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कश्मीर की बेटी जर्का नसीर खान का विदेशों में भी डंका, साउथ कोरिया जियोनबुक नेशनल यूनिवर्सिटी से करेंगी पीएचडी

Published: Fri, 18 Sep 2026 05:47 AM (IST)

कश्मीर की जर्का नसीर खान को दक्षिण कोरिया की प्रतिष्ठित जियोनबुक नेशनल यूनिवर्सिटी में फुली फंडेड पीएचडी प्रोग्राम के लिए चुना गया है।

स्कास्ट-के की छात्रा जर्का नसीर खान ने दक्षिण कोरिया में हासिल की बड़ी उपलब्धि।

स्कास्ट-के की छात्रा जर्का नसीर खान ने दक्षिण कोरिया में हासिल की बड़ी उपलब्धि।

HighLights

  1. जर्का नसीर खान को दक्षिण कोरिया में फुली फंडेड पीएचडी प्रोग्राम मिला।

  2. स्कास्ट-के की छात्रा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की।

  3. पशु चिकित्सा माइक्रोबायोलॉजी में शोध से कश्मीर का नाम रोशन।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। कश्मीर घाटी के लिए गर्व का एक और क्षण सामने आया है। शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कश्मीर (स्कास्ट-के) की छात्रा जर्का नसीर खान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वेटनरी माइक्रोबायोलॉजी में पोस्टग्रेजुएट जर्का का चयन दक्षिण कोरिया की प्रतिष्ठित जियोनबुक नेशनल यूनिवर्सिटी में फुली फंडेड पीएचडी प्रोग्राम के लिए हुआ है।

जर्का की यह उपलब्धि न सिर्फ उनके परिवार और शिक्षकों के लिए गर्व का विषय है, बल्कि स्कास्ट-के के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विश्वविद्यालय के अनुसार, यह सफलता उसके विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय उच्च शिक्षा और शोध के रास्तों को भी दर्शाती है।

जर्का ने स्कास्ट-के के पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन संकाय से जुलाई 2026 में मास्टर ऑफ वेटनरी साइंस (एम.वी.एससी) की डिग्री पूरी की थी। अपनी बेहतरीन अकादमिक पृष्ठभूमि के दम पर उन्होंने महज दो महीनों के भीतर ही अंतरराष्ट्रीय शोध का दरवाजा खोल दिया। उन्होंने सितंबर 2026 में जियोनबुक नेशनल यूनिवर्सिटी के वेटनरी मेडिसिन विभाग में दाखिला लिया है।

स्कास्ट-के का बढ़ा वैश्विक कद

वहां वह विश्वविद्यालय की अत्याधुनिक इंफेक्शियस डिजीज लेबोरेटरी में अपना डॉक्टरेट शोध कार्य करेंगी। उनका शोध कार्य प्रसिद्ध वैज्ञानिक प्रोफेसर ओम जे-कू के मार्गदर्शन में होगा, जो पशु संक्रामक रोगों के क्षेत्र में एक बड़ा नाम हैं। यह शोध न केवल उनके करियर को नई ऊंचाई देगा, बल्कि पशु चिकित्सा और संक्रामक रोगों के क्षेत्र में नए समाधान खोजने में भी मदद करेगा।

यह सफलता स्कास्ट-के के बढ़ते वैश्विक कद को भी दर्शाती है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि जर्का का चयन इस बात का प्रमाण है कि यहां के छात्रों के लिए अंतरराष्ट्रीय शिक्षा और शोध के रास्ते लगातार खुल रहे हैं।

स्कास्ट-के के वाइस चांसलर प्रोफेसर नजीर अहमद गनई के नेतृत्व में विश्वविद्यालय अपने अकादमिक और रिसर्च इकोसिस्टम को लगातार मजबूत कर रहा है। छात्रों की ग्लोबल मोबिलिटी, रोजगार क्षमता और विदेशी संस्थानों तक पहुंच बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जिसका परिणाम जर्का जैसी सफलताओं के रूप में सामने आ रहा है।

वहीं जर्का ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय स्कास्ट-के को देते हुए कहा कि मास्टर डिग्री के दौरान मिली शिक्षा, ट्रेनिंग और अकादमिक सपोर्ट ने ही उनके डॉक्टरेट सफर की मजबूत नींव रखी। कश्मीर से निकलकर दक्षिण कोरिया तक का उनका यह सफर घाटी के हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है।