जम्मू-कश्मीर के 46 हजार घरों की छतों पर सोलर सिस्टम, 357 करोड़ की सब्सिडी बंटी; फिर भी बैंक लोन बना रोड़ा
जम्मू-कश्मीर ने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन करते हुए 55.24% आवासीय रूफटॉप सोलर ...और पढ़ें

जम्मू में 17809 और कश्मीर में 28324 घरों में लगे सोलर सिस्टम।
HighLights
जम्मू-कश्मीर ने 55.24% आवासीय रूफटॉप सोलर लक्ष्य हासिल किया।
46,133 घरों में सोलर सिस्टम लगे, राष्ट्रीय औसत से बेहतर।
बैंक ऋण मंजूरी में देरी और अस्वीकृति बड़ी चुनौती।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। बिजली बिल से राहत और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की देशव्यापी मुहिम में जम्मू-कश्मीर ने उल्लेखनीय प्रगति की है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत केंद्र शासित प्रदेश ने अपने आवासीय रूफटॉप सोलर लक्ष्य का 55.24 प्रतिशत हासिल कर लिया है। अब तक 46133 घरों की छतों पर सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं, जबकि 31 मार्च 2027 तक 83500 घरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित है। प्रदेश की उपलब्धि 50.80 प्रतिशत के राष्ट्रीय औसत से भी अधिक है। हालांकि, बैंक ऋणों की मंजूरी और परियोजनाओं को समय पर पूरा करना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
जम्मू-कश्मीर सरकार ने इस चुनौती को गंभीरता से लेते हुए इस चुनौती को दूर करने के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। हालांकि सौर ऊर्जा अभियान में दोनों संभागों की भागीदारी सामने आई है। जम्मू पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (जेपीडीसीएल) के क्षेत्र में 17809 रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं। जिनकी कुल क्षमता 62.69 मेगावाट है।
वहीं दूसरी ओर, कश्मीर पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (केपीडीसीएल) के क्षेत्र में 28324 सिस्टम स्थापित किए गए हैं, जिनकी क्षमता 102.55 मेगावाट है। दोनों संभागों को मिलाकर आवासीय रूफटॉप सोलर की कुल स्थापित क्षमता 165.24 मेगावाट पहुंच गई है।
ये आंकड़े बताते हैं कि योजना का विस्तार जम्मू और कश्मीर संभागों के बिजली वितरण क्षेत्रों में हो रहा है, न कि केवल श्रीनगर शहर में।
89 हजार से ज्यादा आवेदन
योजना के तहत 83,500 इंस्टॉलेशन के लक्ष्य के मुकाबले 89,680 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 82,591 आवेदकों ने वेंडर का चयन कर लिया है और 69,460 उपभोक्ता समझौते पोर्टल पर अपलोड किए जा चुके हैं। अधिकारियों ने 42,686 रूफटॉप सिस्टम के कमीशन होने की जानकारी भी दी है।
आवेदनों की संख्या लक्ष्य से अधिक होना योजना में लोगों की रुचि का संकेत है। हालांकि, आवेदन से लेकर सिस्टम की स्थापना और उसे चालू करने तक की प्रक्रिया पूरी करना भी उतना ही जरूरी है। यहां यह अंतर ध्यान देने योग्य है कि अधिकारियों द्वारा बताए गए 46,133 इंस्टॉलेशन और 42,686 कमीशन किए गए सिस्टम अलग-अलग आंकड़े हैं।
...लेकिन कर्ज की अड़चन बरकरार
लाभार्थियों को केंद्र सरकार से 344.14 करोड़ रुपये और केंद्रशासित प्रदेश से 13 करोड़ रुपये की सब्सिडी मिल चुकी है। यानी दोनों मदों में कुल 357.14 करोड़ रुपये लाभार्थियों को हस्तांतरित किए गए हैं। इसके बावजूद बैंक ऋण की प्रक्रिया कई परिवारों के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है।
अधिकारियों के अनुसार, केपीडीसीएल क्षेत्र में लगभग 75 प्रतिशत रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन बैंक वित्तपोषण पर निर्भर हैं। प्रदेश में 61566 ऋण आवेदन जमा किए गए। इनमें से 17416 आवेदन खारिज हो चुके हैं, जिनमें 14,232 केपीडीसीएल क्षेत्र के हैं।
वहीं, 38,773 मामलों में ऋण स्वीकृत कर राशि वितरित की जा चुकी है और 5,367 मामले अभी प्रक्रिया में हैं।
ऋण आवेदनों के खारिज होने के कारणों का विस्तृत ब्योरा उपलब्ध आंकड़ों में नहीं दिया गया है। ऐसे में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि सभी अस्वीकृत आवेदनों को एक ही वजह से जोड़ना उचित नहीं होगा।
सरकारी इमारतों की छतों पर भी सौर ऊर्जा
आवासीय घरों के साथ सरकारी भवनों को सौर ऊर्जा से जोड़ने का अभियान भी जारी है। कुल 12,994 सरकारी इमारतों को सौरकृत करने के लक्ष्य में से 8,850 इमारतों में काम पूरा हो चुका है। इनकी संयुक्त क्षमता 95.64 मेगावाट है।
इनमें 4,793 इमारतें पीएम सूर्य घर और हाइब्रिड परियोजनाओं के तहत 41.50 मेगावाट क्षमता के साथ सौरकृत की गई हैं। इसके अलावा, जारी कार्यक्रम के तहत 4,057 इमारतों में 54.14 मेगावाट क्षमता स्थापित की गई है।
शेष परियोजनाओं में 1,300 इमारतों के लिए सामग्री पहुंचाई जा चुकी है, 943 स्थलों पर काम चल रहा है और 1,901 इमारतों का सर्वे जारी है।
