजरना पड़े और डिजिटल माध्यमों के जरिए सरकारी सेवाएं अधिक तेजी और आसानी से उपलब्ध हो सकें