जम्मू-कश्मीर में फिर विशेष दर्जे के मुद्दे को सियासी हवा देने की कोशिश, नेकां ने ये सात प्रस्ताव किए पारित
नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) ने जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को फिर से बहाल करने की मांग करते हुए सात प्रस्ताव पारित किए हैं। पार्टी ने राज्य की पहचान और अधिकारों की रक्षा के लिए इसे आवश्यक बताया है। इसके अतिरिक्त, नेकां ने चुनावी प्रक्रिया शुरू करने, भूमि कानूनों में संशोधन और युवाओं के लिए रोजगार जैसे मुद्दों पर भी प्रस्ताव पारित किए।

नेकां ने कहा कि जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जे की बहाली हमारा मूल एजेंडा है।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे की बहाली के प्रति अपनी संकल्प प्रतिबद्धता को दोहराते हुए इसके लिए संघर्ष जारी रखने का एलान किया है। पार्टी ने देशभर में कश्मीरियों के कथित उत्पीड़न को रोकने पर जोर दिया है।
श्रीनगर में हुई पार्टी की कार्यकारी समिति की दो दिवसीय बैठक में राज्य के दर्जे की शीघ्र बहाली समेत सात प्रस्ताव पारित किए गए। पार्टी अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की मौजूदगी में गत शुक्रवार को हुई पार्टी बैठक् में प्रवक्ता तनवीर सादिक ने कहा कि जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जे की बहाली हमारा मूल एजेंडा है। हम इस पर अडिग हैं।
यह मुद्दा लोगों की उम्मीदों और सम्मान का केंद्र है
कार्यकारी समिति ने इस संदर्भ में प्रस्ताव पारित करते हुए दोहराया है कि यह मुद्दा लोगों की उम्मीदों और सम्मान का केंद्र है। समिति ने केंद्र सरकार को संसद में किए गए वादे और सर्वोच्च न्यायालय में दिलाए गए यकीन के मुताबिक जम्मू कश्मीर को जल्द राज्य का दर्जा बहाल करने की अपील का प्रस्ताव भी पारित किया है।
दिल्ली आतंकी हमले की निंदा की
इसके अलावा एक अन्य प्रस्ताव में समिति ने दिल्ली में हुए आतंकी हमले की निंदा करते हुए इसमें मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई है। पार्टी का मानना है एक सभ्य समाज में हिंसा की कोई जगह नहीं है और ऐसे चुनौने कामों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए। एक अन्य प्रस्ताव में नौगाम पुलिस स्टेशन विस्फोट की उच्चस्तरीय जांच व स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर से किसी भी तरह के बदलाव के लिए जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
कुछ लोगों के गुनाह की सजा सभी को न दें
पार्टी ने देश के विभिन्न हिस्सों में जम्मू-कश्मीर के छात्रों, व्यापारियों और निवासियों को हो रही परेशानी की खबरों पर चिंता जताई गई है। समिति ने अपने एक प्रस्ताव में जोर दिया है कि कुछ लोगों के गुनाह की सजा जम्मू-कश्मीर के सभी लोगों को नहीं दी जा सकती और न जम्मू कश्मीर का प्रत्येक नागरिक आर्तिकियों का समर्थक है।
कश्मीरियों को दूसरे राज्यों में न करें परेशान
समिति ने सभी राज्य सरकारों से अपील की कि वे भारतवर्ष में रहने या काम करने वाले कश्मीरियों और जम्मू-कश्मीर के दूसरे निवासियों की जान-माल की सुरक्षा, मान सम्मान को सुरक्षित रखे। समिति ने चुनाव घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरा करने की संकल्पबद्धता को दोहराते हुए एकमत से उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार को अपने समर्थन को दोहराया।

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