कश्मीर की जामा मस्जिद से अमन की दुआ, ईरान समेत युद्धग्रस्त मुल्कों के लिए उठे हजारों हाथ; मीरवाइज ने कही बड़ी बात
श्रीनगर की ऐतिहासिक जामा मस्जिद में कश्मीर सहित ईरान, फिलिस्तीन और यूक्रेन जैसे युद्धग्रस्त क्षेत्रों के लिए अमन की दुआ ...और पढ़ें

मीरवाइज ने कहा- बदलाव के लिए समाज को खुद आगे आना होगा।
HighLights
श्रीनगर जामा मस्जिद में वैश्विक शांति और कश्मीर के लिए दुआ।
मीरवाइज ने जम्मू-कश्मीर में सामाजिक सुधारों हेतु भागीदारी का आह्वान किया।
नशे की लत, युवा तनाव जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों पर जोर।
नवीन नवाज, श्रीनगर। ऐतिहासिक जामा मस्जिद श्रीनगर में शुक्रवार को उठे हजारों हाथों ने सिर्फ कश्मीर के लिए नहीं, बल्कि युद्ध और संघर्ष की आग में झुलस रहे ईरान, फिलिस्तीन, लेबनान, यमन और यूक्रेन समेत दुनिया के प्रभावित क्षेत्रों के लिए अमन की दुआ की। नमाजियों ने निर्दोष लोगों की जान जाने और उनकी पीड़ा के अंत के लिए अल्लाह से रहमत, इंसाफ और राहत की फरियाद की।
शुक्रवार की नमाज के दौरान मीरवाइज-ए-कश्मीर डा मौलवी मोहम्मद उमर फारूक ने वैश्विक संघर्षों के बीच शांति की अपील के साथ जम्मू-कश्मीर में सामाजिक सुधार को लेकर भी समुदाय से निर्णायक भागीदारी का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि समाज की गंभीर समस्याओं पर केवल सम्मेलन करना और प्रस्ताव पारित करना पर्याप्त नहीं है, बदलाव तभी आएगा, जब आम लोग खुद बदलाव की प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे।

मीरवाइज ने हाल में हुए मुत्तहिदा मजलिस-ए-उलेमा जम्मू-कश्मीर (एमएयू) के उलेमा सम्मेलन का हवाला देते हुए कहा कि इसमें अलग-अलग क्षेत्रों और विचारधाराओं से जुड़े विद्वानों ने समाज के सामने खड़ी चुनौतियों पर गंभीर चर्चा की।
उन्होंने नशे की बढ़ती लत, युवाओं में आत्महत्या और भावनात्मक तनाव, इंटरनेट मीडिया के दुरुपयोग, कमजोर होते पारिवारिक रिश्तों, पर्यावरण के क्षरण और सामाजिक सौहार्द को प्रमुख चिंताओं के रूप में रेखांकित किया।उन्होंने कहा कि इन मुद्दों को केवल भाषणों और बैठकों तक सीमित रखने के बजाय परिवार, मस्जिद, मोहल्ले और समुदाय के स्तर पर ठोस पहल में बदलना होगा।
'हालात बदलने के लिए खुद कोशिश करनी होगी'
कुरआन की आयत का हवाला देते हुए मीरवाइज ने कहा कि निस्संदेह, अल्लाह किसी कौम की हालत तब तक नहीं बदलता, जब तक वे खुद अपनी हालत बदलने की कोशिश न करें।
उन्होंने कहा कि सामाजिक सुधार की शुरुआत व्यक्ति के भीतर और परिवार से होनी चाहिए। समाज किसी दूसरे के कदम उठाने का इंतजार करता रहेगा तो बदलाव संभव नहीं होगा। इसके लिए सामूहिक चिंतन, आत्ममंथन और कार्रवाई जरूरी है।
मीरवाइज ने उलेमा, अभिभावकों, युवाओं, मस्जिदों, मदरसों और पूरे समुदाय की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। खास तौर पर माता-पिता से उन्होंने बच्चों और युवाओं के सामाजिक एवं भावनात्मक जीवन पर अधिक ध्यान देने की अपील की।
हर शुक्रवार खुतबों में उठेंगे सामाजिक मुद्दे
मीरवाइज ने बताया कि सामाजिक सरोकारों से जुड़े आम मुद्दों को भाग लेने वाली मस्जिदों में शुक्रवार के खुतबों के दौरान लगातार उठाया जाएगा, ताकि समाज में इन समस्याओं को लेकर जागरूकता और संवाद बना रहे।
उन्होंने लोगों से एमएमयू की सामाजिक सुधार पहलों का समर्थन करने तथा अपने घरों और मोहल्लों में इन मुद्दों पर चर्चा को आगे बढ़ाने की अपील की।
मिम्बर लोगों को जोड़ने की अमानत
मिम्बर की भूमिका पर जोर देते हुए मीरवाइज ने कहा कि यह अमानत और पवित्र जिम्मेदारी है। इसका इस्तेमाल लोगों का मार्गदर्शन करने, दिलों को जोड़ने, आपसी सम्मान बढ़ाने और समाज की वास्तविक चिंताओं को सामने लाने के लिए किया जाना चाहिए, न कि सांप्रदायिक मतभेदों को बढ़ाने के लिए।
उन्होंने कहा कि स्थायी सामाजिक बदलाव तभी संभव है, जब लोग अपने घर, मोहल्ले और समुदाय को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी स्वयं स्वीकार करें।
ईरान दौरे का जिक्र, पेजेशकियन- अराघची से मुलाकात बताई
मीरवाइज ने अपने हालिया ईरान दौरे और वहां हुई उच्चस्तरीय मुलाकातों की जानकारी भी नमाजियों को दी। उन्होंने बताया कि उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन और विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात की।
उनके अनुसार, मुलाकातों के दौरान उन्होंने ईरान के लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त की और कश्मीर तथा ईरान के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों पर चर्चा की।मीरवाइज ने बताया कि ईरानी नेतृत्व ने कश्मीर की यात्रा में रुचि व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि उन्होंने ईरानी नेतृत्व को कश्मीर आने का निमंत्रण भी दिया है।
