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जम्मू-कश्मीर में अब साइबर ठगों की खैर नहीं! सरकार ने बनाया सबसे पावरफुल सेंटर, जानिए क्या है JK4C

By Naveen Sharma Edited By: Rahul Sharma
Published: Sat, 18 Jul 2026 11:51 AM (IST)

जम्मू-कश्मीर सरकार ने साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने और डिजिटल खतरों से निपटने के लिए जम्मू-कश्मीर साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (जेके4सी) का गठन किया है।

जम्मू-कश्मीर में साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए बना जेके4सी।

जम्मू-कश्मीर में साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए बना जेके4सी।

HighLights

  1. साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने को जेके4सी गठित।

  2. केंद्र डीजीपी के अधीन, शेख जुनैद महमूद सीईओ नियुक्त।

  3. सभी 23 जिला साइबर थाने अब जेके4सी के तहत।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर सरकार ने साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने और तेजी से बढ़ते डिजिटल खतरों से निपटने के लिए बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। सरकार ने जम्मू-कश्मीर साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (जेके4सी) के गठन को मंजूरी देते हुए इसे प्रदेश में साइबर अपराधों की रोकथाम, जांच और समन्वय के लिए सर्वोच्च नोडल एजेंसी का दर्जा दिया है।

नई व्यवस्था के तहत यह केंद्र सीधे पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के अधीन कार्य करेगा, जबकि वर्तमान में आइजीपी का प्रभार संभाल रहे शेख जुनैद महमूद को इसका पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किया गया है।

नई व्यवस्था के तहत साइबर अपराधों की रोकथाम, जांच, खुफिया समन्वय और अभियोजन से जुड़े सभी कार्य अब एकीकृत कमान के तहत संचालित होंगे। सरकार का मानना है कि इससे ऑनलाइन ठगी, बैंकिंग फ्रॉड, हैकिंग, सोशल मीडिया अपराध और महिलाओं एवं बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों पर अधिक प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।

गृह विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जेके4सी एक स्वतंत्र संगठन के रूप में कार्य करेगा और इसका संचालन तथा समग्र नियंत्रण पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के अधीन रहेगा। यह केंद्र भारत सरकार के इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आई4सी) के साथ समन्वय स्थापित कर राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा ढांचे के अनुरूप काम करेगा।

23 जिला साइबर थाने अब एक ही कमांड में

सरकार ने जेके4सी के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के रूप में आइजीपी कैडर के अधिकारी शेख जुनैद महमूद की नियुक्ति की है। प्रशासनिक पुनर्गठन के तहत साइबर अपराध से जुड़े सभी विषयों को जम्मू-कश्मीर पुलिस के क्राइम विंग से अलग कर जेके4सी को सौंप दिया गया है। अब साइबर अपराधों से संबंधित समस्त कार्रवाई इसी केंद्र के माध्यम से संचालित होगी।

नई व्यवस्था के तहत प्रदेश के दोनों साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीआईसीई) तथा सभी 23 जिला साइबर पुलिस स्टेशन भी जेके4सी के अधीन कार्य करेंगे। इससे पूरे जम्मू-कश्मीर में साइबर अपराधों की जांच और कार्रवाई के लिए एकीकृत कमांड एवं समन्वित प्रणाली विकसित होगी।

सरकार ने जेके4सी के संगठनात्मक ढांचे, विभिन्न विंगों, कार्यप्रवाह और प्रशासनिक व्यवस्था को भी मंजूरी प्रदान कर दी है। स्थायी पदों के सृजन तक पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) मौजूदा पुलिस बल से आवश्यक अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती करेगा, ताकि केंद्र को शीघ्र पूरी क्षमता के साथ संचालित किया जा सके।

कई वरिष्ठ अधिकारियों को नई जिम्मेदारी

जेके4सी के गठन के साथ सरकार ने कई वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की तैनाती भी की है।

  • समीर शर्मा, जो सशस्त्र पुलिस जम्मू में डीआईजी के पद पर कार्यरत थे, को डीआईजी, जेके4सी नियुक्त किया गया है।
  • मोहम्मद यासीन किचलू, जो एसटीसी तलवाड़ा के प्राचार्य थे, को एसएसपी (प्रशासनिक विंग), जेके4सी बनाया गया है। उन्हें एसएसपी, साइबर ऑपरेशन्स विंग का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है।
  • रमनिश गुप्ता, जो सीआईसीई जम्मू में एसएसपी थे, अब एसएसपी, साइबर इन्वेस्टिगेशन विंग, जेके4सी की जिम्मेदारी संभालेंगे।
  • श्वेतांबरी शर्मा को एसपी, ऑनलाइन क्राइम अगेंस्ट वूमेन एंड चिल्ड्रेन (ओसीडब्ल्यूसी) विंग, जेके4सी नियुक्त किया गया है।

गृह विभाग ने आदेश में स्पष्ट किया है कि स्थानांतरित अधिकारियों का वेतन फिलहाल उनके वर्तमान आरक्षित पदों के विरुद्ध ही आहरित किया जाएगा। साथ ही सभी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नए पदों का कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, जेके4सी की स्थापना जम्मू-कश्मीर में साइबर सुरक्षा तंत्र को नई मजबूती देगी। इससे विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय, आधुनिक तकनीक आधारित जांच और साइबर अपराधों के त्वरित निस्तारण का मार्ग प्रशस्त होगा, जिससे आम नागरिकों को डिजिटल अपराधों से अधिक प्रभावी सुरक्षा मिल सकेगी।

जेके4सी बनने से प्रमुख लाभ

  • साइबर अपराधों की तेज जांच: एक समर्पित एजेंसी होने से मामलों का तेजी से निस्तारण होगा।
  • बेहतर समन्वय: पुलिस, केंद्रीय एजेंसियों और I4C के बीच सूचना साझा करने और कार्रवाई में तेजी आएगी।
  • मजबूत साइबर सुरक्षा: ऑनलाइन धोखाधड़ी, बैंक फ्रॉड, सोशल मीडिया अपराध और हैकिंग जैसे मामलों पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।
  • विशेषज्ञ जांच तंत्र: साइबर अपराधों की जांच के लिए प्रशिक्षित अधिकारियों और आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ेगा।
  • एकीकृत व्यवस्था: 23 जिला साइबर पुलिस स्टेशन और सीआइसीई एक ही कमान के तहत कार्य करेंगे, जिससे कार्रवाई अधिक प्रभावी होगी।
  • नागरिकों की बेहतर सुरक्षा: साइबर ठगी और डिजिटल अपराधों से लोगों को समय पर राहत और सुरक्षा मिल सकेगी।
  • राष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ाव: आइ4सी के साथ तालमेल के कारण आधुनिक साइबर अपराधों से निपटने में राष्ट्रीय स्तर की विशेषज्ञता और संसाधनों का लाभ मिलेगा।