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'कश्मीर के जंगलों की हिफाजत के लिए चाहिए एक्सपर्ट', वन भर्ती नियमों पर इल्तिजा मुफ्ती ने उठाए सवाल

Published: Thu, 22 Oct 2026 09:57 PM (IST)

पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर में वन विभाग की भर्ती प्रक्रिया में फॉरेस्ट्री स्नातकों की पेशेवर योग्यता को प्राथमिकता देने की अपील की है।

वन भर्ती नियमों पर इल्तिजा मुफ्ती ने उठाए सवाल।

वन भर्ती नियमों पर इल्तिजा मुफ्ती ने उठाए सवाल।

HighLights

  1. इल्तिजा मुफ्ती ने वन भर्ती नियमों पर सवाल उठाए।

  2. फॉरेस्ट्री स्नातकों की पेशेवर योग्यता को प्राथमिकता देने की मांग।

  3. जंगलों की सुरक्षा हेतु प्रशिक्षित मानव संसाधन आवश्यक।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। कश्मीर के जंगलों, जैव विविधता और नाजुक पारिस्थितिकी की सुरक्षा के लिए क्या वन विभाग में भर्ती के नियमों में पेशेवर योग्यता को प्राथमिकता नहीं मिलनी चाहिए? पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की नेता इल्तिजा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर में फॉरेस्ट्री स्नातकों की भर्ती का मुद्दा उठाते हुए सरकार से इस सवाल पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है।

स्कास्ट-के के गांदरबल स्थित बेन्हामा परिसर में वन विभाग की भर्ती प्रक्रिया को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों के बीच पहुंची पीडीपी वरिष्ठ नेता इल्तिजा मुफ्ती ने कहा कि फॉरेस्ट्री की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी चार वर्षों में करीब 80 विषयों का अध्ययन करते हैं।

ऐसे में वन विभाग के तकनीकी और पेशेवर पदों पर उनकी विशेषज्ञता को नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा। उन्होंने वन मंत्री जावेद अहमद राणा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से भर्ती नियमों में बदलाव पर विचार करने का आग्रह किया।

मुफ्ती ने चिकित्सा शिक्षा का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह डॉक्टर बनने के लिए एमबीबीएस की डिग्री जरूरी होती है, उसी तरह फॉरेस्ट्री से जुड़े पदों के लिए भी संबंधित पेशेवर योग्यता को महत्व दिया जाना चाहिए। जंगलों के प्रबंधन, वन संरक्षण और पर्यावरण से जुड़े कार्यों में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त उम्मीदवारों की भूमिका अहम है।

जम्मू-कश्मीर में वन संरक्षण का सवाल केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित नहीं है। जंगलों का वैज्ञानिक प्रबंधन, जैव विविधता की रक्षा, वन्यजीव संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन की जरूरत होती है। इल्तिजा मुफ्ती ने भी वनों की कटाई और पर्यावरणीय क्षरण का हवाला देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में फॉरेस्ट्री विशेषज्ञों की भूमिका को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

उनकी दलील है कि भर्ती नीति तैयार करते समय पद की वास्तविक जिम्मेदारियों और उसके लिए जरूरी तकनीकी ज्ञान को ध्यान में रखना चाहिए। इससे एक ओर योग्य स्नातकों की शिक्षा को उचित मान्यता मिल सकती है, तो दूसरी ओर वन विभाग की पेशेवर क्षमता को मजबूत करने में भी मदद मिल सकती है।

इल्तिजा मुफ्ती ने वन मंत्री जावेद अहमद राणा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से भर्ती नियमों की समीक्षा करने तथा फॉरेस्ट्री स्नातकों की मांगों पर विचार करने की अपील की।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। कश्मीर के जंगलों, जैव विविधता और नाजुक पारिस्थितिकी की सुरक्षा के लिए क्या वन विभाग में भर्ती के नियमों में पेशेवर योग्यता को प्राथमिकता नहीं मिलनी चाहिए? पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की नेता इल्तिजा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर में फॉरेस्ट्री स्नातकों की भर्ती का मुद्दा उठाते हुए सरकार से इस सवाल पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है।
स्कास्ट-के के गांदरबल स्थित बेन्हामा परिसर में वन विभाग की भर्ती प्रक्रिया को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों के बीच पहुंची पीडीपी वरिष्ठ नेता इल्तिजा मुफ्ती ने कहा कि फॉरेस्ट्री की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी चार वर्षों में करीब 80 विषयों का अध्ययन करते हैं। 
ऐसे में वन विभाग के तकनीकी और पेशेवर पदों पर उनकी विशेषज्ञता को नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा। उन्होंने वन मंत्री जावेद अहमद राणा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से भर्ती नियमों में बदलाव पर विचार करने का आग्रह किया।
मुफ्ती ने चिकित्सा शिक्षा का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह डॉक्टर बनने के लिए एमबीबीएस की डिग्री जरूरी होती है, उसी तरह फॉरेस्ट्री से जुड़े पदों के लिए भी संबंधित पेशेवर योग्यता को महत्व दिया जाना चाहिए। जंगलों के प्रबंधन, वन संरक्षण और पर्यावरण से जुड़े कार्यों में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त उम्मीदवारों की भूमिका अहम है।
जम्मू-कश्मीर में वन संरक्षण का सवाल केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित नहीं है। जंगलों का वैज्ञानिक प्रबंधन, जैव विविधता की रक्षा, वन्यजीव संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन की जरूरत होती है। इल्तिजा मुफ्ती ने भी वनों की कटाई और पर्यावरणीय क्षरण का हवाला देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में फॉरेस्ट्री विशेषज्ञों की भूमिका को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
उनकी दलील है कि भर्ती नीति तैयार करते समय पद की वास्तविक जिम्मेदारियों और उसके लिए जरूरी तकनीकी ज्ञान को ध्यान में रखना चाहिए। इससे एक ओर योग्य स्नातकों की शिक्षा को उचित मान्यता मिल सकती है, तो दूसरी ओर वन विभाग की पेशेवर क्षमता को मजबूत करने में भी मदद मिल सकती है।
इल्तिजा मुफ्ती ने वन मंत्री जावेद अहमद राणा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से भर्ती नियमों की समीक्षा करने तथा फॉरेस्ट्री स्नातकों की मांगों पर विचार करने की अपील की।