जम्मू-कश्मीर में विधायकों की बल्ले-बल्ले, उमर सरकार ने पेश किए 3 नए विधेयक; 1.5 से बढ़कर 3 लाख हो सकता है वेतन
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंत्रियों, मौजूदा और पूर्व विधायकों के वेतन, भत्तों और पेंशन से संबंधित कानूनों में संशोधन के लिए तीन विधेयक पेश किए।
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जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला। फाइल फोटो
HighLights
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए।
मंत्रियों, मौजूदा और पूर्व विधायकों के वेतन-भत्ते, पेंशन में संशोधन प्रस्तावित।
समिति ने विधायकों के वेतन-भत्तों में बढ़ोतरी की सिफारिश की है।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर विधानसभा के जारी शरदकालीन सत्र में सोमवार को जनप्रतिनिधियों के वेतन, भत्तों और पेंशन से जुड़ी बड़ी विधायी पहल सामने आई। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, जो कानून, न्याय एवं संसदीय कार्य विभाग भी संभाल रहे हैं, ने सदन में एक साथ तीन अलग-अलग विधेयक पेश किए। इन विधेयकों के जरिए मंत्रियों, मौजूदा विधायकों और पूर्व विधायकों से जुड़े मौजूदा कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है। तीनों विधेयक असाधारण राजपत्र में पहले ही प्रकाशित किए जा चुके हैं।
विधेयक संख्या 13/2026 के जरिए जम्मू-कश्मीर मंत्रियों और राज्य मंत्रियों के वेतन से संबंधित 1956 के कानून में संशोधन प्रस्तावित किया गया है। यह विधेयक मुख्यमंत्री, मंत्रियों और राज्य मंत्रियों के वेतन तथा उनसे जुड़े प्रावधानों से संबंधित है।
विधेयक संख्या 14/2026 जम्मू-कश्मीर राज्य विधानमंडल के सदस्यों के वेतन और भत्तों से संबंधित 1960 के कानून में संशोधन के लिए है। यानी इसका सीधा संबंध मौजूदा विधायकों के वेतन और विभिन्न भत्तों से है।
वहीं, विधेयक संख्या 15/2026 जम्मू-कश्मीर राज्य विधानमंडल के सदस्यों की पेंशन से संबंधित 1984 के कानून में संशोधन का प्रस्ताव रखता है। इसके दायरे में पूर्व विधायकों की पेंशन से जुड़े प्रावधान आते हैं।
वेतन में बढ़ोतरी की सिफारिश
इन विधेयकों को पेश किए जाने से पहले विधानसभा की संबंधित समिति जनप्रतिनिधियों के वेतन, भत्तों और अन्य सुविधाओं में बदलाव को लेकर अपनी सिफारिशें दे चुकी है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, समिति ने विधायकों के मौजूदा करीब 1.50 लाख रुपये के मासिक पैकेज को बढ़ाकर 3 लाख रुपये करने की सिफारिश की थी।
इसमें मूल वेतन को 60 हजार रुपये से बढ़ाकर 80 हजार रुपये करने के साथ विभिन्न भत्तों में संशोधन का प्रस्ताव शामिल था। समिति ने विधायकों के लिए आवास ऋण की सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 75 लाख रुपये, वाहन अग्रिम की सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये तथा निजी सहायकों के मासिक वेतन को 12 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने की भी सिफारिश की थी।
अंतिम स्थिति विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी
पूर्व विधायकों के पेंशन और भत्तों को मिलाकर 1.10 लाख रुपये मासिक किए जाने का प्रस्ताव भी समिति की सिफारिशों में शामिल था। हालांकि, सोमवार को विधानसभा में पेश किए गए तीनों विधेयकों के उपलब्ध विवरण से इन प्रस्तावित राशि के अंतिम रूप से लागू होने की पुष्टि नहीं होती है। इसलिए इन आंकड़ों को फिलहाल समिति की सिफारिशों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। अंतिम स्थिति विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।
तीनों विधेयक विधानसभा में पेश किए जा चुके हैं और अब इन पर आगे की विधायी प्रक्रिया होगी। खास बात यह है कि सोमवार की कार्रवाई में मंत्रियों के वेतन-भत्तों, मौजूदा विधायकों के वेतन-भत्तों और पूर्व विधायकों की पेंशन, तीनों से जुड़े कानूनों में संशोधन का रास्ता खोला गया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इसी दिन विधानसभा में कुल पांच विधेयक पेश किए। इनमें इन तीन विधेयकों के अलावा माल एवं सेवा कर से जुड़े कानून में संशोधन तथा कुछ आपराधिक प्रावधानों में बदलाव से संबंधित विधेयक भी शामिल हैं।
