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सड़कों पर रेंग रहे वाहन... श्रीनगर में 7.4 किमी की दूरी तय करने में लग रहे 34 मिनट; सड़क क्षमता से 90% ज्यादा ट्रैफिक

Published: Wed, 14 Oct 2026 10:32 PM (IST)

श्रीनगर में यातायात जाम एक गंभीर समस्या बन गया है, जहां 7.4 किमी की दूरी तय करने में औसतन 34 ...और पढ़ें

श्रीनगर की सड़कों पर रफ्तार थमी, 7.4 किमी के सफर में लग रहे 34 मिनट।

श्रीनगर की सड़कों पर रफ्तार थमी, 7.4 किमी के सफर में लग रहे 34 मिनट।

HighLights

  1. श्रीनगर में 7.4 किमी सफर में लगते हैं 34 मिनट।

  2. लाल चौक, एमए रोड पर यातायात क्षमता से 90% अधिक।

  3. सार्वजनिक परिवहन, सड़क सुधार से मिलेगी जाम से राहत।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। श्रीनगर में सड़क पर कुछ किलोमीटर का सफर भी अब लंबा समय ले रहा है। शहर में औसतन 7.4 किलोमीटर की दूरी तय करने में करीब 34 मिनट लगने का अनुमान है। वहीं, लाल चौक और एमए रोड जैसे प्रमुख मार्गों पर वाहनों का दबाव सड़क की क्षमता के 90 प्रतिशत से अधिक पहुंच गया है।

एक अंतरराष्ट्रीय शोध में सामने आया है कि ट्रैफिक जाम की यह समस्या केवल सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारों तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर के सड़क ढांचे और बढ़ते यातायात के बीच का अंतर भी इसकी बड़ी वजह है।

वहीं, ट्रैफिक विभाग के डीआईजी हसीब-उर-रहमान भी हाल ही में शहर में बढ़ते यातायात दबाव के लिए दूसरे जिलों से आने वाले लोगों की आवाजाही का उल्लेख करते हुए सड़क ढांचे को बेहतर बनाने की जरूरत जता चुके हैं।

लाल चौक और एमए रोड पर क्षमता से ज्यादा दबाव

एल्सेवियर की शोध पत्रिका ‘ट्रांसपोर्टेशन रिसर्च प्रोसीडिया’ में 2026 में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, लाल चौक और एमए रोड के आसपास प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव सड़क की अनुमानित क्षमता के 90 प्रतिशत से अधिक पहुंच चुका है।

इन मार्गों पर वाहनों की औसत गति 16 से 22 किलोमीटर प्रति घंटा के बीच रहने का अनुमान है। जहांगीर चौक और बटमालू भी अधिक यातायात दबाव वाले क्षेत्रों में शामिल हैं। इसके मुकाबले नौहट्टा और एयरपोर्ट रोड पर दबाव अपेक्षाकृत कम पाया गया।

शोध में शहर के लगभग 1100 किलोमीटर लंबे सड़क नेटवर्क का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि पूर्व अध्ययनों के अनुसार, केवल 30 प्रतिशत सड़कें करीब 60 प्रतिशत यातायात का बोझ उठाती हैं। एमए रोड से डलगेट तक के मार्ग पर प्रतिदिन लगभग 45 हजार वाहनों की आवाजाही का अनुमान है।

दूसरे जिलों से आने वाले वाहनों का भी असर

डीआईजी ट्रैफिक कश्मीर हसीब-उर-रहमान का कहना है कि विभिन्न जिला मुख्यालयों से लोगों का नियमित रूप से श्रीनगर आना शहर में यातायात बढ़ने का एक कारण है। उनके मुताबिक, शुक्रवार को यातायात अपेक्षाकृत सुचारु रहता है, लेकिन लोगों को शहर आने से रोका नहीं जा सकता। ऐसे में सड़क ढांचे को उन्नत करने की जरूरत है।

डीआईजी का यह बयान शोध के निष्कर्षों के साथ शहर की यातायात चुनौती के दो पहलुओं को सामने रखता है। एक ओर शहर के भीतर कुछ प्रमुख मार्गों पर वाहनों का अत्यधिक दबाव है, वहीं दूसरी ओर बाहर से आने वाले लोगों की आवाजाही भी सड़क नेटवर्क पर अतिरिक्त भार डालती है।

शोध के अनुसार, श्रीनगर में प्रतिदिन होने वाली कुल यात्राओं में करीब 62 प्रतिशत हिस्सेदारी निजी वाहनों की है। अध्ययन में बेहतर सार्वजनिक परिवहन, यातायात प्रबंधन और पैदल यात्रियों के लिए सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया गया है। शोध के मॉडल के अनुसार, टिकाऊ परिवहन व्यवस्था अपनाने पर सड़क नेटवर्क की औसत गति 18 से बढ़कर 22 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। हालांकि, यह संभावित सुधार का अनुमान है, मौजूदा सड़कों पर दर्ज वास्तविक बदलाव नहीं।

समाधान के लिए योजना और अमल जरूरी

मुझम्मिल यासीन पीर, आकिब अली, बसराह बिलाल और मेहविश बिलाल के इस शोध में श्रीनगर में जाम से राहत के लिए सड़क ढांचे के विस्तार के साथ सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना, पार्किंग व्यवस्था सुधारना और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाना जरूरी होगा। शोध के निष्कर्ष और ट्रैफिक विभाग के अधिकारी का बयान संकेत देते हैं कि समस्या का समाधान केवल यातायात नियंत्रित करने से नहीं, बल्कि बढ़ती मांग के अनुरूप परिवहन व्यवस्था विकसित करने से भी जुड़ा है।