जम्मू-कश्मीर के सरकारी कॉलेजों में घट रहे ग्रेजुएट, तीन साल में 23 प्रतिशत की बड़ी गिरावट
जम्मू-कश्मीर के सरकारी डिग्री कॉलेजों में तीन अकादमिक सत्रों में स्नातकों की संख्या में करीब 23% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।

जम्मू-कश्मीर के सरकारी कॉलेजों में घट रहे ग्रेजुएट (प्रतीकात्मक फोट)
HighLights
जम्मू-कश्मीर के कॉलेजों में 23% स्नातकों की कमी
घटते दाखिले और बदलते रोजगार माहौल मुख्य कारण
उच्च शिक्षा विभाग रोजगारपरक पाठ्यक्रम, कौशल विकास पर जोर
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में सरकारी डिग्री कॉलेजों से हर साल निकलने वाले स्नातकों की संख्या लगातार घट रही है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, तीन अकादमिक सत्रों में ग्रेजुएट होने वाले छात्रों की संख्या में करीब 23 प्रतिशत की कमी आई है।
2023-24 में जहां सरकारी डिग्री कॉलेजों से 23655 छात्र ग्रेजुएट हुए थे, वहीं 2024-25 में यह आंकड़ा घटकर 21153 और 2025-26 में महज 18,312 रह गया। यानी तीन वर्षों में 5343 ग्रेजुएट कम हुए, जो 22.6 प्रतिशत की गिरावट है।
इस गिरावट का असर जम्मू और कश्मीर दोनों संभागों में दिखाई दिया है, हालांकि अलग-अलग जिलों में इसकी तीव्रता काफी अलग रही।
जम्मू संभाग में 25 फीसदी से ज्यादा गिरावट
जम्मू संभाग में ग्रेजुएट्स की संख्या 11535 से घटकर 8644 रह गई, यानी 25.1 प्रतिशत की कमी। जम्मू जिले में यह गिरावट और स्पष्ट रही। यहां 2023-24 में 5930 छात्र ग्रेजुएट हुए थे, जो 2024-25 में 4206 और 2025-26 में 3906 रह गए। तीन वर्षों में कमी 34.1 प्रतिशत रही।
राजौरी में स्थिति और चिंताजनक रही। यहां संख्या 1593 से घटकर 728 रह गई, यानी 54.3 प्रतिशत की गिरावट। उधमपुर में भी 1716 से घटकर 895 ग्रेजुएट रह गए, जो 47.8 प्रतिशत की कमी है। डोडा में 874 से 534 यानी 38.9 प्रतिशत और पुंछ में 671 से 474 यानी 29.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।
हालांकि सभी जिलों में तस्वीर एक जैसी नहीं रही। किश्तवाड़ में ग्रेजुएट्स 211 से बढ़कर 319, रियासी में 145 से 284 और सांबा में 252 से 298 हुए। रामबन में 22 से बढ़कर 205 और कठुआ में 121 से बढ़कर 1,001 ग्रेजुएट हुए। कठुआ और रामबन जैसे जिलों में इतनी बड़ी उछाल यह भी संकेत देती है कि कॉलेजों या कार्यक्रमों की संरचना में बदलाव ने आंकड़ों को प्रभावित किया हो सकता है।
कश्मीर में भी 20 फीसदी कम हुए स्नातक
कश्मीर संभाग में भी ग्रेजुएट्स की संख्या 12120 से घटकर 9668 हो गई, यानी 20.2 प्रतिशत की गिरावट। श्रीनगर, जो घाटी में सबसे अधिक ग्रेजुएट देने वाला जिला है, वहां संख्या 4190 से घटकर 3352 रह गई, यानी 20 प्रतिशत की कमी।
बारामूला में 2188 से 1553, पुलवामा में 1075 से 802 और कुलगाम में 756 से महज 434 ग्रेजुएट रह गए। कुलगाम में गिरावट 42.6 प्रतिशत रही। कुपवाड़ा में 876 से 657 और बांदीपोरा में 368 से 281 की कमी दर्ज हुई।
अनंतनाग में पहले संख्या 1476 से बढ़कर 1683 हुई, लेकिन 2025-26 में घटकर 1341 रह गई, जो 2023-24 से 9.1 प्रतिशत कम है। वहीं बडगाम में आंकड़े 452, 620 और 448 रहे। गांदरबल में 275 से 289 और शोपियां में 464 से बढ़कर 511 ग्रेजुएट हुए।
रोजगार का बदलता माहौल भी बना कारण
उच्च शिक्षा विभाग ने माना है कि ग्रेजुएट्स की संख्या में कमी का संबंध सरकारी डिग्री कॉलेजों में घटते दाखिलों से भी है, खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में। रोजगार का बदलता माहौल भी पारंपरिक डिग्री पाठ्यक्रमों की घटती लोकप्रियता का एक कारण हो सकता है। छात्र अब डिग्री के साथ रोजगार की संभावनाओं को भी प्राथमिकता दे रहे हैं।
लेकिन सरकार के पास अभी यह साबित करने वाला कोई एकीकृत आंकड़ा नहीं है कि कितने ग्रेजुएट नौकरी पा रहे हैं, कितनों की प्लेसमेंट हो रही है, औसत वेतन कितना है या किस क्षेत्र में कितने छात्र रोजगार पा रहे हैं। यही कमी नीति-निर्माण के सामने बड़ी चुनौती बन रही है।
उच्च शिक्षा विभाग उठा रहा कदम
अब उच्च शिक्षा विभाग ग्रेजुएट्स को नौकरी कितनी मिल रही है, इसका पूरा आकलन करने का ढांचा तैयार कर रहा है। इसमें प्लेसमेंट, सेक्टरवार रोजगार, कौशल जरूरतों के साथ करियर काउंसलिंग, स्किल डेवलपमेंट, इंटर्नशिप और प्लेसमेंट सपोर्ट मजबूत करने की योजना है।
विषयों के युक्तिकरण के लिए गठित समिति ने भी प्रत्येक कार्यक्रम में दाखिलों की व्यापक समीक्षा और क्लस्टर आधारित अकादमिक मॉडल पर चर्चा की है।
इसके साथ ही जम्मू और श्रीनगर के आसपास की सुविधायुक्त कॉलेजों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी और रिमोट सेंसिंग जैसे नए रोजगारपरक पाठ्यक्रम शुरू करने पर विचार हो रहा है।
