क्या घाटी लौटेंगे कश्मीरी हिंदू? विधानसभा में आज निजी बिल पर होगी बहस, वापसी के साथ मेल-मिलाप पर भी जोर
कश्मीरी हिंदुओं की घाटी में सम्मानजनक वापसी और पुनर्वास के लिए विधानसभा में 'द कश्मीरी पंडित एंड माइग्रेंट री-इंटीग्रेशन बिल, ...और पढ़ें

कश्मीरी हिंदुओं की वापसी के लिए विधानसभा में निजी विधेयक। (फाइल फोटो)
HighLights
विधानसभा में कश्मीरी हिंदुओं की वापसी पर निजी विधेयक पेश।
विधेयक में पुनर्वास और पुनर्एकीकरण आयोग के गठन का प्रस्ताव।
सामाजिक मेल-मिलाप और सांस्कृतिक विरासत संरक्षण पर जोर।
नवीन नवाज, श्रीनगर। आतंकियों द्वारा कश्मीर से खदेड़े गए कश्मीरी हिंदुओं की घाटी में सम्मानजनक और सुरक्षित वापसी और उनके पुनर्वास का मुद्दा आज विधानसभा में फिर से उठेगा। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने इस मुद्दे पर निजि बिल 'द कश्मीरी पंडित एंड माइग्रेंट री-इंटीग्रेशन बिल, 2026’ लाया है जो सदन की कार्यवाही में शामिल है।
यह निजी सदस्य विधेयक कश्मीरी हिंदुओं समेत विस्थापित कश्मीरी प्रवासियों की सुरक्षित, स्वैच्छिक, सम्मानजनक और टिकाऊ वापसी तथा पुनःएकीकरण के लिए एक वैधानिक आयोग गठित करने का प्रस्ताव रखता है।
विधेयक में प्रस्तावित जम्मू-कश्मीर री-इंटीग्रेशन कमीशन को केवल राहत और पुनर्वास तक सीमित रखने के बजाय सामाजिक मेल-मिलाप, समुदायों के बीच संवाद, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, मानसिक स्वास्थ्य एवं आघात से उबरने, आवास और आजीविका से जुड़े उपायों के समन्वय की जिम्मेदारी देने की बात कही गई है।
प्रस्ताव में कश्मीरी हिंदुओं और कश्मीरी मुस्लिम समाज के बीच संरचित संवाद तथा साझा इतिहास और बहुलतावादी विरासत को बढ़ावा देने का भी उल्लेख है।
विधेयक की अहमियत
इस प्रस्ताव की अहमियत इस मायने में है कि यह कश्मीरी हिंदुओं के विस्थापन के प्रश्न को केवल राहत और पुनर्वास के बजाय दीर्घकालिक पुनःएकीकरण और सामाजिक मेल-मिलाप के नजरिये से देखने का प्रयास करता है। निजी विधेयक के जरिए पहली बार इस मुद्दे के लिए एक स्थायी वैधानिक संस्थागत ढांचे पर विधानसभा में बहस की जमीन तैयार होती है।
विधेयक में मौजूदा राहत-केंद्रित व्यवस्था से आगे बढ़कर वापसी को सुरक्षा, सम्मान, सामाजिक स्वीकार्यता और सांस्कृतिक निरंतरता से जोड़ने का प्रस्ताव है।
सरकार का संभावित रुख क्या हो सकता है?
सरकार का रुख फिलहाल स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया है। हालांकि, विधानसभा में पहले निजी सदस्य विधेयकों के मामले में सरकार ने कुछ प्रस्तावों को परिचर्चा के लिए आगे बढ़ने देने का रुख अपनाया है। मार्च 2026 में 33 निजी विधेयकों को पेश करने के लिए उपराज्यपाल की सहमति मिली थी, जबकि बाद में कुछ विधेयकों को चर्चा के लिए अनुमति मिली।
सरकार इस विधेयक के मूल उद्देश्य कश्मीरी हिंदुओं की सम्मानजनक वापसी और पुनःएकीकरण का समर्थन करते हुए, इसके प्रावधानों, वित्तीय प्रभाव, प्रस्तावित आयोग की शक्तियों और मौजूदा राहत एवं पुनर्वास तंत्र के साथ उसके संबंध पर विस्तृत विचार की मांग कर सकती है।
यदि विधेयक पर सरकारी खर्च का प्रावधान बनता है तो जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के तहत वित्तीय मामलों में उपराज्यपाल की सिफारिश भी प्रासंगिक होगी।
मुंतजिर मेहदी ने कहा है कि यह केवल विधायी मुद्दा नहीं, बल्कि गरिमा, अपनत्व और मेल-मिलाप से जुड़ा मानवीय प्रश्न है और विधानसभा को इस पर बिना देरी के सामूहिक चर्चा शुरू करनी चाहिए
