जम्मू-कश्मीर में छोटी गलतियों पर अब नहीं होगी जेल, नागरिक दंड से निपटेगा मामला
जम्मू-कश्मीर में छोटे नियामकीय उल्लंघनों के लिए अब जेल और आपराधिक मुकदमे की जगह प्रशासनिक कार्रवाई का रास्ता खुलेगा। मुख्यमंत्री ...और पढ़ें

जम्मू-कश्मीर में छोटी गलतियों पर अब नहीं होगी जेल (प्रतीकात्मक फोटो)
HighLights
छोटे नियामकीय उल्लंघनों पर अब आपराधिक मुकदमा नहीं होगा।
जन विश्वास तृतीय विधेयक में 21 कानूनों में संशोधन प्रस्तावित है।
मामूली चूकों के लिए प्रशासनिक कार्रवाई और नागरिक दंड लगेगा।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में छोटे नियामकीय उल्लंघनों के लिए अब जेल और आपराधिक मुकदमे की जगह प्रशासनिक कार्रवाई का रास्ता खोलने की तैयारी है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को विधानसभा में जन विश्वास तृतीय (संशोधन उपबंध) विधेयक, 2026 पेश किया।
इसमें 21 कानूनों में संशोधन और दो अप्रचलित कानूनों को समाप्त करने का प्रस्ताव है। विधेयक का मुख्य फोकस ऐसे छोटे और तकनीकी उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना है, जिनमें गंभीर आपराधिक तत्व नहीं होते। इनके लिए आपराधिक मुकदमे के बजाय नागरिक दंड (सिविल पेनल्टी) लगाने का प्रस्ताव है।
इससे आम नागरिकों और कारोबारियों को छोटी नियामकीय चूक के मामलों में अदालत और आपराधिक प्रक्रिया से गुजरने के बजाय प्रशासनिक स्तर पर मामला निपटाने का विकल्प मिलेगा।
पुलिस कार्रवाई की जगह प्रशासनिक जांच : प्रस्तावित व्यवस्था में उल्लंघन की शिकायत या मामला सामने आने के बाद निर्धारित अधिकारी जांच करेंगे और संबंधित व्यक्ति को पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा। निर्णयन अधिकारी नागरिक दंड लगाने का फैसला कर सकेंगे। निर्णयन अधिकारी के आदेश के खिलाफ सामान्यतः 30 दिन में अपील की जा सकेगी। पर्याप्त कारण होने पर देरी से दाखिल अपील भी स्वीकार करने का प्रविधान होगा।
अपील का निस्तारण सामान्यत
60 दिन के भीतर करने का प्रस्ताव है। दंड जमा नहीं करने पर इसकी वसूली भू-राजस्व के बकाये की तरह किए जाने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। नगरपालिका कानून में अतिरिक्त सचिव स्तर के अधिकारी या उससे ऊपर के अधिकारी को निर्णयन अधिकारी नियुक्त करने का प्रस्ताव है। उन्हें संबंधित व्यक्ति या गवाहों को बुलाने, दस्तावेज मांगने और मामले के तथ्यों की जांच करने का अधिकार होगा।
दो अप्रचलित कानून होंगे खत्म: विधेयक की दूसरी अनुसूची में दो अप्रचलित कानूनों को निरस्त करने का प्रस्ताव है। साथ ही यह स्पष्ट किया गया है कि संशोधन या निरसन से पहले अर्जित अधिकार, दायित्व, दावे और लंबित कानूनी कार्यवाहियां केवल नए बदलाव के कारण खत्म नहीं होंगी। सरकार को नए प्रविधानों के क्रियान्वयन में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करने के लिए अधिनियम लागू होने की तारीख से दो वर्ष तक सीमित शक्ति देने का भी प्रस्ताव है।
गलत शिकायत पर 50 हजार से एक लाख तक दंड
नगर पालिका लोकपाल अधिनियम में भी बदलाव का प्रस्ताव है। गलत शिकायत करने के मामलों में आपराधिक दंड के स्थान पर 50 हजार से एक लाख तक नागरिक दंड लगाया जा सकेगा। विधेयक में सहकारी समितियों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों, हाउसिंग बोर्ड, फेरी बोट्स, फल नर्सरी और निर्धारित मूल्य से संबंधित कानूनों में भी संशोधन प्रस्तावित हैं।
कई मामलों में बदलेगा दंड
जम्मू-कश्मीर नगरपालिका अधिनियम, 2000 में रोजमर्रा के कई उल्लंघनों को नागरिक दंड के दायरे में लाने का प्रस्ताव है। इनमें खुले में पशु छोड़ना, सार्वजनिक स्थानों पर अनुचित व्यवहार, अनावश्यक हार्न या शोर, जलस्रोतों के आसपास गंदगी फैलाना, सड़कों और नालियों में कचरा डालना तथा सार्वजनिक स्थानों पर पेशाब करना जैसे मामले शामिल हैं।
बिना अनुमति फैक्टरी या कार्यशाला स्थापित करना, अनधिकृत नाली निर्माण या उसमें बदलाव, मुख्य जल लाइन से अवैध कनेक्शन, बिना अनुमति पोस्टर या विज्ञापन लगाना, पेड़ों की कटाई, अवैध निर्माण, खुदाई या खनन और नगरपालिका आदेशों की अवहेलना जैसे मामलों में आपराधिक दंड की जगह नागरिक दंड प्रस्तावित है। भवन निर्माण और टाउन प्लानिंग से जुड़े कानूनों में इसी तरह के बदलाव किए जाएंगे।
बिना अनुमति निर्माण, पुनर्निर्माण, विकास, खुदाई अथवा सड़क तक अनधिकृत पहुंच बनाने के मामलों में प्रशासनिक दंड की व्यवस्था प्रस्तावित है। उल्लंघन जारी रहने पर अतिरिक्त दैनिक दंड भी लगाया जा सकेगा।
पर्यटन, परिवहन और हस्तशिल्प क्षेत्र भी दायरे में
पर्यटन कारोबार से जुड़े कानून में गलत विवरण देने, प्रमाणपत्र का अनुचित हस्तांतरण और कदाचार जैसे मामलों में आपराधिक दंड हटाकर नागरिक दंड का प्रस्ताव है। कुछ मामलों में पंजीकरण रद करने जैसी कार्रवाई की जा सकेगी। मोटर वाहन कराधान, राजमार्ग, एरियल रोपवे, यात्री कराधान और ईंट भट्ठा विनियमन से जुड़े कानूनों में भी दंड व्यवस्था बदलने का प्रस्ताव है।
गैर-जैव-अवक्रमणीय सामग्री प्रबंधन अधिनियम में प्लास्टिक और अन्य सानग्री के प्रबंधन व निपटान से जुड़े उल्लंघनों को नागरिक दंड के दायरे में लाने की बात कही है। हस्तशिल्प गुणवत्ता नियंत्रण अधिनियम में गुणवत्ता नियंत्रण चिह्न के अनुचित इस्तेमाल और निरीक्षण में बाधा डालने जैसे मामलों के लिए भी प्रशासनिक दंड की व्यवस्था प्रस्तावित है। शहतूत संरक्षण अधिनियम में पेड़ों को नुकसान पहुंचाने पर दंड बढ़ाने और उसे नागरिक दंड के रूप में लागू करने का प्रस्ताव है।
