वर्षों पुरानी परंपरा बदली, हाथापाई की नौबत और फर्श पर लेटे विधायक; जम्मू-कश्मीर विधानसभा के पहले दिन क्या-क्या हुआ?
जम्मू-कश्मीर विधानसभा के शरदकालीन सत्र के पहले दिन वर्षों पुरानी परंपरा बदली, जहां श्रद्धांजलि के बाद भी विधायी कामकाज जारी ...और पढ़ें

भाजपा विधायक वेल में धरने पर बैठे, एक विधायक विरोध में लेट गए। (फाइल फोटो)
HighLights
सदन में श्रद्धांजलि के बाद भी विधायी कामकाज जारी रहा।
बिजली दरों, कर्मचारियों के मुद्दों पर भाजपा ने जोरदार विरोध किया।
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जम्मू-कश्मीर के राज्य का दर्जा मांगा।
नवीन नवाज, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर विधानसभा के शरदकालीन सत्र का पहला दिन सोमवार को संसदीय परंपरा में बदलाव और तीखे राजनीतिक टकराव, दोनों का गवाह बना। दिवंगत पूर्व मंत्रियों और विधायकों को श्रद्धांजलि देने के बाद पहली बार सदन को पूरे दिन के लिए स्थगित करने के बजाय प्रश्नकाल शुरू कर नियमित विधायी कामकाज आगे बढ़ाया गया, लेकिन कार्यवाही शुरू होते ही बिजली दरों में बढ़ोतरी, दैनिक वेतनभोगियों और एनएचएम कर्मियों के नियमितीकरण तथा आउटसोर्सिंग के मुद्दे पर भाजपा सदस्यों के विरोध ने सदन का माहौल गरमा दिया।
जवाब में सत्तारूढ़ नेशनल कान्फ्रेंस के सदस्यों ने राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग उठाई। करीब 50 मिनट तक चले हंगामे में भाजपा विधायक वेल में धरने पर बैठे, एक विधायक विरोध में लेट गए और कांग्रेस विधायक हाफिज लोन तथा निर्दलीय शब्बीर कूले की भाजपा सदस्यों के साथ हाथापाई की नौबत आ गई। मार्शलों के हस्तक्षेप से स्थिति संभली, जबकि शोर-शराबे के बीच भी प्रश्नकाल और निर्धारित विधायी कामकाज चलता रहा।
पूर्व मंत्रियों-विधायकों के निधन पर शोक संदर्भ
विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने सुबह करीब 10 बजे सदन की कार्यवाही शुरू करते हुए पूर्व मंत्रियों एवं विधायकों डॉ. शेख मुस्तफा कमाल, धरम पाल और गुलाम हसन खान के निधन पर शोक संदर्भ पढ़ा। उन्होंने दिवंगत नेताओं के राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन में योगदान का उल्लेख किया। इसके बाद सदस्यों ने दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी।
इसके साथ ही इस बार की कार्यवाही ने पिछली व्यवस्था से अलग रुख ले लिया। सामान्य तौर पर किसी पूर्व सदस्य के निधन पर शोक संदर्भ और श्रद्धांजलि के बाद सदन की बैठक पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी जाती थी। सोमवार को ऐसा नहीं हुआ। मौन के तुरंत बाद प्रश्नकाल शुरू हुआ और विधानसभा की नियमित कार्यवाही आगे बढ़ी।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का सुझाव
यह बदलाव पूरी तरह अचानक नहीं था। पिछले शरदकालीन सत्र में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने संसद की प्रक्रिया का हवाला देते हुए शोक संदर्भ को संक्षिप्त रखने और उसके बाद विधायी कामकाज जारी रखने का सुझाव दिया था। सोमवार को विधानसभा में इसी प्रकार की व्यवस्था देखने को मिली।
श्रद्धांजलि के बाद राजनीतिक टकराव
हालांकि श्रद्धांजलि के बाद सदन का कामकाज शुरू होते ही राजनीतिक टकराव सामने आ गया। प्रश्नकाल आरंभ होते ही भाजपा विधायक बिजली दरों में बढ़ोतरी, दैनिक वेतनभोगियों और एनएचएम कर्मचारियों के नियमितीकरण तथा आउटसोर्सिंग नियुक्तियों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। हाथों में पोस्टर और तख्तियां लिए कई सदस्य वेल में पहुंच गए।
BJP के सदस्य अध्यक्ष के आसन के सामने धरने पर बैठे
भाजपा सदस्यों ने बिजली शुल्क में बढ़ोतरी वापस लेने और कर्मचारियों की सेवाएं नियमित करने की मांग उठाई। इस दौरान 'भारत माता की जय', 'जो सरकार निकम्मी है-वह सरकार निठल्ली है' और 'एक धक्का और दो' जैसे नारे लगाए गए। भाजपा विधायक सतीश शर्मा विरोध में सदन में लेट गए और कई सदस्य अध्यक्ष के आसन के सामने धरने पर बैठ गए।
भाजपा के विरोध के बीच सत्तारूढ़ नेशनल कान्फ्रेंस के सदस्यों ने जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग उठाई। 'स्टेटहुड बहाल करो' के नारे लगे। माकपा विधायक मोहम्मद यूसुफ तारिगामी ने भी राज्य का दर्जा बहाल करने का मुद्दा उठाया, जबकि कांग्रेस सदस्यों ने पेपर लीक समेत अन्य मुद्दों को लेकर भाजपा पर निशाना साधा।
तीखी नोकझोंक के बाद हाथापाई की नौबत
राजनीतिक तनातनी के बीच कुछ सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक हुई और हाथापाई की नौबत तक पहुंच गई। मार्शलों के हस्तक्षेप के बाद स्थिति संभाली गई। विधानसभा अध्यक्ष ने सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटने और संसदीय प्रक्रिया के तहत मुद्दे उठाने की अपील की।
विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने कई बार प्रदर्शन कर रहे विधायकों से अपनी सीटों पर लौटने की अपील की और कार्रवाई की चेतावनी दी। उन्होंने कहा, 'अपनी सीटों पर जाएं।' हालांकि,भाजपा विधायक वेल में ही डटे रहे और नारेबाजी जारी रखी।
नेकां विधायक का भाजपा पर समय बर्बाद करने का आरोप
हंगामे के बीच नेकां विधायक नजीर गुरेजी ने भाजपा नेताओं पर सदन का समय बर्बाद करने का आरोप लगाया। उन्होंने अध्यक्ष से कहा कि भाजपा को यहां के बजाय दिल्ली में विरोध प्रदर्शन करना चाहिए।
उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने आरोप लगाया कि भाजपा जम्मू-कश्मीर के लोगों से जुड़े मुद्दों को सरकार द्वारा हल किए जाने की प्रक्रिया में बाधा डालना चाहती है। उन्होंने कहा, 'अगर वे जम्मू-कश्मीर के लोगों के प्रति ईमानदार हैं, तो उन्हें सरकार के जवाब सुनने चाहिए। सरकार जवाब देने के लिए तैयार है।'
हंगामे के बीच JJM रिपोर्ट सदन में पेश
हंगामे के बावजूद सदन की निर्धारित कार्यवाही चलती रही। जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए गठित समिति की रिपोर्ट न्यायमूर्ति हसनैन मसूदी ने सदन के पटल पर रखी। इसके बाद कृषि एवं सहकारिता मंत्री जावेद अहमद डार ने जम्मू-कश्मीर सहकारी समितियां अधिनियम, 1989 में संशोधन से संबंधित विधेयक पेश किया।
सदन की कार्यवाही स्थगित
विधेयक पेश किए जाने के बाद अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही मंगलवार सुबह 10 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
इस सत्र के साथ विधानसभा ने डिजिटल कार्यवाही की दिशा में भी एक नया कदम उठाया है। यह जम्मू-कश्मीर विधानसभा का पहला पेपरलेस सत्र है और कार्यवाही नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन के माध्यम से संचालित की जा रही है।
