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क्या पुराने शिक्षकों को TET से मिलेगी छूट? जम्मू-कश्मीर विधानसभा में प्रस्ताव पारित, अब केंद्र के पाले में मामला

Published: Thu, 24 Sep 2026 06:58 PM (IST)

जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने 31 अक्टूबर 2019 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट देने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित ...और पढ़ें

पुराने शिक्षकों को TET से छूट के लिए केंद्र से RTE एक्ट में संशोधन की मांग। (फाइल फोटो)

पुराने शिक्षकों को TET से छूट के लिए केंद्र से RTE एक्ट में संशोधन की मांग (फाइल फोटो)

HighLights

  1. 31 अक्टूबर 2019 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट।

  2. केंद्र से आरटीई एक्ट में संशोधन की अपील की गई।

  3. एनसीटीई के जरिए अधिसूचना जारी करने का आग्रह किया गया।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने गुरुवार को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीइटी) को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 31 अक्टूबर 2019 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीइटी से छूट देने की मांग वाला प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिया। शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव में केंद्र सरकार से शिक्षा के अधिकार (आरइटी) अधिनियम, 2009 की धारा 23 में आवश्यक वैधानिक संशोधन करने की मांग की गई है।

प्रस्ताव में केंद्र सरकार से कहा गया है कि 31 अक्टूबर 2019 से पहले नियुक्त सभी शिक्षकों को टीइटी में शामिल होने की अनिवार्यता से बाहर रखा जाए। इसके साथ ही केंद्र से इस संबंध में आवश्यक कानूनी कदम उठाने और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीइ) के माध्यम से जरूरी अधिसूचना जारी करने का भी आग्रह किया गया।

दरअसल, यह प्रस्ताव मंगलवार को सदन में पेश किया गया था लेकिन कई विधायकों के चर्चा में हिस्सा लेने की इच्छा के बाद इसे आज वीरवार तक के लिए टाल दिया गया। आज हुई चर्चा के बाद विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने प्रस्ताव को ध्वनिमत से सदन में पारित घोषित किया।

शिक्षकों के अनुभव और प्रशिक्षण पर भी चर्चा

चर्चा के दौरान नेशनल कॉन्फ्रेंस विधायक फारूक शाह ने कहा कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को टीइटी से छूट मिलनी चाहिए जबकि नए नियुक्त शिक्षकों के लिए परीक्षा की व्यवस्था रखी जा सकती है। उन्होंने साथ ही सेवारत शिक्षकों के नियमित प्रशिक्षण और प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) संस्थानों को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।

विधायक नजीर अहमद गुरेजी ने भी प्रस्ताव का समर्थन किया। उन्होंने शिक्षकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि वे ऐसे विद्यार्थियों को तैयार करते हैं, जो आगे चलकर डॉक्टर, इंजीनियर और प्रशासनिक सेवाओं में जाते हैं। चर्चा में दूरदराज के क्षेत्रों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी जैसी व्यावहारिक चुनौतियों का मुद्दा भी सामने आया।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद क्यों बढ़ा मुद्दा?

टीइटी का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद महत्वपूर्ण हुआ, जिसमें आरटीइ के दायरे में आने वाले शिक्षकों के लिए टीइटी को न्यूनतम योग्यता के तौर पर अनिवार्य माना गया। बाद में मई 2026 में शीर्ष अदालत ने टीइटी योग्यता हासिल करने की समयसीमा 31 अगस्त 2028 तक बढ़ाई और परीक्षाएं नियमित रूप से, संभव हो तो साल में दो बार आयोजित करने की बात कही।

शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू ने विधानसभा में कहा कि जम्मू-कश्मीर सरकार इस मामले को पहले ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष उठा चुकी है। उन्होंने भाजपा सदस्यों से केंद्र के समक्ष इस विषय को रखने की अपील भी की। उनके अनुसार, सरकार की आपत्ति शिक्षकों के परीक्षा देने की क्षमता को लेकर नहीं, बल्कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के संदर्भ में है।

शिक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि इस प्रस्ताव के पारित होने के बाद जम्मू-कश्मीर ऐसा प्रस्ताव पारित करने वाला दूसरा केंद्र शासित प्रदेश बनेगा। अब विधानसभा के इस प्रस्ताव के बाद गेंद केंद्र सरकार के पाले में है। क्योंकि आरटीइ एक्ट केंद्रीय कानून है, इसलिए धारा 23 में बदलाव और उससे जुड़ी वैधानिक प्रक्रिया केंद्र स्तर पर ही आगे बढ़ेगी।