कश्मीर की बर्फ पर दौड़ेंगे देशभर के खिलाड़ी, श्रीनगर में नेशनल स्नोशू कैंप शुरू; 2027 में होगी बड़ी चैंपियनशिप
श्रीनगर में 7 से 10 अक्टूबर तक नेशनल स्नोशू कोचिंग कैंप आयोजित किया जा रहा है, जो 2027 वर्ल्ड स्नोशू ...और पढ़ें

राष्ट्रीय प्रतियोगिता की मेजबानी भी करेगा जम्मू-कश्मीर। (फाइल फोटो)
HighLights
श्रीनगर में नेशनल स्नोशू कोचिंग कैंप 7 से 10 अक्टूबर तक।
2027 वर्ल्ड चैंपियनशिप की तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा यह कैंप।
जम्मू-कश्मीर 2027 नेशनल स्नोशू चैंपियनशिप की मेजबानी करेगा।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर अब सिर्फ अपनी बर्फीली वादियों और पर्यटन के लिए ही नहीं, बल्कि विंटर स्पोर्ट्स के बड़े केंद्र के तौर पर भी अपनी पहचान बनाने की तैयारी में है। इसी दिशा में श्रीनगर में 7 से 10 अक्टूबर तक नेशनल स्नोशू कोचिंग कैंप आयोजित किया जाएगा। यह कैंप वर्ष 2027 में होने वाली वर्ल्ड स्नोशू चैंपियनशिप की तैयारियों का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
स्नोशू बर्फ पर विशेष जूतों की मदद से दौड़ने वाला रोमांचक खेल है। जम्मू-कश्मीर की बर्फ से ढकी पहाड़ियां और लंबी सर्दियां इस खेल के लिए प्राकृतिक रूप से बेहद अनुकूल मानी जाती हैं। ऐसे में इस कैंप के जरिए खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने के साथ-साथ प्रदेश की खेल क्षमता को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने की कोशिश होगी।
स्नोशू फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएसएफआइ) के अनुसार, श्रीनगर में आयोजित होने वाला यह प्रशिक्षण शिविर देशभर के खिलाड़ियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर होगा। फेडरेशन का लक्ष्य जम्मू-कश्मीर में स्नोशू रनिंग को विकसित करना और अधिक युवाओं को इस खेल से जोड़ना है।
पर्यटन और विंटर स्पोर्ट्स क्षमता दुनिया के सामने लाना है लक्ष्य
एसएसएफआइ के अध्यक्ष और वर्ल्ड स्नोशू फेडरेशन के उपाध्यक्ष मीर मुदस्सर ने कहा कि फेडरेशन जम्मू-कश्मीर में इस खेल को बढ़ावा देने के साथ क्षेत्र की पर्यटन और विंटर स्पोर्ट्स क्षमता को भी दुनिया के सामने लाना चाहता है।
खास बात यह है कि जम्मू-कश्मीर को 11वीं नेशनल स्नोशू चैंपियनशिप-2027 की मेजबानी भी सौंपी गई है। यानी आने वाले समय में कश्मीर की बर्फ पर सिर्फ पर्यटक ही नहीं, बल्कि देशभर के खिलाड़ी भी अपनी रफ्तार आजमाते नजर आएंगे।
\यह पहल जम्मू-कश्मीर के लिए खेल, पर्यटन और रोजगार की नई संभावनाओं के दरवाजे खोलने का अवसर बन सकती है। विभाग का कहना है कि बर्फीली वादियों से निकलने वाले खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन कर सकते हैं।
