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नौकरी से विदेश में दाखिले तक... गृह मंत्रालय के नाम पर फर्जीवाड़ा, जम्मू-कश्मीर में 2 करोड़ की ठगी का खेल कैसे चला?

Published: Tue, 06 Oct 2026 11:27 AM (IST)

गृह मंत्रालय के फर्जी पत्रों और मुहरों का उपयोग कर सरकारी नौकरी और एसपीओ नियुक्ति का झांसा देकर 2 करोड़ ...और पढ़ें

गृह मंत्रालय के नाम पर 2 करोड़ की ठगी, वकील और JKPF चेयरमैन गिरफ्तार। (फाइल फोटो)

गृह मंत्रालय के नाम पर 2 करोड़ की ठगी, वकील और JKPF चेयरमैन गिरफ्तार। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. गृह मंत्रालय के फर्जी पत्र-मुहर से 2 करोड़ की ठगी।

  2. वकील और जेकेपीएफ चेयरमैन सहित दो आरोपी गिरफ्तार।

  3. फर्जी नौकरी, एसपीओ नियुक्ति और विदेश दाखिले का झांसा।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सरकारी नौकरी, एसपीओ नियुक्ति और विदेश में दाखिले का झांसा देकर लोगों से दो करोड़ की ठगी करने वाले नेटवर्क को पकड़ा है। गिरोह के सदस्यों से गृह मंत्रालय की फर्जी मुहर और पत्र भी बरामद हुई हैं। पकड़े गए लोगों में एक अधिवक्ता जहांगीर डार और जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फ्रंट (जेकेपीएफ) का चेयरमैन फिरदौस नबी शामिल है।

आशंका है कि यह नेटवर्क वर्ष 2019 से सक्रिय था और गिरोह में और सदस्य भी शामिल हो सकते हैं। आरोपितों ने गृह मंत्रालय के जाली नियुक्ति व सिफारिश पत्रों का इस्तेमाल किया।

फर्जी नियुक्ति पत्र का नेटवर्क कितना बड़ा?

एसएसपी बड़गाम केके हरिप्रसाद के अनुसार, मामला 17 अगस्त 2026 को थाना बीरवाह में दर्ज शिकायत से सामने आया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि एसपीओ की नौकरी दिलाने के नाम पर उससे करीब तीन लाख रुपये लिए गए। इसके बदले उसे गृह मंत्रालय के नाम से जारी फर्जी नियुक्ति व सिफारिश पत्र दिया गया।

पुलिस के अनुसार, फर्जी पत्र पर तत्कालीन केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन का नाम दर्ज था और इसे जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक के नाम संबोधित किया गया था। फर्जी पत्र में बड़गाम के विभिन्न गांवों के 10 युवाओं को विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) नियुक्त किए जाने को कहा किया गया था।

डायरी में पैसों के लेन-देन का हिसाब मिला

जांच में जहांगीर अहमद डार की कथित भूमिका सामने आने के बाद पुलिस ने जम्मू के नानक नगर स्थित उसके किराये के ठिकाने पर छापा मारा। यहां से फर्जी सरकारी आदेश और मुहरों के अलावा 12 एटीएम कार्ड, खाली बैंक लेटरहेड, पहचान पत्र, पासपोर्ट और वीजा संबंधी दस्तावेज बरामद किए गए।

पुलिस को एक डायरी भी मिली, जिसमें कथित तौर पर पैसों के लेन-देन का हिसाब दर्ज था। पुलिस के अनुसार आरोपित पहले छोटी रकम लेकर लोगों का भरोसा जीतते थे। इसके बाद नौकरी, सरकारी मंजूरी या सब्सिडी दिलाने के नाम पर बड़ी रकम वसूली जाती थी।

कथित फर्जी दस्तावेज वाट्सऐप के 'व्यू वन्स' फीचर के जरिए पीड़ितों को भेजे जाते थे। जांच में 2.3 लाख, 15 लाख और 27 लाख रुपये की ठगी से जुड़ी शिकायतें भी आई हैं। पुलिस का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों और दिहाड़ी मजदूरों को भी निशाना बनाया गया।

क्या विदेश में भी जुड़े हैं नेटवर्क के तार?

पासपोर्ट और वीजा दस्तावेजों की बरामदगी के बाद पुलिस अब कथित नेटवर्क के जम्मू-कश्मीर से बाहर और विदेश में संभावित संपर्कों की भी जांच कर रही है। पुलिस के अनुसार दोनों गिरफ्तार आरोपित पूरे नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं और पूछताछ के आधार पर अन्य आरोपितों तथा पीड़ितों की पहचान की जा रही है।