क्या डेली वेजर्स पक्के होंगे, किसे मिलेगी 5 मरला जमीन? 25 सितंबर को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में उठेंगे ये बड़े सवाल
जम्मू-कश्मीर विधानसभा के शरदकालीन सत्र में 70 में से सात निजी सदस्य प्रस्तावों को चर्चा के लिए चुना गया है। ...और पढ़ें

नौकरी, पानी से पार्किंग तक 25 सितंबर को विधानसभा में बड़ा मंथन। (फाइल फोटो)
HighLights
दैनिक वेतनभोगियों के नियमितीकरण पर 25 सितंबर को होगी बहस।
रोजगार नीति, भूमि आवंटन और जल संसाधनों पर भी प्रस्ताव।
श्रीनगर मास्टर प्लान और जम्मू पार्किंग योजना भी एजेंडे में।
नवीन नवाज, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर विधानसभा के शरदकालीन सत्र में निजी सदस्यों के प्रस्तावों का दायरा भले ही सात तक सिमट गया हो, लेकिन इन सात प्रस्तावों में सरकार के सामने खड़े कई बड़े जनसरोकार समा गए हैं। सबसे अहम मुद्दों में दैनिक वेतनभोगी और अन्य अस्थायी कर्मियों के नियमितीकरण का सवाल है।
भाजपा विधायक पवन कुमार गुप्ता ने दैनिक वेतनभोगी, कैजुअल, एनवाईसी और मिड-डे मील कर्मियों समेत समान श्रेणी के कर्मचारियों के लिए एक समान नियमितीकरण नीति बनाने और उसे निश्चित समयसीमा में अधिसूचित करने की मांग की है। इस प्रस्ताव पर 25 सितंबर को सदन में बहस होगी।
विधानसभा सचिवालय ने शुक्रवार को बैलेटिंग के जरिए निजी सदस्य प्रस्तावों में से सात को चर्चा के लिए चुना। इन सात में नेकां के तीन, भाजपा के दो और कांग्रेस के दो प्रस्ताव हैं। पीडीपी, छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों का कोई प्रस्ताव इस बार चयनित सूची में नहीं है। इससे निजी सदस्यों के कामकाज के लिए निर्धारित दिन की राजनीतिक तस्वीर भी काफी हद तक साफ हो गई है।
मुद्दे सात, सवाल बड़े
इन प्रस्तावों में सबसे सीधा सवाल सरकार की कर्मचारी नीति से जुड़ा है। पवन गुप्ता का प्रस्ताव ऐसे कर्मियों के नियमितीकरण के लिए व्यापक और समान नीति चाहता है, जो विभिन्न विभागों और सरकारी एजेंसियों में लंबे समय से अस्थायी आधार पर काम कर रहे हैं।
यह मुद्दा इसलिए भी अहम है क्योंकि सत्र से पहले दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के संगठनों ने नियमितीकरण, लंबित वेतन और मजदूरी दर बढ़ाने की मांग को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ाया है। एक कर्मचारी संगठन ने 22 सितंबर को श्रीनगर में प्रदर्शन का भी ऐलान किया है।
इसके साथ ही रोजगार का सवाल भी सीधे सदन के एजेंडे में है। नेकां विधायक और पूर्व मंत्री मीर सैफुल्लाह ने जम्मू-कश्मीर के लिए व्यापक रोजगार नीति बनाने का प्रस्ताव रखा है। इसमें हर वर्ष रोजगार सृजन के मापनीय लक्ष्य और रिक्त पदों पर पारदर्शी तथा समयबद्ध भर्ती व्यवस्था की मांग की गई है। रोजगार और आउटसोर्सिंग पहले से ही विपक्ष की प्रस्तावित विधानसभा बहस के प्रमुख मुद्दों में हैं।
पांच मरला जमीन और लोलाब-बांडीपोरा सुरंग
कांग्रेस विधायक इरफान हाफिज लोन ने बेघर परिवारों को पांच मरला सरकारी जमीन देने के लिए नीति बनाने का प्रस्ताव रखा है। वहीं नेकां विधायक कैसर जमशेद लोन ने लोलाब-बांडीपोरा सुरंग के निर्माण में तेजी लाने की मांग की है। दोनों प्रस्ताव क्रमश: आवास और दूरदराज क्षेत्रों की कनेक्टिविटी जैसे सीधे जनजीवन से जुड़े सवालों को सदन में लाते हैं।
श्रीनगर के मास्टर प्लान पर सवाल
नेकां विधायक सलमान सागर ने फाक और ग्रामीण ब्लॉक हरवन को श्रीनगर मास्टर प्लान से बाहर करने का प्रस्ताव रखा है। प्रस्ताव का उद्देश्य इन इलाकों के निवासियों पर लागू नियोजन संबंधी प्रतिबंधों को कम करना है। यह मामला शहरी नियोजन बनाम ग्रामीण आबादी की जरूरतों के सवाल को विधानसभा में ला सकता है।
जम्मू की पार्किंग और पानी भी बहस में
भाजपा विधायक युद्धवीर सेठी ने जम्मू ईस्ट के लिए समयबद्ध पार्किंग मास्टर प्लान की मांग की है। इसमें बाजारों, व्यावसायिक केंद्रों, प्रमुख चौराहों और रिहायशी क्षेत्रों को शामिल करने का प्रस्ताव है।
बांडीपोरा के कांग्रेस विधायक निजाम-उद-दीन भट ने 2027-28 को ‘जल संसाधनों की पुनर्प्राप्ति का वर्ष’ घोषित करने की मांग की है। प्रस्ताव में आर्द्रभूमियों और जल निकायों के पुनर्स्थापन पर जोर दिया गया है।
सात प्रस्ताव, सीमित समय और बड़ी बहस
विधानसभा का शरदकालीन सत्र 21 सितंबर से शुरू होगा। सचिवालय के कैलेंडर के अनुसार 25 सितंबर को निजी सदस्य प्रस्तावों के लिए निर्धारित किया गया है। सत्र में निजी सदस्यों के विधेयकों और प्रस्तावों के लिए सीमित समय है। इससे चयनित सात प्रस्तावों पर बहस के दौरान उठने वाले सवाल और सरकार के जवाब खास महत्व रखते हैं।
दिलचस्प यह है कि सत्र से पहले सचिवालय को निजी सदस्य प्रस्तावों की संख्या को लेकर अलग-अलग चरणों में अलग आंकड़े सामने आए हैं—7 सितंबर की रिपोर्ट में करीब 50 प्रस्ताव मिलने की बात कही गई थी, जबकि अब सात प्रस्ताव बैलेटिंग के बाद चर्चा के लिए चुने गए हैं। नियमों के तहत सात प्रस्तावों का चयन ड्रॉ ऑफ लॉट्स से किया जाता है।
इस लिहाज से 25 सितंबर की बहस सिर्फ सात प्रस्तावों की औपचारिक चर्चा नहीं होगी। नियमितीकरण और रोजगार से लेकर जमीन, सुरंग, मास्टर प्लान, पार्किंग और जल संसाधनों तक, ये वे मुद्दे हैं जिन पर सरकार को सदन के भीतर अपनी नीति और प्राथमिकताओं को स्पष्ट करना होगा।
