जम्मू-कश्मीर के किसानों के लिए राहत की खबर, मौसम आधारित फसल बीमा की तैयारी पूरी; बस केंद्र की मुहर बाकी
जम्मू-कश्मीर सरकार ने सेब उत्पादकों को मौसम आधारित फसल बीमा योजना (WBCIS) का लाभ देने की तैयारी पूरी कर ली ...और पढ़ें

जम्मू-कश्मीर के सेब उत्पादकों को मिलेगी मौसम आधारित फसल बीमा सुरक्षा। (फाइल फोटो)
HighLights
सेब उत्पादकों के लिए WBCIS लागू करने की तैयारी पूरी।
केंद्र सरकार के संशोधित दिशानिर्देशों का इंतजार किया जा रहा है।
योजना से मौसम संबंधी नुकसान से वित्तीय सुरक्षा मिलेगी।
नवीन नवाज, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के सेब उत्पादकों को ओलावृष्टि, भारी बारिश और अन्य मौसम संबंधी आपदाओं से होने वाले नुकसान से वित्तीय सुरक्षा देने के लिए सरकार ने मौसम आधारित फसल बीमा योजना (WBCIS) लागू करने की तैयारी पूरी कर ली है। कृषि उत्पादन मंत्री जावेद अहमद डार ने विधानसभा में कहा कि योजना से संबंधित सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं। फिलहाल केंद्र सरकार द्वारा योजना के नियमों में किए जा रहे संशोधन के कारण इसका क्रियान्वयन रोक दिया गया है। केंद्र से संशोधित दिशानिर्देश मिलते ही योजना को लागू कर दिया जाएगा।
डार ने बताया कि भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने WBCIS के संबंध में एक सलाहकार समिति गठित की थी। समिति द्वारा रिपोर्ट सौंपे जाने की जानकारी सरकार को मिली है। अब केंद्र की अंतिम सूचना और आगे के निर्देशों की प्रतीक्षा है।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर के फल उत्पादकों को मौसम की अनिश्चितता से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाना है। केंद्र के नए दिशानिर्देश जारी होते ही इस दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
12.89 लाख किसानों को PMFBY का कवच
जम्मू-कश्मीर में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत अब तक 12,89,917 किसानों को बीमा कवर मिल चुका है। योजना के तहत 6,86,741.37 हेक्टेयर क्षेत्र बीमित किया गया है। अब तक 3,72,134 दावे दर्ज किए गए हैं, जिनकी कुल राशि लगभग 221.71 करोड़ रुपये है।
मंत्री ने बताया कि PMFBY प्रदेश के सभी 20 जिलों में लागू है। करीब 13.985 लाख किसान परिवार योजना के लिए पात्र हैं। यह योजना मांग आधारित है और पात्र किसानों की संख्या पर कोई सीमा निर्धारित नहीं है।
आधार और बैंक संबंधी खामियों से अटके दावे
लंबित बीमा दावों के निपटारे के लिए विभाग विशेष अभियान चला रहा है। मंत्री के अनुसार, आधार सत्यापन नहीं होना, बैंक खाते बंद होना, आधार का NPCI मैपर से लिंक नहीं होना तथा बैंक खाते ब्लॉक या फ्रीज होना लंबित दावों के प्रमुख कारण हैं।
विभाग करीब 60 प्रतिशत प्रभावित किसानों से संपर्क कर चुका है। दस्तावेज जुटाकर सत्यापन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
बागवानी से 35 लाख लोगों की आजीविका
जम्मू-कश्मीर की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बागवानी क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। मंत्री के अनुसार, करीब 35 लाख लोग और 7.5 लाख परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बागवानी से जुड़े हैं।
प्रदेश की जीडीपी में बागवानी का योगदान करीब 10 प्रतिशत है, जबकि इससे सालाना लगभग 12,000 करोड़ रुपये की आय होती है। एक हेक्टेयर बाग से सालाना करीब 400 मानव-दिवस रोजगार मिलता है।
फल ढुलाई के लिए काजीगुंड में कंट्रोल रूम
पीक फल सीजन में यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए काजीगुंड में कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। सरकार जरूरत के अनुसार मुगल रोड को भी वैकल्पिक मार्ग के रूप में इस्तेमाल कर रही है।
अनंतनाग और बडगाम से दिल्ली तक फल पहुंचाने के लिए रेलवे की पार्सल, माल और फ्रेट सेवाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य एनएच-44 पर यातायात का दबाव कम करने के साथ फल लदे वाहनों के लंबे समय तक फंसे रहने की स्थिति से बचना है।
HADP में 60 प्रतिशत से अधिक सब्सिडी
कृषि मंत्री ने बताया कि होलिस्टिक एग्रीकल्चर डेवलपमेंट प्लान (HADP) के तहत किसानों को विभिन्न परियोजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। इन परियोजनाओं पर 60 प्रतिशत से अधिक सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है।
एक नजर में
12,89,917 — PMFBY से जुड़े किसान
3,72,134 — अब तक दर्ज बीमा दावे
₹221.71 करोड़ — दर्ज दावों की कुल राशि
6,86,741.37 हेक्टेयर — बीमा के दायरे में क्षेत्र
20 जिले — जम्मू-कश्मीर में PMFBY लागू
13.985 लाख — पात्र किसान परिवार
बागवानी का महत्व
35 लाख — प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े लोग
7.5 लाख — बागवानी से जुड़े परिवार
10 प्रतिशत — प्रदेश की जीडीपी में अनुमानित योगदान
₹12,000 करोड़ — सालाना आय
400 मानव-दिवस — एक हेक्टेयर बाग से सालाना रोजगार
क्यों महत्वपूर्ण है WBCIS?
मौसम आधारित जोखिम: प्रतिकूल मौसम से फसल को होने वाले नुकसान के जोखिम को बीमा सुरक्षा के दायरे में लाने का उद्देश्य।
सेब उत्पादकों को राहत: मौसम की मार से उत्पादन प्रभावित होने पर आर्थिक जोखिम कम करने में मदद।
केंद्र के नए नियम जरूरी: संशोधित केंद्रीय दिशानिर्देश जारी होने के बाद ही जम्मू-कश्मीर में योजना लागू होगी।
प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा
PMFBY में अधिसूचित फसलों को विभिन्न अधिसूचित प्राकृतिक जोखिमों से बीमा सुरक्षा मिलती है। इनमें ओलावृष्टि, बाढ़, सूखा, तूफान, चक्रवात, भूस्खलन और कीट-रोग प्रकोप शामिल हैं।
फल सीजन में सरकार की तीन प्राथमिकताएं
1. एनएच-44 पर यातायात का दबाव कम करना
2. फल लदे वाहनों को लंबे समय तक फंसे रहने से बचाना
3. रेलवे के माध्यम से दिल्ली तक फल परिवहन को बढ़ावा देना
अब केंद्र के निर्देशों का इंतजार
जम्मू-कश्मीर सरकार ने सेब कोWBCIS के दायरे में लाने की तैयारी पूरी कर ली है। अब उसे केंद्र सरकार के संशोधित दिशानिर्देशों का इंतजार है। केंद्र से अंतिम निर्देश मिलते ही योजना लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इससे मौसम की अनिश्चितता से प्रभावित होने वाले फल उत्पादकों को बीमा सुरक्षा का एक अतिरिक्त विकल्प मिल सकेगा।
