जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों की बदलेगी तस्वीर, गुजरात मॉडल से डिजिटल लैब तक... सरकार ने बताया पूरा मास्टर प्लान
जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों में बड़े सुधारों के चलते बोर्ड परीक्षाओं के नतीजों में 10% का उछाल आया है। सरकार ...और पढ़ें

जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों में 10% बढ़ा बोर्ड रिजल्ट। (फाइल फोटो)
HighLights
सरकारी स्कूलों के बोर्ड रिजल्ट में 10% की वृद्धि।
एस्ट्रो-लैब, वीआर और अटल टिंकरिंग लैब की स्थापना।
गुजरात मॉडल पर आधारित विद्या समीक्षा केंद्र का संचालन।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। 10वीं-12वीं के बोर्ड रिजल्ट में एक साल में 10 प्रतिशत का उछाल, 3008 डिजिटल लैब तैयार, 746 स्कूल क्लस्टर एक्टिव और गुजरात मॉडल पर बना कमांड सेंटर... ये किसी प्राइवेट एजुकेशन चेन का नहीं, जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों का सरकारी आंकड़ा है। सरकार ने विधानसभा में माना कि हां, स्कूल बदहाल थे, लेकिन अब तस्वीर बदलने के लिए जो मास्टर प्लान लागू हुआ है, वह राष्ट्रीय स्तर पर एक केस स्टडी बन सकता है।
विधानसभा में जम्मू पश्चिम के विधायक अरविंद गुप्ता के एक तीखे सवाल, क्या जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूल बदहाल इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं?, के जवाब में सरकार ने न सिर्फ सच्चाई स्वीकारी, बल्कि एक ऐसा रोडमैप पेश किया है जो राष्ट्रीय स्तर पर सरकारी शिक्षा की दशा-दिशा बदलने का मॉडल बन सकता है।
गुजरात मॉडल पर बना विद्या समीक्षा केंद्र
सरकार ने बताया कि नई शिक्षा नीति (एनइपी) 2020 के तहत यूटी कैपेक्स बजट और समग्र शिक्षा के जरिए व्यवस्थित सुधार किए जा रहे हैं। सबसे बड़ा कदम है विद्या समीक्षा केंद्र। गुजरात मॉडल की तर्ज पर बनाया गया यह कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर सितंबर 2024 से काम कर रहा है, जो डेटा के आधार पर फैसले लेगा और पढ़ाई के परिणाम सुधारेगा।
यही नहीं डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए आंकड़े चौंकाने वाले हैं। 3008 डिजिटल लैब जिनमें 1420 कंप्यूटर एडेड लर्निंग सेंटर सेंटर और 1588 सूचना और संचार प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला इंटरनेट सुविधा के साथ स्थापित हो चुकी हैं। इसके अलावा 2388 और सूचना और संचार प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला और 4597 स्मार्ट क्लासरूम बनने की प्रक्रिया में हैं।
बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि के लिए 376 आगाज लैब, एस्ट्रो फिजिक्स लैब (हर एजुकेशन जोन में 2) हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में बनाई गई हैं और 376 और बन रही हैं।
10 वर्चुअल रियलिटी लैब पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू
इसके अलावा प्रायोगिक शिक्षा के लिए 10 वर्चुअल रियलिटी लैब पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू हो चुकी हैं, जबकि 2026-27 में 30 और वर्चयुअल रियेलिटी लैब स्थापित होंगी।इनोवेशन के लिए 172 अटल टिंकरिंग लैब जिनमें 127 अटल इनोवेशन मिशन और 45 पीएम श्री के तहत पूरी हो चुकी हैं।
इसी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 500 और अटल टिंकरिंग लैब को नीति आयोग ने सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। 9वीं से 12वीं के छात्रों के लिए 2460 हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में वोकेशनल लैब के साथ स्किल एजुकेशन शुरू की गई है।
594 लेक्चरर की भर्ती और क्लस्टर सिस्टम
विषय-विशेष शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए सरकार ने फिलहाल अस्थायी और स्थायी दोतरफा रणनीति अपनाई है। सरकार ने कहा कि स्थायी नियुक्ति तक क्लस्टर रिसोर्स कोऑर्डिनेटर्स को विषय-विशेष शिक्षक के तौर पर तैनात किया जा रहा है, ताकि छात्र-शिक्षक अनुपात बना रहे। इन्हें समग्र शिक्षा के तहत हर साल संबंधित निदेशकों द्वारा नियुक्त किया जा रहा है।
स्थायी समाधान के लिए 594 (10 2) लेक्चरर के पद 37 विषयों में जेके पब्लिक सर्विस कमीशन (जेकेपीएससी) को भेजे गए थे। इसमें से 586 चयन हो चुके हैं और सीआइडी वेरिफिकेशन के बाद 327 उम्मीदवारों को नियुक्ति आदेश जारी कर दिए गए हैं। बाकी पदों को भी जल्द भरा जा रहा है।
सरकार ने कहा कि वह सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता, पहुंच और सीखने के माहौल को इतना मजबूत करना चाहती है कि माता-पिता, जिसमें सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं, खुद-ब-खुद सरकारी स्कूलों को अपनी पसंद बनाएं, किसी मजबूरी से नहीं। सरकार ने तर्क दिया कि किसी खास श्रेणी के स्कूल में दाखिला लेना माता-पिता की पसंद और बच्चे के शैक्षिक हित का मामला है और इसे अनिवार्य करने में संवैधानिक और कानूनी पहलुओं के साथ-साथ व्यापक नीतिगत विचार की जरूरत है।
... इसलिए 10 प्रतिशत उछला रिजल्ट
सरकार ने यह भी जानकारी दी कि जम्मू-कश्मीर में क्लस्टर और कंपोजिट स्कूल सिस्टम लागू हो रहा है। इसके तहत उठाए गए 6 बड़े कदम उठाए जा रहे हैं।
1. वार्षिक ट्रांसफर ड्राइव : 21 अगस्त 2026 को अधिसूचना संख्या 01-जेके(एजुकेशन) ऑफ 2026 के तहत एटीडी-2026 नोटिफाई किया गया है, ताकि शिक्षकों का समान वितरण हो और ट्रांसफर में पारदर्शिता आए।
2. क्लस्टर सिस्टम: प्रदेश में अब तक 746 क्लस्टर/स्कूल कॉम्प्लेक्स बनाए जा चुके हैं जो पूरी तरह से कार्यात्मक हैं।
3. डायनेमिक रिसोर्स शेयरिंग: गणित, विज्ञान, भाषा विशेषज्ञ और फिजिकल एजुकेशन टीचर जैसे शिक्षकों को एक ही क्लस्टर के भीतर साझा किया जा रहा है ताकि स्टाफ की कमी दूर हो सके।
4. बोर्ड रिजल्ट पर निगरानी: क्लस्टर हेड्स को प्रशासनिक और शैक्षणिक शक्तियां दी गई हैं। वे 10वीं और 12वीं के लिए एक समान प्री-बोर्ड परीक्षा और विशेष रेमेडियल क्लासेस करा रहे हैं। और इसका असर सीधे रिजल्ट पर दिखा है। जेकेबीओएसइ के आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि पिछले एक साल में पास प्रतिशत में लगभग 10 प्रतिशत का जबरदस्त उछाल आया है।
10वीं और 12वीं के रिजल्ट में बड़ी बढ़ोतरी
शिक्षा विभाग ने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि 10वीं कक्षा में 2024-25 में 145671 छात्रों में से 79.94 प्रतिशत पास हुए थे, जो 2025-26 में बढ़कर 86.36 प्रतिशत हो गया। 12वीं कक्षा में 2024-25 में 103308 छात्रों में से 75.95 प्रतिशत पास हुए थे, जो 2025-26 में बढ़कर 86.08 प्रतिशत हो गया, जबकि दाखिला भी बढ़कर 110044 हो गया।
