जम्मू-कश्मीर बैंक का बड़ा कदम, अब कर्ज से होने वाले प्रदूषण का भी रखेगा हिसाब; जानिए क्या है पूरा मामला
जम्मू-कश्मीर बैंक ने एक साल में अपनी ऊर्जा खपत 4.5% और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन 6.1% कम किया है। अब बैंक ...और पढ़ें

जेके बैंक अब अपने कर्जों के पर्यावरणीय प्रभाव की करेगा पड़ताल। (फाइल फोटो)
HighLights
बैंक की ऊर्जा खपत में 4.5% की कमी आई।
ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 6.1% की गिरावट दर्ज।
कर्जों से होने वाले पर्यावरणीय असर का अब होगा आकलन।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर बैंक ने पर्यावरण के मोर्चे पर एक कदम आगे बढ़ाया है। बैंक की वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट बताती है कि एक साल में उसकी कुल ऊर्जा खपत 4.5 प्रतिशत कम हुई है। इसी अवधि में बैंक की अपनी गतिविधियों से जुड़ी ग्रीनहाउस गैसों में भी 6.1 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
बैंक ने पूरे साल में 153153 गीगाजूल ऊर्जा का इस्तेमाल किया। वहीं, प्रत्यक्ष और बिजली के इस्तेमाल से जुड़े उत्सर्जन को मिलाकर उसका ग्रीनहाउस गैस का फैलाव 22506.07 टन रहा।
सिर्फ दफ्तरों का प्रदूषण नहीं, असली सवाल कर्ज का
बैंक की रिपोर्ट का सबसे दिलचस्प हिस्सा सिर्फ ये घटते आंकड़े नहीं हैं। बैंक ने खुद माना है कि उसके पर्यावरण पर असर को समझने के लिए केवल अपनी शाखाओं, कार्यालयों और रोजमर्रा के कामकाज को देखना काफी नहीं होगा।
दरअसल, बैंक जिन कारोबारों, कंपनियों और परियोजनाओं को कर्ज देता है, उनके कामकाज का पर्यावरण पर कितना असर पड़ता है, यह भी महत्वपूर्ण है। मसलन, किसी बड़े कारोबार को दिया गया कर्ज ऐसी गतिविधि में इस्तेमाल होता है जिससे ज्यादा प्रदूषण होता है, तो उसका असर बैंक की पर्यावरणीय तस्वीर पर भी पड़ सकता है। इसी को बैंक ने कर्ज के जरिए होने वाले कार्बन प्रदूषण के रूप में सामने रखा है।
अब कर्ज से पैदा होने वाले असर का भी हिसाब होगा
बैंक का कहना है कि आने वाले समय में वह अलग-अलग क्षेत्रों में दिए गए कर्ज से जुड़े पर्यावरणीय असर का आकलन धीरे-धीरे करेगा। इसके लिए वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल होने वाली पीसीएएफ जैसी पद्धति का सहारा लेने की तैयारी कर रहा है।
इसका सीधा मतलब है कि बैंक अब सिर्फ यह नहीं देखेगा कि उसकी अपनी शाखाओं में कितनी बिजली खर्च हुई या कितना प्रदूषण हुआ। वह यह समझने की कोशिश भी करेगा कि उसके पैसे से चल रही आर्थिक गतिविधियों का पर्यावरण पर कितना असर पड़ रहा है।
हालांकि बैंक ने यह भी स्पष्ट किया है कि वित्त वर्ष 2025-26 में उसने ग्रीनहाउस गैसों को कम करने के लिए कोई विशेष परियोजना शुरू नहीं की और न ही कार्बन क्रेडिट खरीदे या बनाए।
फिलहाल बैंक का जोर ऐसे सिस्टम तैयार करने पर है, जिनसे कार्बन प्रदूषण का सही आंकड़ा जुटाया जा सके और पर्यावरण से जुड़े जोखिमों को बेहतर तरीके से समझा जा सके।
