राज्य ब्यूरो, श्रीनगर : जम्मू कश्मीर बैंक में हुए घोटालों की जांच को आगे बढ़ाते हुए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने शनिवार को श्रीनगर निगम के डिप्टी मेयर शेख इमरान के अलावा जम्मू कश्मीर बैंक व राज्य सरकार के कुछ अधिकारियों के खिलाफ सरकारी खजाने व बैंक को करोड़ों रुपये का चूना लगाने का मामला दर्ज कर लिया है। इन सभी पर लस्सीपोरा (पुलवामा) कोल्ड स्टोर की लागत को वास्तविक लागत से कहीं ज्यादा बढ़ा चढ़ाकर दिखाकर सब्सिडी की राशि बढ़ाने, कर्ज चुकाने के लिए पहले से ही गिरवी संपत्ति को दोबारा गिरवी रखने और वनटाइम सेटलमेंट के लिए रिस्ट्रक्चर कर्ज को दोबारा रिस्ट्रक्चर करने का आरोप है।

एसीबी के अधिकारियों ने बताया कि जिला अनंतनाग स्थित एसीबी पुलिस स्टेशन में कहवा स्क्वेयर प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक शेख इमरान और जम्मू कश्मीर बैंक व राज्य सरकार के अन्य अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम संवत 2006 की धारा पांच की उपधारा एक और दो, धारा 420 और आरपीसी की धारा 120-बी के तहत दंडनीय मामले दर्ज किए गए हैं। इस संदर्भ एक एफआइआर: 3/2019 दर्ज की है।

उन्होंने बताया कि जेके बैंक में गत शनिवार और उसके बाद डिप्टी मेयर शेख इमरान के ठिकानों पर जांच के दौरान पता चला कि शेख इमरान ने मैसर्स कहवा स्क्वेयर प्राइवेट लिमिटेड के नाम और बैनर तले पुलवामा के लस्सीपोरा में एक कोल्ड स्टोर की स्थापना के लिए डीपीआर व प्रस्ताव जेके बैंक को सौंपा था। नियमों के मुताबिक, मिशन फार इंटेग्रेटिड डेवलेपमेंट ऑफ हार्टिकल्चर (एमआइडीएच) और विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारियों ने शेख इमरान के साथ उस जगह का दौरा किया, जहां यह कोल्ड स्टोर बनना था। इस परियोजना की अनुमानित लागत 33 करोड़ आंकी गई, जिसमें सब्सिडी 16.50 करोड़ बनी, जो कुल लागत का 50 फीसद था। इसके बाद नियमानुसार अंतिम अनुमोदन के लिए एमआइडीएच भारत सरकार की एंपावर्ड मानिटरिग कमेटी को प्रस्ताव भेजा गया। राज्य सरकार ने भी अपने स्तर पर जांच कर निर्माण कार्य की लागत में किसी तरह का बदलाव किए बगैर सब्सिडी की राशि जारी करने की सिफारिश की। बैंक ने दी 33 करोड़ माफ करने की सहमति :

एसीबी अधिकारियों ने बताया कि मैसर्स कहवा ग्रुप की छह और व्यावसायिक अथवा बिजनेस इकाइयां हैं। शेख इमरान ने इन सभी बिजनेस इकाइयों के नाम पर कई कर्ज और ओवरड्राफ्ट प्राप्त किए हैं। उसने बैंकों का करीब 138 करोड़ रुपये चुकाना है। उसकी एक कंपनी कहवा स्क्वेयर और उसकी सहयोगी कंपनियां एनपीए हो चुकी थी, इसलिए शेख इमरान ने जेके बैंक के प्रबंधकों के साथ अपनी सभी देनदारियों को चुकता करने के लिए वनटाइम सेटलमेंट का समझौता किया। बैंक ने उन्हें 33 करोड़ माफ करने पर सहमति दे दी। सांठगांठ कर कोल्ड स्टोर को एनपीओ घोषित कर दिया :

वनटाइम सेटलमेंट के आधार पर मैसर्स कहवा ग्रुप को 105 करोड़ की राशि दो किश्तों में जमा कराने के लिए कहा गया। पहली किश्त 50 करोड़ थी, जो 25 मार्च 2017 तक जमा करनी थी। जांच में पता चला कि बागवानी और कोल्ड स्टोरेज को प्रोत्साहित करने के नाम पर सब्सिडी की राशि को खुर्द-बुर्द करने के लिए मैसर्स कहवा ग्रुप के निदेशक शेख इमरान और उनके सहयोगियों ने बागवानी विभाग और जेके बैंक अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर कोल्ड स्टोर को एनपीओ घोषित कर दिया। इस स्टोर के लिए प्राप्त कर्ज को चुकाने के लिए एक भी किश्त बैंक को अदा नहीं की गई थी। कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर गबन :

एसीबी के अधिकारियों ने बताया कि शेख इमरान और उनके साझीदारों ने जेके बैंक के अधिकारियों से मिलकर मैसस गो फ्रेश कंपनी के मालिक नदीम अहमद मायर को अपने साथ जोड़ा। नदीम अहमद को 36.10 करोड़ का कर्ज दिलाया गया और उसके लिए मार्जन मनी 1.90 करोड़ रखी गई। बताया गया कि कोल्ड स्टोर लस्सीपोरा की लीज व संपत्ति अधिकार उसे स्थानांतरित किए जा रहे हैं। नदीम ने 36.10 करोड़ का कर्ज लिया और कोल्ड स्टोर को भी अपने अधिकार में लिया। सिर्फ यही नहीं, बैंक अधिकारियों ने इसी कोल्ड स्टोर के नाम पर जो पहले से ही उनके पास गिरवी था और जिसके नाम पर शेख इमरान को कर्ज दिया गया था, नदीम को कर्ज दिया गया। इसके बाद भी मैसर्स कहवा ग्रुप ने दोबारा बैंक से अपने लिए राहत मांगी और वनटाइम सेटलमेंट के बाद 55 करोड़ की जो दूसरी किश्त देनी थी, उसे घटवाते हुए 27 करोड़ कराया। जांच में पाया गया कि मैसर्स कहवा ग्रुप ने कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर 16.50 करोड़ की सब्सिडी को खुर्द-बुर्द करते हुए गबन कर दिया। इसके अलावा कहवा ग्रुप ने अपने 138 करोड़ रुपये के कर्ज को भी 78 करोड़ रुपये में रिस्ट्रक्चर कराया।

Posted By: Jagran

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