जम्मू-कश्मीर के अफसरों ने विधानसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र, राज्य का दर्जा के प्रस्ताव का किया विरोध; भड़के CM अब्दुल्ला
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में राज्य का दर्जा बहाल करने के प्रस्ताव पर चर्चा नौकरशाही के हस्तक्षेप से रुक गई। मुख्य सचिव ...और पढ़ें
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जम्मू-कश्मीर विधानसभा। फोटो जागरण
HighLights
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में राज्य का दर्जा बहाल करने पर चर्चा रुक गई।
शीर्ष अधिकारियों ने पत्र भेजकर चर्चा को विचाराधीन बताया।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इसे नौकरशाही का अभूतपूर्व हस्तक्षेप कहा।
डिजिटल डेस्क, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में सोमवार को अनोखा मामला सामने आया। इससे पहले ऐसा मामला कभी नहीं हुआ था। राज्य का दर्जा बहाल करने के प्रस्ताव पर चर्चा होनी थी। चर्चा शुरू होने से कुछ घंटे पहले विधानसभा अध्यक्ष को जम्मू-कश्मीर के शीर्ष अधिकारियों से एक पत्र मिला। पत्र में लिखा था कि यह मामला विचाराधीन है और इसलिए प्रस्ताव पर चर्चा नहीं की जा सकती।
जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव अटल डुल्लू और कानून सचिव अचल सेठी ने विधानसभा सचिवालय को अलग-अलग पत्र भेजकर प्रस्ताव को अस्वीकार करने की मांग की है।
विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने कहा कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि नौकरशाही ने विधानसभा की कार्यवाही बाधित करने के लिए सचिवालय को पत्र लिखा हो। वह भी संबंधित मंत्री की अनुमति के बिना।
राज्य का दर्जा ना देने का सीधा प्रमाण
मुख्यमंत्री और कानून मंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि विधानसभा सचिवालय से सूचना मिलने से पहले उन्हें नौकरशाहों द्वारा भेजे गए पत्र की कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि ऐसा पत्र जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा न मिलने का सीधा परिणाम है। उन्होंने कहा कि बिना अनुमति के लिखे गए पत्र स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि नौकरशाही को कोई और नियंत्रित कर रहा है। मुझे नहीं पता कि यह किसके निर्देश पर भेजा गया था।
