कौन है खूंखार आतंकी लटरम? 26 साल बाद चर्चा में, कंधार हाईजैक में रिहा हुआ था; कश्मीर में फिर पैर पसारने की कोशिश
पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ कश्मीर में मरणासन्न आतंकवाद को पुनर्जीवित करने के लिए अल-उमर मुजाहिदीन को सक्रिय करने की कोशिश ...और पढ़ें

'अल-उमर' को फिर सक्रिय करने की कोशिश, ISI का नया षडयंत्र। (फाइल फोटो)
HighLights
आइएसआइ कश्मीर में अल-उमर मुजाहिदीन को पुनर्जीवित कर रहा है।
मुश्ताक लटरम लश्कर और जैश की गतिविधियों को बढ़ाएगा।
श्रीनगर में स्थानीय आतंकियों की भर्ती बढ़ाने का मंसूबा।
नवीन नवाज, श्रीनगर। कश्मीर में मरणासन्न आतंकवाद में फिर से नए प्राण फूंकने के लिए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ ने कागजों तक सीमित हो चुके पुराने आतंकी संगठन अल-उमर मुजाहिदीन को फिर से सक्रिय करने का मंसूबा बनाया है। अल-उमर मुजाहिदीन का सरगना मुश्ताक अहमद जरगर उर्फ मुश्ताक लटरम है और उसकी मदद से आइएसआइ न सिर्फ लश्कर और जैश की गतिविधियों में तेजी लाना चाहती है बल्कि स्थानीय आतंकियों की भर्ती भी बढ़ाना चाहती है।
उल्लेखनीय है कि बीते एक वर्ष के दौरान घाटी में सक्रिय स्थानीय आतंकियों की संख्या दहाई के आंकड़े से भी कम हो चुकी है।
कौन है आतंकी लटरम?
मुश्ताक अहमद जरगर उर्फ लटरम उन तीन आतंकियों में से एक है, जिसे भारत सरकार ने 31 दिसंबर 1999 को कंधार में आइसी-814 विमान व उसमें सवार सभी यात्रियों को रिहा कराने के लिए रिहा किया गया था।
लटरम के साथ जैश सरगना अजहर मसूद और शेख उमर सईद को रिहा किया गया था। लटरम पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ, जैश ए मोहम्मद और लश्कर ए तैयबा का भी करीबी है।
लटरम पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी और आतंकी संगठनों के लिए कितना अहम है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया सकता है कि आतंकी शेख उमर ने 1994 में दिल्ली में चार विदेशी आतंकियों को अगवा किया था और उसने जिन आतंकियों की रिहाई की मांग की थी, उनमें लटरम भी था।
वर्ष 1995 में अल-फरान ने पहलगाम में अगवा किए गए विदेशी पर्यटकों की रिहाई के बदले जिन आतंकियों को रिहा करने की मांग की थी, उनमें भी लटरम शामिल था।
लटरम ने अफगानीस्तान और गुलाम जम्मू कश्मीर में सक्रिय जैश के आतंकी शिविरों में कश्मीरी आतंकियों की ट्रेनिंग का भी संचालन किया है। कट्टर जिहादी मानसिकता का लटरम अफगानी आतंकियों का भी करीबी है।
श्रीनगर में जेकेएलएफ के बाद अल-उमर का रहा बड़ा नेटवर्क
कश्मीर में आतंकरोधी अभियान में शामिल एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि अगर श्रीनगर शहर के भीतर जेकेएलएफ के बाद किसी अन्य आतंकी संगठन का सबसे ज्यादा नेटवर्क रहा है तो वह अल-उमर मुजाहिदीन ही कहा जाएगा, क्योंकि जरगर स्वयं श्रीनगर के डाउन टाउन का रहने वाला था।
वह कथित तौर पर 40 से ज्यादा हत्याओं और कश्मीरी हिंदुओं पर हमले की विभिन्न वारदातों में लिप्त रहा है।
अब्दुल गनी लोन हत्याकांड में भी अल-उमर के कमांडर का नाम
वर्ष 2000 में अल उमर ने श्रीनगर में पुलिस नियंत्रण कक्ष पर आत्मघाती आतंकी हमला किया था। इस हमले में 12 पुलिसकर्मी बलिदानी हुए थे।
पीपुल्स कान्फ्रेंस के चेयरमैन सज्जाद गनी लोन के पिता अब्दुल गनी लोन की 2002 में हुई हत्या के लिए बेशक लश्कर ए तैयबा को जिम्मेदार ठहराया जाता है, लेकिन हत्या को अंजाम देने में अल-उमर मुजाहिदीन के स्थानीय कमांडर फारुक लिदरी का हाथ था।
2006 के बाद कश्मीर में नहीं हुई संगठन की कोई आतंकी वारदात
मुश्ताक लटरम ने बीते 26 वर्ष से अपनी गतिविधियां सीमित रखी हुई थी और वह कभी कभार गुलाम जम्मू कश्मीर, पाकिस्तान और अफगानीस्तान से कश्मीर में आतंकी हिंसा के संदर्भ में बयान जारी करता रहा है।
उसके संगठन के कश्मीर में सक्रिय लगभग सभी आतंकी मारे जा चुके हैं या फिर जेलों में बंद हैं। वर्ष 2006 के बाद उसके संगठन ने प्रत्यक्ष तौर पर कयमीर में किसी आतंकी वारदात को अंजाम नहीं दिया है।
अल-उमर का ओवरग्राउंड नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हुआ
संबंधित सूत्रों का दावा है कि अल-उमर मुजाहिदीन भले ही आज कागजों तक सीमित नजर आता हो, लेकिन श्रीनगर के डाउन टाउन, पुलवामा और बारामुला में उसका ओवरग्राउंड वर्कर नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, संगठन के ओवरग्राउंड वर्कर फिलहाल निष्क्रिय हैं, लेकिन उनकी मौजूदगी को कम करके नहीं आंका जा सकता।
जैश-लश्कर को फिर सक्रिय करने की आशंका
अल उमर मुजाहिदीन सरगना लटरम के बारे में कहा जाता है कि श्रीनगर में किसी भी समय वह अपने लिए स्थानीय आतंकी तैयार कर सकता है और आतंकी हमलों में तेजी ला सकता है, इसी कारण अब पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी उसे आगे बढ़ाना चाहती है। इसके अलावा वह लटरम के स्थानीय नेटवर्क की मदद से जैश और लश्कर के नेटवर्क को कश्मीर में फिर से तैयार करना चाहती है।
यह तभी संभव है जब वह अल-उमर मुजाहिदीन को पैसे और हथियार के साथ मदद करे। इसके अलावा वर्ष 2006 तक उल उमर का कैडर लश्कर,जैश, हरकत के आतंकियों के साथ मिलकर काम करता रहा है। अल-उमर के कई आतंकियों ने बाद में लश्कर का दामन भी थामा।
श्रीनगर में बड़ी वारदात की फिराक में आतंकी
इसके अलावा श्रीनगर में जहां आतंकी एक लंबे समय से किसी बड़ी वारदात की फिराक में हैं, अल-उमर मुजाहिदीन की मदद से अपना नेटवर्क और गतिविधियां दोनों बढ़ा सकते हैं। अगर श्रीनगर में आतंकी गतिविधियां बढ़ती हैं तो उनका असर पूरे कश्मीर मे होगा और यही आइएसआइ का मुख्य मकसद है।
