21 साल में नहीं बना सेब का पैक-हाउस, अब केंद्र ने प्रोजेक्ट रद किया; जम्मू-कश्मीर से मांगे ₹4.16 करोड़
जम्मू-कश्मीर में सेब उत्पादकों के लिए 21 साल से अधूरी आधुनिक पैक-हाउस परियोजना के कारण केंद्र सरकार ने 1.42 करोड़ रुपये पर ब्याज सहित 4.16 करोड़ रुपये वापस मांगे हैं।

सेब उत्पादकों की महत्वाकांक्षी परियोजना 21 साल से अधर में। (फाइल फोटो)
HighLights
सेब पैक-हाउस परियोजना 21 साल से अधर में लटकी।
केंद्र ने 4.16 करोड़ रुपये की वापसी की मांग की।
एपीडा ने 2005 में 1.42 करोड़ रुपये जारी किए थे।
राज्य ब्यूरो, जम्मू। जम्मू-कश्मीर में सरकारें बदलती रहीं, लेकिन सेब उत्पादकों को आधुनिक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे हकीकत में नहीं बदल सके। इसका ताजा उदाहरण सेब की ग्रेडिंग, पैकिंग और भंडारण के लिए प्रस्तावित एकीकृत पैक-हाउस परियोजना है, जो केंद्र से वित्तीय सहायता मिलने के 21 साल बाद भी शुरू नहीं हो सकी। अब केंद्र सरकार ने परियोजना के लिए जारी 1.42 करोड़ रुपये की राशि पर 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज जोड़कर कुल 4.16 करोड़ रुपये वापस करने की मांग की है। सरकारी उदासीनता का खामियाजा अब सरकारी खजाने को भी भुगतना पड़ सकता है।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने 28 सितंबर, 2005 को जम्मू-कश्मीर बागवानी उत्पाद विपणन एवं प्रसंस्करण निगम (जेकेएचपीएमसी) को 1.42 करोड़ रुपये जारी किए थे। परियोजना की कुल अनुमानित लागत 3.88 करोड़ रुपये थी।
इसका उद्देश्य सेब उत्पादों की ग्रेडिंग, पैकिंग और भंडारण के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित करना था, ताकि कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम कर उत्पादकों को बेहतर बाजार मूल्य मिल सके।
पुरानी पड़ गई पैक-हाउस की तकनीक
सूत्रों के अनुसार, जेकेएचपीएमसी की ओर से बताई गई कठिनाइयों के चलते एपीडा ने परियोजना की समय-सीमा कई बार बढ़ाई। जून 2022 में अंतिम बार अवधि बढ़ाने के बावजूद काम शुरू नहीं हुआ।
लंबी देरी, लागत में वृद्धि और प्रस्तावित पैक-हाउस की तकनीक पुरानी पड़ जाने के कारण एपीडा ने 15 जुलाई, 2005 के समझौता ज्ञापन और 22 जुलाई, 2005 के आईपीए को रद्द करने का निर्णय लिया।
10% सालाना ब्याज के साथ 4.16 करोड़ रुपये की देनदारी
सामान्य वित्तीय नियम (जीएफआर), 2017 के नियम 231 का हवाला देते हुए जारी राशि पर 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लगाया गया है। दस्तावेजों के मुताबिक, मूल धन और ब्याज मिलाकर कुल देय राशि 4,16,21,680 रुपये है।
केंद्र की ओर से वसूली के लिए कई बार पत्र भी भेजे गए, लेकिन जवाब नहीं मिला। एपीडा अध्यक्ष के कार्यालय ने 11 सितंबर, 2023 और वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव ने 31 जनवरी, 2024 को इस संबंध में पत्र भेजे थे।
मंत्री जावेद डार ने जांच का दिया भरोसा
इस मामले ने बागवानी क्षेत्र को आधुनिक सुविधाएं देने के सरकारी दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कृषि एवं बागवानी मंत्री जावेद अहमद डार ने दैनिक जागरण से बातचीत में कहा कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। वह इसकी जांच कराएंगे। उन्होंने संभावना जताई कि मामला उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के अधीन हो सकता है।
