जम्मू-कश्मीर में पनबिजली से 5537 करोड़ की बंपर कमाई, क्या अब मिलेगी 200 यूनिट फ्री बिजली? उमर सरकार का आया जवाब
जम्मू-कश्मीर की नदियों से पनबिजली परियोजनाओं ने पिछले पांच सालों में सरकारी खजाने को 5537 करोड़ रुपये से अधिक का ...और पढ़ें
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लोगों को 200 यूनिय फ्री बिजली का अभी भी इंतजार। फाइल फोटो
HighLights
सरकारी खजाने को पनबिजली से 5537 करोड़ रुपये से अधिक की आय।
200 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा अभी भी अधूरा।
NHPC की परियोजनाओं से 5537.32 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की नदियों में बहने वाले पानी और उससे बनने वाली बिजली ने पिछले पांच साल में सरकारी खजाने को मालामाल कर दिया है, लेकिन इसी बिजली के लिए तरस रहे आम लोगों को 200 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा आज भी अधर में लटका है।
विधानसभा में डोडा पश्चिम के विधायक शक्ति राज परिहार के सवाल पर सरकार ने खुद माना है कि पनबिजली से 5537 करोड़ रुपये से ज्यादा का राजस्व आया है, फिर भी गरीब परिवारों को मुफ्त बिजली का इंतजार करना पड़ रहा है।
सरकार के जवाब के मुताबिक जेकेपीडीसीएल ने पिछले पांच वित्तीय वर्षों में प्रदेश को 19222.21 मिलियन यूनिट बिजली 2.033 रुपये प्रति यूनिट की दर से बेची और इसके बदले 745.151 करोड़ रुपये जल उपयोग शुल्क सरकार को दिया।
इससे भी बड़ा खजाना एनएचपीसी की 6 परियोजनाओं से भरा है। कुल 2250 मेगावाट क्षमता वाली इन परियोजनाओं से दो मदों में कमाई हुई, जल उपयोग शुल्क के रूप में 3582.06 करोड़ और 12 प्रतिशत मुफ्त बिजली प्लस 1 प्रतिशत स्थानीय क्षेत्र विकास निधि के रूप में 1955.26 करोड़। दोनों मिलाकर 5537.32 करोड़ रुपये।
किस नदी से कितना पैसा आया
सलाल पनबिजली परियोजना जिसकी उत्पादन क्षमता 690 मेगावाट है, से जल शुल्क 1754.98 करोड़, 480 मेगावाट क्षमता वाली उड़ी-1 पनबिजली परियोजना से 561.2 करोड़, 390 मेगावाट वाली ढुलहस्ती से मुफ्त बिजली के रूप में सबसे ज्यादा 750.82 करोड़, 240 मेगावाट क्षमता वाली उड़ी-2 से 615.54 करोड़ जल शुल्क, 330 मेगावाट क्षमता वाली किशनगंगा से 404.64 करोड़ मुफ्त बिजली जबकि इसी तरह 120 मेगावाट मेगावाट वाली सेवा-2 से 36.08 करोड़ जल शुल्क के रूप में मिलता है।
सालाना आंकड़ा भी बताता है कि खजाना लगातार भर रहा है। जल शुल्क के रूप में 2021-22 में 774.46 करोड़, 2022-23 में 735 करोड़, 2023-24 में 712.22 करोड़, 2024-25 में 670.70 करोड़ और 2025-26 में 689.67 करोड़ मिले। मुफ्त बिजली से आय 371.13 करोड़ से बढ़कर 423.92 करोड़ तक गई है।
खजाना भरा, जिलों को क्या मिला
सरकार ने बताया कि रामबन में पिछले दो साल यानी वर्ष 2024-25, 2025-26 में 1.56 करोड़ रुपये, डोडा में 49.29 लाख रुपये सामाजिक दायित्व निधि के तहत खर्च हुए। किश्तवाड़ में जेकेपीडीसीएल का कोई चालू प्रोजेक्ट नहीं है, लेकिन 4 बड़े प्रोजेक्ट निर्माणाधीन हैं।
चिनाब वैली पावर प्रोजेक्ट्स ने वहां 2.33 करोड़ रुपये सामाजिक दायित्व पर खर्च किए, 12.87 करोड़ रुपये स्थानीय क्षेत्र विकास निधि मंजूर हुई जिसमें से 5.092 करोड़ खर्च हो चुके हैं।
दुलहस्ती पावर स्टेशन ने अकेले दो साल में 9.56 करोड़ रुपये शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास पर लगाए। सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं से स्थानीय ठेकेदारों, सुरक्षा, हाउसकीपिंग, परिवहन जैसे कार्यों में स्थानीय युवाओं को निरंतर रोजगार भी मिल रहा है।
एक भी परिवार को लाभ नहीं मिला
इतनी कमाई के बावजूद 200 यूनिट मुफ्त बिजली की योजना 2 किलोवाट रूफ टॉप सोलर सिस्टम के रेस्को मोड पर अभी अंतिम निविदा चरण में ही अटकी है। निविदाएं खुल चुकी हैं, मूल्यांकन चल रहा है, लेकिन अभी तक एक भी परिवार को लाभ नहीं मिला।
वहीं, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में प्रदेश के 10 प्रतिशत हिस्से के रूप में अब तक सिर्फ 10.50 करोड़ रुपये जिसमें जम्मू पावर वितरण निगम 5 करोड़ और कश्मीर पावर वितरण निगम 5.50 करोड़ ही सत्यापित लाभार्थियों को मिले हैं, बाकी सत्यापन में अटका है।
आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर नई जलविद्युत नीति-2026 अभी भी विचाराधीन है। हालांकि प्रदेश में 31 पनबिजली परियोजनाओं से कुल 3540.15 मेगावाट बिजली बन रही है। इनमें एनएचपीसी की 6 परियोजनाओं से 2250 मेगावाट, जेकेपीडीसीएल की 13 पनबिजली परियोजनाओं से 1197.4 मेगावाट जबकि निजी 12 परियोजनाओं से 92.75 मेगावाट बिजली मिल रही है।
