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अब कचरे से बनेगा ईंधन, जम्मू-कश्मीर में नई CBG पॉलिसी लागू; जानिए किसे और कैसे मिलेगा फायदा

Published: Fri, 02 Oct 2026 01:33 PM (IST)

जम्मू-कश्मीर सरकार ने कंप्रेस्ड बायो-गैस नीति 2026 अधिसूचित की है, जिसका उद्देश्य जैविक कचरे को स्वच्छ ईंधन और उच्च गुणवत्ता ...और पढ़ें

जम्मू-कश्मीर में जैविक कचरे से बनेगा स्वच्छ ईंधन और खाद। (फाइल फोटो)

जम्मू-कश्मीर में जैविक कचरे से बनेगा स्वच्छ ईंधन और खाद। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. जैविक कचरे से स्वच्छ ईंधन और उच्च गुणवत्ता वाला जैव-खाद बनेगा।

  2. पर्यावरण संरक्षण, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नीति से मिलेगी मजबूती।

  3. पूंजीगत सहायता, रियायती भूमि, सिंगल विंडो क्लियरेंस जैसे प्रोत्साहन शामिल।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में कचरे को समस्या नहीं, बल्कि कमाई और स्वच्छ ऊर्जा के संसाधन में बदलने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्र शासित प्रदेश सरकार ने जम्मू-कश्मीर कम्प्रेस्ड बायो-गैस (सीबीजी) पॉलिसी 2026 को अधिसूचित कर दिया है। इस नीति का मकसद जैविक कचरे से स्वच्छ ईंधन और उच्च गुणवत्ता वाला जैव-खाद तैयार करना है, जिससे एक साथ पर्यावरण संरक्षण, खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।

यह नीति जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से स्वच्छ ऊर्जा और चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की व्यापक पहल का हिस्सा है। नीति को लागू करने से पहले इसे मंत्रिपरिषद की मंजूरी मिली थी।

सरकार का मानना है कि जम्मू-कश्मीर में कृषि अवशेष, पशु अपशिष्ट और अन्य जैविक कचरे का बेहतर इस्तेमाल कर ऊर्जा उत्पादन की नई संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं।

नई नीति पर उमर की मुहर

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस नीति को अधिसूचित किए जाने पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री सतीश शर्मा और संबंधित विभाग को बधाई दी है। सरकार इसे टिकाऊ ऊर्जा विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

कचरा नहीं, अब ईंधन का कच्चा माल बनेगा जैविक कचरा

नई नीति की सबसे खास बात यह है कि जैविक कचरे को सीधे बोझ मानने के बजाय उसे सीबीजी उत्पादन के लिए फीडस्टॉक के रूप में इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया। इसके लिए फीडस्टॉक के संग्रह और आपूर्ति की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा, ताकि सीबीजी संयंत्रों को लगातार कच्चा माल उपलब्ध हो सके।

जम्मू-कश्मीर कम्प्रेस्ड बायो-गैस को प्राकृतिक गैस के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके उत्पादन की प्रक्रिया में निकलने वाले जैविक पदार्थ से जैव-खाद तैयार करने की भी संभावना होगी। यानी एक ही प्रक्रिया से कचरे के प्रबंधन के साथ-साथ स्वच्छ ईंधन और खेती के लिए उपयोगी सामग्री तैयार की जा सकेगी।

किसानों के लिए भी खुलेगा नया रास्ता

सरकार ने सीबीजी क्षेत्र में निजी और हरित निवेश आकर्षित करने के लिए कई प्रोत्साहनों का प्रावधान किया है। नीति के तहत पूंजीगत व्यय में सहायता, रियायती दरों पर भूमि लीज, सिंगल विंडो क्लियरेंस और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

सिंगल विंडो व्यवस्था का उद्देश्य परियोजनाओं के लिए अलग-अलग विभागों से मंजूरी लेने की प्रक्रिया को सरल बनाना है। इससे नए सीबीजी संयंत्र स्थापित करने में लगने वाला समय कम करने और निवेशकों के लिए प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाने में मदद मिल सकती है।

इस नीति का असर केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। जैव-खाद के लिए बाजार संपर्क विकसित किए जाने से किसानों को भी लाभ मिलने की संभावना है। कृषि और पशुपालन से निकलने वाले जैविक अवशेषों का व्यवस्थित उपयोग होने पर ग्रामीण क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन की समस्या कम हो सकती है।

साथ ही सीबीजी की पूरी वैल्यू चेन-कचरे के संग्रह से लेकर उसके परिवहन, प्रसंस्करण, संयंत्र संचालन और तैयार उत्पादों के विपणन तक-में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।

गांवों से जुड़ेगा 'ग्रीन इकोनॉमी' का मॉडल

सरकार के मुताबिक, सीबीजी नीति जम्मू-कश्मीर में वेस्ट मैनेजमेंट, स्वच्छ ऊर्जा, कृषि और ग्रामीण रोजगार को एक साथ जोड़ने का प्रयास है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नए कारोबार और आजीविका के अवसर विकसित हो सकते हैं।

अब असली चुनौती इस नीति को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करने की होगी। यदि फीडस्टॉक की नियमित उपलब्धता, परियोजनाओं की स्थापना और तैयार सीबीजी व जैव-उर्वरक के लिए मजबूत बाजार तंत्र विकसित होता है, तो जम्मू-कश्मीर में कचरे से ऊर्जा और ऊर्जा से रोजगार का एक नया चक्र तैयार हो सकता है।